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RBI: आरबीआई का यू-टर्न, बैंकों के निजीकरण को बुलेटिन में गलत ठहराया, अब कहा- ये लेखक के ‘निजी विचार’

Fri, 19 Aug 2022 05:59 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Fri, 19 Aug 2022 05:59 PM IST
सार

RBI: आरबीआई की ओर से जारी बुलेटिन में कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फाइनेंशियल इनक्लूजन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनका निजीकरण सोच-समझकर किया जाना चाहिए।

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RBI U-turn on bank privatization, first claimed wrong, now said- these are the author's 'personal views'
RBI Admit Card 2022 - फोटो : Social Media

विस्तार

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में अपने बुलेटिन में कही गई बात से यू-टर्न ले लिया है। देश के केंद्रीय बैंक ने अपनी ओर से सफाई जारी करते हुए कहा है कि उसके बुलेटिन में बैंकों के निजीकरण पर जो बात कही गई है वह लेखक के निजी विचार हैं। रिजर्व बैंक इससे  सहमत नहीं है। यह आरबीआई के नजरिए को व्यक्त नहीं करता है। बता दें कि आरबीआई की ओर से हाल ही में जारी बुलेटिन में कहा गया है कि देश में बैंकों का निजीकरण सोच-समझ कर होना चाहिए। इसमें कहा गया है कि बैंकों का तेजी से निजीकरण करना सही नहीं होगा। 

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आरबीआई ने कहा- बुलेटिन में कही गई बात लेखकों के ‘निजी विचार’ 

अब आरबीआई ने इस मामले में अपनी तरफ से स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि कुछ मीडिया रिपोर्टस में यह बात कही जा रही है कि आरबीआई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण से सहमत नहीं है। इन रिपोर्ट्स में आरबीआई की ओर से जारी बुलेटिन (Privatisation of PSBs an alternate perspective) का हवाला दिया जा रहा है। आरबीआई का कहना है कि इस रिपोर्ट को आरबीआई के रिसर्चरों ने तैयार किया है। इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं। यह आरबीआई के नजरिए को व्यक्त नहीं करता है। आरबीआई इससे सहमत नहीं है। 

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बता दें कि आरबीआई की ओर से जारी बुलेटिन में कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फाइनेंशियल इनक्लूजन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनका निजीकरण सोच-समझकर किया जाना चाहिए। बुलेटिन में कहा गया है कि निजी बैंकों का मुख्य उद्देश्य मुनाफा बढ़ाना है, जबकि सरकारी बैंकोंं का उद्देश्य समाजिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करना है। 

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सार्वजनिक बैंकों की 33% शाखाएं ग्रामीण इलाकों में

रिपोर्ट के अनुसार दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शाखाओं की उपस्थिति अहम है। मार्च 2021 तक के आंकड़ों में दावा किया गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों की 33% शाखाएं ग्रामीण इलाकों में हैं। निजी बैंकों के मामले में यह आंकड़ा करीब 21% है। वहीं सेमी अर्बन इलाकों में निजी बैंक 32% बैंक शाखाओं के साथ आगे हैं। शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक शाखाओं का हिस्सा करीब 19% है, जबकि शहरी इलाकों में निजी बैंकों की हिस्से दारी 21% के  आसपास है।



देश के महानगरों में निजी बैंक शाखाओं की 26.5% है। महानगरों में निजी बैंक लीड कर रहे हैं। आरबीआई की बुलेटिन में यह भी दावा किया गया है कि बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और एटीएम की संख्या के मामले में भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ग्रामीण इलाकों में अव्वल हैं। आंकड़ों के अनुसार जनधन योजना के 45 करोड़ खातों में से 78% सरकारी बैंकों में ही हैं, इन खातों में 60% ग्रामीण और अर्ध शहरी इलाकों में हैं।

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