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RBI News: आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास बोले- अर्थव्यवस्था सही राह पर, लेकिन महंगाई अभी भी उच्च स्तर पर कायम
Wed, 10 Nov 2021 05:33 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Wed, 10 Nov 2021 05:33 PM IST
सार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गर्वनर शक्तिकांत दास ने कहा है कि हम इस वर्ष अर्थव्यवस्था में अपने 9.5 प्रतिशत की वृद्धि के पूर्वानुमान को प्राप्त करने की राह पर अग्रसर हैं, हालांकि वैश्विक प्रतिकूलताएं भी इस राह में दिखाई दे रही हैं।
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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गर्वनर शक्तिकांत दास ने कहा है कि हम इस वर्ष अर्थव्यवस्था में अपने 9.5 प्रतिशत की वृद्धि के पूर्वानुमान को प्राप्त करने की राह पर अग्रसर हैं, हालांकि वैश्विक प्रतिकूलताएं भी इस राह में दिखाई दे रही हैं। आरबीआई गवर्नर बीएफएसआई सम्मेलन में बोल रहे हैं, जहां पर देश के सभी बड़े बैंक प्रमुख मौजूद हैं।
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रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने दावा किया है कि पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) घटाए जाने के बाद खुदरा महंगाई भी नीचे आएगी। दास ने बुधवार को कहा कि खाद्य उत्पादों की महंगाई दर अभी काबू में है, लेकिन सीमेंट, इस्पात जैसे बुनियादी उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने दबाव बना रखा है।
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केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह पेट्रोल पर 5 रुपये लीटर और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क घटा दिया था। इसके बाद यूपी सहित कई राज्यों ने स्थानीय कर यानी वैट में भी कटौती करते हुए ईंधन की कीमतों को काफी सस्ता कर दिया। गवर्नर ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा, देश में महंगाई का सबसे बड़ा कारक आपूर्ति में आ रही बाधा है।
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दाल और खाद्य तेल जैसे उत्पादों की आपूर्ति पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। सरकार को इससे अवगत करा दिया गया है। खाद्य महंगाई दर भी पूरी तरह काबू में है, लेकिन सीमेंट, इस्पात, लौह अयस्क, बिजली, ईंधन जैसे बुनियादी उत्पादों की महंगाई दर से अब भी दबाव बना हुआ है।
चेतावनी : क्रिप्टोकरेंसी से अर्थव्यवस्था और निवेशकों पर जोखिम
गवर्नर ने बिटक्वाइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी (आभासी मुद्रा) पर निवेशकों को सजग करते हुए कहा कि यह वित्तीय स्थिरता और खुदरा निवेशकों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसका पुख्ता आधार नहीं होने से निवेशकों को कभी भी बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। दास का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत में खुदरा निवेशकों में भी क्रिप्टोकरेंसी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। आलम ये है कि बढ़ती मांग की वजह से बिटक्वाइन और ईथर जैसी क्रिप्टोकरेंसी में जून से अब तक दोगुना उछाल आ चुका है, जबकि क्रिप्टोकरेंसी की संपत्ति बढ़कर 30 खरब डॉलर से ज्यादा पहुंच गई है।
9.5 फीसदी विकास का लक्ष्य आसान
दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से सुधार कर रही है और चालू वित्तवर्ष में लगाए गए 9.5 फीसदी विकास दर अनुमान को पाना कतई मुश्किल नहीं है। कोरोना महामारी की अनिश्चितताओं के बावजूद हमारा आर्थिक परिदृश्य काफी मजबूत है। विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा रिजर्व होने से आर्थिक चुनौतियों से निपटना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। महामारी के दौरान सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और नीतिगत फैसलों का असर भी दिख रहा है, जिससे चालू वित्तवर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियां और तेजी से आगे बढ़ेंगी।
निवेश और कर्ज में अगले साल से तेजी
गवर्नर ने कहा कि निवेश और कर्ज बांटने की दर अभी संतोषजनक है, जबकि अगले साल से इसमें और तेजी की संभावना दिख रही है। विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है, जिसकी बानगी पिछले महीनों में आए एफडीआई से दिखता है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर भूराजनैतिक तनावों का असर भारत सहित दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखेगा।
महंगाई अभी भी उच्च स्तर पर
इस दौरान संबोधित करते हुए आरबीआई गर्वनर दास ने कहा है कि मुख्य मुद्रास्फीति अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई है। हालांकि आपूर्ति पक्ष से खाद्य मुद्रास्फीति को प्रबंधित किया गया है। इसके अलावा दास ने केंद्र सरकार के ईंधन की कीमतों पर उत्पाद शुल्क घटाने को लेकर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उत्पाद शुल्क में कटौती, ईंधन पर वैट में कमी मुद्रास्फीति कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था की राह पर भारत : वित्त मंत्रालय
वित्त मंत्रालय ने दावा किया है कि भारत महामारी के दबाव से निकलते हुए एक बार फिर दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था की राह पर लौट आया है। मंत्रालय ने बुधवार को जारी मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा कि त्योहारी सीजन की बंपर बिक्री और कोविड-19 का तेजी से हो रहा टीकाकरण रोजगार व उत्पादन के नए अवसर खोल रहा।
आत्मनिर्भर भारत मिशन, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना जैसे नीतिगत पहल से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिली है। त्योहारी सीजन में इस बार 1.30 लाख करोड़ की बिक्री हुई, जो एक दशक में सबसे ज्यादा है। मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी से सुधार आ रहा है, जिससे हमारे कृषि उत्पादों के निर्यात में 22 फीसदी उछाल आया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी से ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों की बिक्री भी बढ़ रही।
सस्ते कर्ज ने बढ़ाई मांग
वित्त मंत्रालय के अनुसार, फरवरी 2020 से सितंबर 2021 तक खुदरा कर्ज की ब्याज दरों में 1.30 फीसदी गिरावट आई, जिससे खपत और मांग बढ़ाने में मदद मिली और आर्थिक गतिविधियों ने भी तेजी पकड़ी। रिजर्व बैंक ने भी अपनी नीतियों को अभी नरम बनाए रखने का संकेत दिया है, जो विकास दर के लिहाज से फायदेमंद होगा। कर्ज की मांग बढ़ाने के लिए वित्तमंत्री अगले सप्ताह बैठक भी करेंगी।