निवेश-बचत: कर्ज ले रहे हैं तो रुकें, एफडी के लिए अच्छा समय; खुदरा महंगाई घटने से मिल रहा फायदा
आरबीआई ने लगातार तीन बार में रेपो दर में एक फीसदी की कटौती के बाद इस महीने इस चक्र को रोक दिया। हालांकि, आगे दरों में कमी की संभावना है। ऐसे में आप अभी लोन लेने वाले हैं तो थोड़ा ठहरें। फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी करना चाहते हैं तो यह अच्छा समय है, क्योंकि उच्च ब्याज पर आप पैसे को लॉक कर सकते हैं।
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आरबीआई के रेपो दर को अपरिवर्तित रखने के फैसले से होम लोन लेने वालों को तुरंत कोई फायदा नहीं होगा। कई ऐसे कारक हैं, जो आगे ब्याज दर में कटौती की उम्मीद जगाए हुए हैं। इस साल होम लोन लेने वाले सबसे ज्यादा खुश हैं, क्योंकि रेपो दर फरवरी से जून तक एक फीसदी कम हुई है। अधिकांश होम लोन फ्लोटिंग रेट वाले और रेपो रेट से जुड़े होते हैं, इसलिए रेपो रेट में किसी भी कमी से बड़ी संख्या में होम लोन लेने वालों के लिए ब्याज दरें कम हो जाती हैं। खुदरा महंगाई आरबीआई के प्राथमिक फोकस क्षेत्रों में से एक है। इसी के आधार पर केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में बदलाव करने या न करने का निर्णय लेता है।
खुदरा महंगाई घटने से मिल रहा फायदा
खुदरा महंगाई में लगातार आठ महीनों से गिरावट जारी है। जून में यह और घटकर 2.1 फीसदी पर आ गई। महंगाई जितनी कम होगी, आरबीआई नीतिगत दरों में कटौती करने में उतना ही सहज महसूस करेगा। वर्तमान महंगाई की दर के जितना रेपो दर घट चुकी है। अब केंद्रीय बैंक भविष्य में महंगाई की स्थायी दिशा के आधार पर ब्याज दरों में कटौती का निर्णय लेगा। इसके अलावा, अच्छे मानसून और खरीफ की बुआई की पृष्ठभूमि में मुद्रास्फीति में गिरावट से इस पर नियंत्रण बना रहेगा, जिससे एक बार और नीतिगत दर कटौती करने में मदद मिल सकेगी।
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बहुत सीमित होते हैं विकल्प
जब ब्याज दरें गिर रही हों, तो एफडी निवेशकों के पास बहुत सीमित विकल्प उपलब्ध होते हैं। नुकसान कम करने और मौजूदा स्थिति का अधिकतम लाभ उठाने के लिए उन्हें ये कदम उठाने चाहिए...
- मौजूदा उच्च ब्याज पर निवेश को लॉक-इन करें। कुछ बैंक अब भी लंबी अवधि की एफडी पर 8% या उससे अधिक ब्याज दरें दे रहे हैं। इनमें स्मॉल फाइनेंस बैंकों की संख्या ज्यादा है। कुछ सरकारी और निजी बैंक 7 फीसदी से ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। यह सुरक्षित है।
- ब्याज दर का चक्र बढ़ती दरों से गिरती दरों की ओर पलट गया है। इसलिए, इसके अपने निचले स्तर पर पहुंचने और फिर से पटरी पर आने में कुछ समय लग सकता है। अल्पकालिक एफडी पर ब्याज दर में तेजी से कमी आएगी। मध्यम से दीर्घकालिक एफडी पर ब्याज दर में गिरावट आने में कुछ समय लग सकता है। इसलिए, मध्यम से दीर्घकालिक एफडी करें।
- जोखिम उठाने को तैयार हैं, तो कॉरपोरेट एफडी अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां ज्यादा ब्याज मिलता है, लेकिन जोखिम भी उसी तरह से ज्यादा होता है।
एफडी पर ज्यादा ब्याज के लिए अभी फिक्स करें रकम
एफडी पर उच्च ब्याज दरों का दौर खत्म होने वाला है। रेपो रेट अपरिवर्तित होने से कुछ समय जरूर मिल गया है। फिर भी पिछली दरों में कटौती का असर आने वाले दिनों में दिखने का अनुमान है। कटौती का लाभ पूरी तरह से लोगों तक नहीं पहुंचा है। इसलिए, एफडी पर ब्याज में कटौती कुछ समय तक जारी रह सकती है, भले ही रेपो दर अपरिवर्तित है।
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अगर अभी उधार लेने वाले हैं तो...
- होम लोन : अगर आप अभी होम लोन लेने वाले हैं तो दिसंबर तक रुकना चाहिए। अक्तूबर और दिसंबर में आरबीआई की दो बार बैठक है। उम्मीद है कि एक बार और 0.25 फीसदी रेपो दर घट जाए। ऐसे में उस समय लोन लेने की योजना बनाएंगे तो और फायदा होगा। दरें नहीं घटती हैं तो तब भी वर्तमान रेट पर लोन ले सकते हैं।
- पर्सनल लोन : पर्सनल लोन बहुत कम रकम और समय वाला होता है। बहुत ज्यादा जरूरत है, तो इसे ले सकते हैं। इस पर अन्य लोन की तुलना में ज्यादा ब्याज देना होता है। बहुत जरूरी नहीं है तो इसे दिसंबर तक के लिए टाल सकते हैं। कुछ खर्चों को नियंत्रित कर भारी ब्याज चुकाने से बच सकते हैं।
- कार लोन : यह बहुत जरूरी लोन नहीं है। इसे तो निश्चित रूप से टालना चाहिए। नहीं भी टाल रहे हैं, तो दिवाली तक का इंतजार करें। उस समय बहुत सारे बैंक विशेष ऑफर के तहत खुद ही ब्याज दरों में कमी कर देते हैं। कई तरह के डिस्काउंट और ऑफर के साथ प्रोसेसिंग फीस भी माफ कर देते हैं। ऐसे में कार लोन को दो महीने के लिए टालना चालाकी होगी।
10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न इस वर्ष 13 जनवरी को बढ़कर 6.84% हो गया था। 29 मई को घटकर 6.16 फीसदी रह गया। तब से यह 6.3% के आसपास बना हुआ है। इससे संकेत मिलता है पहले की गई दरों में कटौती का प्रभाव जारी रहने की संभावना है।