RBI: एचडीएफसी बैंक में कामकाज से जुड़ी कोई गड़बड़ी नहीं, गवर्नर बोले- बैंकिंग सिस्टम है पूरी तरह सुरक्षित
भारतीय रिजर्व बैंक ने एचडीएफसी बैंक के अंतरिम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बाजार की चिंताओं पर अपना रुख साफ किया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बैंक की कार्यप्रणाली में कोई गड़बड़ी नई मिली है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एचडीएफसी बैंक में शासन या आचरण से संबंधित कोई मुद्दा नहीं पाए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बुधवार को मौद्रिक नीति के बाद आयोजित एक प्रेस वार्ता में यह बात कही। यह स्पष्टीकरण एचडीएफसी बैंक के अध्यक्ष अतानु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे और उसके बाद शेयर मूल्य में गिरावट से जुड़े सवालों के जवाब में आया।
एचडीएफसी बैंक के कामकाज पर केंद्रीय बैंक को पूरा भरोसा
मल्होत्रा ने बताया कि आरबीआई ने एचडीएफसी बैंक के पर्यवेक्षी निरीक्षण के दौरान ऐसी कोई समस्या नहीं पाई। उन्होंने बैंक की बैठकों के कार्यवृत्त भी देखे थे, जिसमें कोई महत्वपूर्ण चिंताजनक बात सामने नहीं आई। गवर्नर ने याद दिलाया कि आरबीआई ने 19 मार्च को जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में भी कहा था कि बैंक के आचरण या शासन के संबंध में कोई चिंताजनक बात दर्ज नहीं है। आरबीआई ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा था, "एचडीएफसी बैंक एक घरेलू प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंक (डी-एसआईबी) है, जिसके वित्तीय आंकड़े मजबूत हैं, पेशेवर रूप से संचालित बोर्ड और सक्षम प्रबंधन टीम है। हमारे आवधिक मूल्यांकन के आधार पर, इसके आचरण या शासन के संबंध में कोई महत्वपूर्ण चिंताजनक बात दर्ज नहीं है।" अतानु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को इस्तीफा दिया था।
एचडीएफसी बैंक पर आरबीआई का स्पष्टीकरण
भारतीय रिजर्व बैंक ने एचडीएफसी बैंक के अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद उठे सवालों पर स्थिति स्पष्ट की है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैंक के पर्यवेक्षी निरीक्षण और बैठकों के कार्यवृत्त की समीक्षा के बाद कोई गड़बड़ी नहीं पाई। आरबीआई ने 19 मार्च को भी एक विज्ञप्ति जारी कर बैंक के आचरण या शासन में कोई महत्वपूर्ण चिंताजनक बात न होने की बात कही थी। यह पुष्टि बैंक के शेयर मूल्य में गिरावट के बाद निवेशकों की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से की गई है।
बैंकिंग प्रणाली की मजबूती और नीतिगत रुख
गवर्नर मल्होत्रा ने भारत के बैंकिंग तंत्र को बहुत लचीला, सुरक्षित और मजबूत बताया। उन्होंने पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद बैंकों के लाभ और स्वास्थ्य को लेकर किसी प्रणालीगत जोखिम से इन्कार किया। मल्होत्रा ने संकेत दिया कि देश में कम ब्याज दरों का माहौल लंबे समय तक बना रह सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए किए गए उपाय स्थायी नहीं होंगे।