फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   RBI: Indian economy to see stronger than expected growth in 2023-24

RBI: 'उम्मीद से ज्यादा रह सकती है जीडीपी की रफ्तार, बढ़ेगा सरकारी-निजी निवेश', आरबीआई लेख में दावा

Thu, 18 Jan 2024 09:46 PM IST
आदर्श शर्मा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: आदर्श शर्मा Updated Thu, 18 Jan 2024 09:46 PM IST
सार

भारतीय अर्थव्यवस्था में 2023-24 में उम्मीद से कई ज्यादा वृद्धि का अनुमान है।उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाएं बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार है।

विज्ञापन
RBI: Indian economy to see stronger than expected growth in 2023-24
आरबीआई - फोटो : pixabay

विस्तार

भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में उम्मीद से ज्यादा मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है। इसके साथ ही, सरकार और निजी क्षेत्र पूंजी निवेश पर ज्यादा जोर दे सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक लेख में कहा गया है कि विश्व अर्थव्यवस्था को निकट भविष्य में विकास की अलग-अलग संभावनाओं का सामना करना पड़ रहा है। एशिया के नेतृत्व वाली उभरती अर्थव्यवस्थाएं बाकी दुनिया से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, यह लेखकों के अपने विचार हैं।
विज्ञापन


लेख के मुताबिक, अर्थव्यवस्था ने 2023-24 में अब तक उम्मीद से अधिक मजबूत वृद्धि दर्ज की है। यह विकास दर खपत से निवेश की ओर बदलाव पर आधारित है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा के नेतृत्व वाली टीम के लेख में कहा गया है कि पूंजीगत खर्च पर सरकार का जोर निजी निवेश को बढ़ावा देने पर है। लेखकों ने कहा कि भारत में संभावित उत्पादन बढ़ रहा है। वास्तविक उत्पादन इससे ऊपर है।
विज्ञापन


वित्त वर्ष 2024-25 में व्यापक आर्थिक स्थिरता के माहौल में कम से कम 7 फीसदी की वास्तविक जीडीपी वृद्धि हासिल करनी होगी। इससे विकास की तेज रफ्तार को बनाए रखने का उद्देश्य पूरा होगा। महंगाई को अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही तक लक्ष्य के अंदर लाने और उसी स्तर पर उसे स्थिर करने की जरूरत है। विकास को समर्थन देने के लिए वित्तीय स्थितियों को आसान बनाते हुए महंगाई पर काबू पाना होगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


बैलेंसशीट और संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार की जरूरत
लेख के मुताबिक, वित्तीय संस्थानों की बैलेंसशीट को मजबूत करने के साथ संपत्ति की गुणवत्ता में और भी सुधार करने की जरूरत है। राजकोषीय और बाहरी संतुलन के चल रहे समेकन को जारी रखने की जरूरत है। तकनीकी परिवर्तन के लाभों का उपयोग एक अच्छे जोखिम-मुक्त वातावरण में समावेशी और सहभागी विकास के लिए किया जाना चाहिए।

निवेश में कॉरपोरेट क्षेत्र को बनाएं भागीदार
लेख के मुताबिक, इन सबसे ऊपर, सरकारी पूंजीगत खर्च से निवेश में कॉरपोरेट क्षेत्र को भागीदार बनाया जाना चाहिए। लेख में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि यदि देशों के बीच संघर्ष समाप्त हो जाएं, कमोडिटी के साथ वित्तीय बाजारों, व्यापार-परिवहन और आपूर्ति नेटवर्क के माध्यम से उनके प्रभावों को नियंत्रित किया जाए, तो कमजोर वैश्विक दृष्टिकोण को अच्छा बनाया जा सकता है।


इक्रा का दावा...6% से कम रहेगी वृद्धि दर
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर छह फीसदी से नीचे रह सकती है। खरीफ फसलों के उत्पादन में कमी और रबी में कुछ फसलों की कमजोर बुवाई का असर जीडीपी की वृद्धि पर दिखेगा। दूसरी तिमाही में देश की वृद्धि दर 7.6 फीसदी रही थी। इसका कहना है कि कुछ गतिविधियों में लगातार दूसरे महीने सुस्ती दिख रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed