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RBI Monetary Policy: अर्थव्यवस्था: केंद्रीय बैंक का अनुमान, वित्त वर्ष 2021-22 में 10.5 फीसदी रह सकती है जीडीपी की वृद्धि दर
Wed, 07 Apr 2021 02:05 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Wed, 07 Apr 2021 02:05 PM IST
सार
- आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 10.5 फीसदी पर बरकरार रखा।
- कोविड-19 संक्रमण में बढ़ोतरी ने आर्थिक वृद्धि दर में सुधार को लेकर अनिश्चितता पैदा की।
- गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के असर को कम करने के प्रयास जारी रहेंगे।
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RBI Monetary Policy: भारतीय अर्थव्यवस्था
- फोटो : pixabay
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विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 10.5 फीसदी पर बरकरार रखा, और कहा कि कोविड-19 संक्रमण में बढ़ोतरी ने आर्थिक वृद्धि दर में सुधार को लेकर अनिश्चितता पैदा की है। अपनी ताजा नीति समीक्षा में, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जीडीपी वृद्धि दर के 10.5 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया।
समीक्षा में कहा गया कि विभिन्न कारकों को ध्यान में रखते हुए 'जीडीपी वृद्धि के 2021-22 में 10.5 फीसदी पर रहने का अनुमान है, जो पहली तिमाही में 26.2 फीसदी, दूसरी तिमाही में 8.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.4 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.2 फीसदी रह सकती है।'
यह भी पढ़ें: खुशखबर: आरबीआई का बड़ा एलान, अब आरटीजीएस व एनईएफटी के लिए बैंकों की जरूरत नहीं
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कोविड-19 के असर को कम करने के प्रयास जारी
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों की घोषणा करते हुए कहा, 'सभी की सहमति से यह भी निर्णय लिया कि टिकाऊ आधार पर वृद्धि को बनाए रखने के लिए जब तक जरूरी हो, उदार रुख को बरकरार रखा जाएगा और अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के असर को कम करने के प्रयास जारी रहेंगे।'
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे टीकाकरण तेज हो रहा है, वैसे-वैसे विश्वभर की अर्थव्यवस्था में सुधार आएगी। अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सभी संभव प्रयास किए जाएंगे। शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बावजूद अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है। लेकिन हाल ही में जिस तरह से कोरोना के मामले बढ़े हैं, उससे थोड़ी अनिश्चितता बढ़ी है। लेकिन भारत चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है।
पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करेगा केंद्रीय बैंक
आरबीआई ने प्रमुख उधारी दर को चार फीसदी पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया, लेकिन साथ ही अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए जरूरत पड़ने पर आगे कटौती की बात कहकर उदार रुख को बरकरार रखा। दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करेगा, ताकि उत्पादक क्षेत्रों को ऋण आसानी से मिले।
आरबीआई ने कहा कि हालांकि विनिर्माण, सेवाओं और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की कंपनियां मांग में बढ़ोतरी को लेकर आशावादी हैं, लेकिन दूसरी ओर कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ने से उपभोक्ता विश्वास कमजोर हुआ है।
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समीक्षा में कहा गया कि विभिन्न कारकों को ध्यान में रखते हुए 'जीडीपी वृद्धि के 2021-22 में 10.5 फीसदी पर रहने का अनुमान है, जो पहली तिमाही में 26.2 फीसदी, दूसरी तिमाही में 8.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.4 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.2 फीसदी रह सकती है।'
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कोविड-19 के असर को कम करने के प्रयास जारी
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों की घोषणा करते हुए कहा, 'सभी की सहमति से यह भी निर्णय लिया कि टिकाऊ आधार पर वृद्धि को बनाए रखने के लिए जब तक जरूरी हो, उदार रुख को बरकरार रखा जाएगा और अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के असर को कम करने के प्रयास जारी रहेंगे।'
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे टीकाकरण तेज हो रहा है, वैसे-वैसे विश्वभर की अर्थव्यवस्था में सुधार आएगी। अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सभी संभव प्रयास किए जाएंगे। शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बावजूद अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है। लेकिन हाल ही में जिस तरह से कोरोना के मामले बढ़े हैं, उससे थोड़ी अनिश्चितता बढ़ी है। लेकिन भारत चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है।
पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करेगा केंद्रीय बैंक
आरबीआई ने प्रमुख उधारी दर को चार फीसदी पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया, लेकिन साथ ही अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए जरूरत पड़ने पर आगे कटौती की बात कहकर उदार रुख को बरकरार रखा। दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करेगा, ताकि उत्पादक क्षेत्रों को ऋण आसानी से मिले।
आरबीआई ने कहा कि हालांकि विनिर्माण, सेवाओं और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की कंपनियां मांग में बढ़ोतरी को लेकर आशावादी हैं, लेकिन दूसरी ओर कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ने से उपभोक्ता विश्वास कमजोर हुआ है।