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RBI: 2,000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेने व जमा पर उच्च ब्याज मिलने का असर, पढ़ें पूरी खबर

Wed, 19 Jul 2023 05:28 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 19 Jul 2023 05:28 AM IST
सार

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो तीन महीनों में बैंक जमाओं में तेज वृद्धि देखने को मिली है। इस कारण कर्ज और जमाओं के अंतर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। नवंबर, 2022 में कर्ज और जमाओं में अंतर 8.75 फीसदी रहा था, जो जून में घटकर 3.26 फीसदी रह गया। 

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RBI Effect of withdrawing Rs 2000 note from circulation and getting higher interest on deposits
आरबीआई - फोटो : पीटीआई

विस्तार

आरबीआई के 2,000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेने के बाद बैंकों के जमा में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिली है। बैंकों में जमा जून, 2023 में बढ़कर  191.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह मार्च, 2017 के बाद बैंक जमा का छह साल का उच्च स्तर है। केयर रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक संजय अग्रवाल ने बताया, 30 जून को समाप्त पखवाड़े में जमा राशि सालाना आधार पर 13 फीसदी बढ़कर 191.6 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। इसकी मुख्य वजह 2,000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेना और जमा राशि पर उच्च ब्याज दर मिलना है। केंद्रीय बैंक ने इस माह की शुरुआत में कहा था कि 2,000 रुपये के कुल 3.62 लाख करोड़ नोट में से तीन चौथाई से अधिक बैंकों के पास वापस आ गए हैं। इनमें से 85 फीसदी नोट लोगों ने अपने बैंक खातों में जमा कराए हैं।

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कर्ज व जमाओं के अंतर में बड़ी गिरावट 
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो तीन महीनों में बैंक जमाओं में तेज वृद्धि देखने को मिली है। इस कारण कर्ज और जमाओं के अंतर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। नवंबर, 2022 में कर्ज और जमाओं में अंतर 8.75 फीसदी रहा था, जो जून में घटकर 3.26 फीसदी रह गया। 

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143.9 लाख करोड़ के कर्ज बांटे गए
केयर रेटिंग्स के मुताबिक, जून में कुल 143.9 लाख करोड़ रुपये के कर्ज बांटे गए। यह रकम सालाना आधार पर 16.2 फीसदी अधिक है। इसमें पर्सनल लोन, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और कृषि व इससे जुड़ी गतिविधियों  की बड़ी भूमिका रही है। एक साल पहले की समान अवधि में 14.5 फीसदी ज्यादा कर्ज बांटे गए थे। आने वाले समय में भी कर्ज की मांग बेहतर बनी रहेगी। 

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रत्न-आभूषणों के निर्यात में 15 फीसदी तक आ सकती है कमी
अमेरिका व चीन जैसे प्रमुख बाजारों में मांग घटने के कारण चालू वित्त वर्ष में रत्न-आभूषणों के निर्यात में 10-15 फीसदी गिरावट आ सकती है। 2022-23 में निर्यात सालाना आधार पर 2.48% बढ़कर 36 अरब डॉलर से ज्यादा रहा था। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के चेयरमैन विपुल शाह ने कहा, रत्न-आभूषणों के प्रमुख बाजार अमेरिका और चीन है। वहां इसकी मांग धीमी हो रही है। बढ़ते ब्याज दर और महंगाई जैसी चिंताओं के बीच उपभोक्ताओं का भरोसा भी कम हो रहा है। वाणिज्य मंत्रालय ने 2023-24 में रत्न व आभूषण निर्यात के लिए 42 अरब डॉलर का लक्ष्य दिया है।

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