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UBI Report: नए आरबीआई गवर्नर के रुपये पर लचीले रुख से 2025 में घरेलू करेंसी 1.8% टूटा, यूबीआई की रिपोर्ट

Sat, 01 Mar 2025 01:59 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 01 Mar 2025 01:59 PM IST
सार

UBI Report: भारतीय मुद्रा के प्रबंधन में आरबीआई की ओर से किए गए नीतिगत बदलावों ने डॉलर के मुकाबले रुपये को काफी कमजोर किया है। 2025 के पहले दो महीनों में, भारतीय रुपये में पहले से ही 2024 में हुए मूल्यह्रास के आधे से अधिक मूल्यह्रास हो चुका है। यूनियन बैंक ने एक रिपोर्ट में यह बात कही है।

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RBIs new governor stand of a flexible rupee led to 1.8pc depreciation against USD in 2025: UBI Report
संजय मल्होत्रा - फोटो : PTI

विस्तार

भारतीय मुद्रा के प्रबंधन में आरबीआई की ओर से किए गए नीतिगत बदलावों ने डॉलर के मुकाबले रुपये को कमजोर किया है। डॉलर की तुलना में रुपये में 2025 के पहले दो महीनों में 2024 में हुए मूल्यह्रास की तुलना में आधे से अधिक की गिरावट आ चुकी है। 28 फरवरी तक रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.8 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। यह गिरावट इससे पहले 2023 में आई 1.5 प्रतिशत की गिरावट से अधिक है और 2024 में दर्ज तीन प्रतिशत की कमजोरी का लगभग आधा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है। 

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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के रुख से रुपये में गिरावट: रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के रुख में बदलाव को रुपये में गिरावट के लिए जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मल्होत्रा की अगुवाई में केंद्रीय बैंक ने अधिक लचीले रुपये के लिए विकल्प खुला छोड़ रखा है। आरबीआई रुपये को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने की अनुमति दे रहा है। जबकि पूर्व आरबीआई गवर्नर दास ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये को बहुत स्थिर रखने का समर्थन किया था, इससे भी रुपये पर दबाव पड़ रहा है।

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अमेरिकी व्यापार नीति से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी

व्यापार युद्ध के जोखिमों के बढ़ने और अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता ने बाजार की चिंताओं को जन्म दिया है। वैश्विक व्यापार व्यवधानों के बारे में निवेशकों की चिंता के कारण रुपया, अन्य एशियाई मुद्राओं के साथ दबाव में आ गया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नीतिगत बदलाव ने भी रुपये को प्रभावित किया है।

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नए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का रुपये पर रुख अधिक लचीला

नए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अधिक लचीला रुख अपनाया है, जिसमें कहा गया है कि केंद्रीय बैंक रुपये को अन्य उभरते बाजार मुद्राओं के साथ स्वतंत्र रूप से चलने की अनुमति देगा। यह पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के रुख से अलग है, जिन्होंने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिर रुपये को प्राथमिकता दी थी। पदभार ग्रहण करने के बाद से, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कई व्यापार शुल्क घोषणाएं की हैं। उनका पहला कदम कनाडा और मैक्सिको से आने वाले सामानों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाना था, जिसे 30 दिनों की देरी से लागू किया गया, लेकिन फिर भी 3 फरवरी को रुपया 87.00 के स्तर को पार कर गया।

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