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बजट से उम्मीद: आर्थिक वृद्धि दर बढ़ाने के लिए आयकर में कटौती और निवेश पर जोर जरूरी, खपत के लिए पैसा देना होगा

Mon, 20 Jan 2025 07:33 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 20 Jan 2025 07:33 AM IST
सार

16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद के सदस्य डीके श्रीवास्तव ने कहा, शहरी खपत पिछड़ रही है, इसलिए व्यक्तिगत आयकर संरचना को दरों और कटौती दोनों के संदर्भ में तर्कसंगत बनाना चाहिए, ताकि खर्च करने के लिए अतिरिक्त पैसा निम्न और मध्य आय वर्ग के हाथों में आ सके।

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Reduce personal income tax allocate more capital for investment to boost Indian economy
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत आयकर को कम करने और निवेश के लिए ज्यादा पूंजी आवंटित करने जैसे घरेलू कारकों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। 16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद के सदस्य डीके श्रीवास्तव ने कहा, शहरी खपत पिछड़ रही है, इसलिए व्यक्तिगत आयकर संरचना को दरों और कटौती दोनों के संदर्भ में तर्कसंगत बनाना चाहिए, ताकि खर्च करने के लिए अतिरिक्त पैसा निम्न और मध्य आय वर्ग के हाथों में आ सके।

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श्रीवास्तव ने कहा, इस समय वैश्विक आर्थिक स्थितियां दुनियाभर की आर्थिकी  के लिए उपयुक्त नहीं हैं। ऐसे में सरकार को घरेलू मांग जैसे कारकों पर बहुत अधिक निर्भर रहना पड़ता है। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमानों की तुलना में पूंजीगत खर्च में 20 फीसदी की वृद्धि होनी चाहिए। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8 फीसदी और अगले वित्त वर्ष में 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है।
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श्रीवास्तव के मुताबिक, उम्मीद है कि सरकार राजकोषीय प्रोत्साहन उपायों के लिए निवेश और कुछ हद तक खपत जैसे तरीकों का चयन करेगी। निवेश घरेलू मांग का मुख्य चालक है, जो अब तक यह सफल रहा है। यही कारण है कि पिछले तीन साल में हमारी आर्थिक वृद्धि दर मजबूत रही है। चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 6.4 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है। पिछले साल जुलाई में पेश आर्थिक सर्वे में चालू वित्त वर्ष के लिए 6.5-7 फीसदी की वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया था।
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सरकारी खर्च में कमी से विकास दर में गिरावट
चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की आरि्थक वृदि्ध दर में जो नरमी देखी गई है, वह मुख्य रूप से सरकारी पूंजी के खर्च में कमी के कारण है। अप्रैल-नवंबर, 2024 के बीच सरकार ने 5.13 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च किया, जो 11.11 लाख करोड़ के बजट अनुमान का 46 फीसदी है। इसका मतलब है कि चालू वित्त वर्ष के बचे महीनों में ही सरकार को 54 फीसदी खर्च करना होगा।

  • राजकोषीय प्रोत्साहन के एक हिस्से के रूप में निवेश की वृद्धि की रफ्तार को बहाल करना होगा। इसके साथ ही, खपत पर होने वाले खर्च को भी प्रोत्साहित करने की भी आवश्यकता होगी।
  • खपत घटने के कारण चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर उम्मीद से अधिक घटकर 5.4 फीसदी पर आ गई। 

पूंजीगत खर्च को बढ़ाने की जरूरत: आरबीआई
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के सदस्य नागेश कुमार का मानना है कि आर्थिक विकास को बढ़ावा देने व इसे और अधिक टिकाऊ बनाने के लिए पूंजीगत खर्च के साथ बुनियादी ढांचे में निवेश पर ध्यान देने की जरूरत है। बुनियादी ढांचे के खर्च को बनाए रखने और इसे आगे बढ़ाने से आर्थिक विकास को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

  • कुमार ने कहा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिस तरह दो साल पहले पूंजीगत व बुनियादी ढांचे के खर्च पर जोर दिया था, इस बार भी वह इसे जारी रखेंगी। 

बुनियादी ढांचे का अगला संस्करण लाने की आवश्यकता
16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद के सदस्य डीके श्रीवास्तव ने कहा, अब समय आ गया है कि सरकार 5-6 साल पहले शुरू की गई बुनियादी ढांचा का अगला संस्करण लाए। यानी इसमें और ज्यादा तेजी लानी होगी। बजट में मौद्रिक पक्ष से कुछ समर्थन की उम्मीद है और वित्त वर्ष 2026 में आरबीआई दो बार में में ब्याज दरों में 0.5 फीसदी की कटौती कर सकता है।

विनिर्माण बढ़ाने को सीमा शुल्क में कटौती संभव : डेलॉय
डेलॉय इंडिया का कहना है कि सरकार स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए चिकित्सा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक सामान और फुटवियर उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर सीमा शुल्क घटा सकती है। अभी एक दर्जन से अधिक सीमा शुल्क दरें हैं। सरकार स्लैब की संख्या को घटाकर 4 या 5 करने पर विचार कर रही है।

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