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RBI ने दी राहत: भारत बिल भुगतान इकाइयों के लिए नेटवर्थ की सीमा घटाई, महंगाई और वृद्धि दर पर कही यह बात

Fri, 27 May 2022 10:14 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/मुंबई।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/मुंबई। Published by: दीपक चतुर्वेदी Updated Fri, 27 May 2022 10:14 PM IST
सार

वर्तमान में आरबीआई द्वारा निर्धारित नियमों की बात करें तो किसी गैर-बैंक इकाई के लिए भारत बिल भुगतान परिचालन इकाइयां स्थापित करने के लिए नेटवर्थ की सीमा 100 करोड़ रुपये है। भारत बिल भुगतान प्रणाली (बीबीपीएस) बिल भुगतान के लिए एक इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म है। 

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RBI Cuts Minimum Requirement For Bharat Bill Payment Units To 25 crore news in hindi
आरबीआई - फोटो : पीटीआई

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गैर-बैंक इकाइयों के लिए भारत बिल भुगतान परिचालन इकाइयां स्थापित करने के लिए नियमों में ढील देते हुए बड़ी राहत दी है। गुरुवार को केंद्रीय बैंक की ओर से कहा गया कि इस खंड में अधिक कंपनियों को आकर्षित करने के उद्देश्य से नेटवर्थ की जरूरत को घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

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गौरतलब है कि वर्तमान में किसी गैर-बैंक इकाई के लिए भारत बिल भुगतान परिचालन इकाइयां स्थापित करने के लिए नेटवर्थ की सीमा 100 करोड़ रुपये है। भारत बिल भुगतान प्रणाली (बीबीपीएस) बिल भुगतान के लिए एक इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म है। यानी इस मंच के माध्यम से किसी भी अन्य भुगतान मंच के जरिये बिल अदा किया जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस संबंध में जारी बयान में कहा कि है कि गैर-बैंक भारत बिल बीबीपीओयू के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की आवश्यकता को घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
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महंगाई रोकना प्राथमिकता, विकास दर भी जरूरी : दास
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि उच्च थोक महंगाई के कारण खुदरा महंगाई पर दबाव बढ़ने का जोखिम है। महंगाई को काबू करना ज्यादा महत्वपूर्ण है, वरना यह काबू से बाहर हो जाएगी। इसलिए इसे घटाकर मध्यम अवधि के लिए चार फीसदी के लक्ष्य के करीब लाना प्राथमिकता है। लेकिन, विकास दर की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। ऐसा नहीं हो सकता, जहां ऑपरेशन सफल हो जाए और मरीज मर गया हो। उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर के मामले में दूसरे देशों के मुकाबले भारत की स्थिति बेहतर दिख रही है। फिर भी वृद्धि दर को लेकर बड़ा झटका नहीं झेल सकते हैं। 
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इससे महंगाई पर बुरा असर पड़ेगा। इसलिए हमें संतुलन बनाना होगा। गवर्नर ने कहा, जून में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की होने वाली बैठक में तय महंगाई के अनुमान के आधार पर ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा। यह अनुमान पिछले महीने की घटनाओं और उनका आगे पड़ने वाले प्रभाव पर आधारित होगा। एमपीसी के फैसले की घोषणा 8 जून को होगी। अर्थशास्त्री महंगाई दर में और बढ़ोतरी का अनुमान जता रहे हैं। अप्रैल में खुदरा महंगाई 8 साल के उच्च स्तर 7.79 फीसदी पहुंच गई थी।

2,000 रुपये के नोटों की संख्या में गिरावट
2,000 रुपये के करेंसी नोटों की संख्या पिछले कुछ साल से लगातार घट रही है। इस साल मार्च अंत तक चलन वाले कुल नोट में इसकी हिस्सेदारी कम होकर 214 करोड़ या 1.6 फीसदी रह गई। इस अवधि तक सभी मूल्य के नोटों की संख्या 13,053 करोड़ थी, जबकि मार्च, 2021 में यह आंकड़ा 12,437 करोड़ था। मूल्य के लिहाज से मार्च, 2022 में 2,000 रुपये के नोट का कुल मूल्य घटकर सभी मूल्य वर्ग के नोटों के कुल मूल्य का 13.8 फीसदी रह गया। वहीं, 500 रुपये के नोटों की संख्या बढ़कर 4,554.68 करोड़ पहुंच गई।

ढांचागत सुधार : टिकाऊ और संतुलित विकास के लिए जरूरी
अर्थव्यवस्था की समावेशी, टिकाऊ और संतुलित वृद्धि के लिए मजबूत ढांचागत सुधार जरूरी है। इसके साथ ही वैश्विक महामारी के बाद के प्रभावों को देखते हुए कर्मचारियों में कौशल विकसित करना होगा और उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्हें नई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल सिखाना होगा। आरबीआई ने कहा, भू-राजनीतिक संकटों का महंगाई पर तुरंत असर पड़ा। तीन चौथाई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर खतरा मंडरा रहा है। व्यापार एवं चालू खाता घाटे में अंतर और बढ़ गया है। हालांकि, आपूर्ति सुधारने के लिए गेहूं निर्यात पर पाबंदी समेत अन्य नीतिगत हस्तक्षेप से कुछ राहत मिलेगी।

डिजिटल मुद्रा : फायदे और नुकसान पर विचार
आरबीआई ने कहा, डिजिटल मुद्रा की शुरुआत के ‘फायदे और नुकसान’ पर विचार कर रहा है। इसकी शुरुआत के लिए क्रमिक नजरिया अपनाएगा। इस मुद्रा के डिजाइन को मौद्रिक नीति, वित्तीय स्थिरता, मुद्रा और भुगतान प्रणालियों के कुशल संचालन के घोषित उद्देश्यों के अनुरूप होना चाहिए।

बैलेंस शीट : 61.9 लाख करोड़, विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ा
आरबीआई की बैलेंसशीट 2021-22 में 8.46% बढ़कर 61.9 लाख करोड़ हो गई है। एक साल पहले यह 57.07 लाख करोड़ थी। आय 201.4% बढ़ी है। इस दौरान विदेशी निवेश में 4.28%, घरेलू निवेश में 11.67%, सोना में 30.07%, लोन में 54.3% बढ़त आई। उधर, विदेशी मुद्रा भंडार 4.23 अरब डॉलर बढ़कर 597.51 अरब डॉलर पहुंच गया।

ऐसे घटते गए 2,000 के नोट
अवधि संख्या हिस्सेदारी
मार्च, 2020 274 करोड़ 2.4%
मार्च, 2021 245 करोड़ 2%
मार्च, 2022 214 करोड़ 1.6%
मात्रा के लिहाज से 500 रुपये के नोट सबसे ज्यादा (34.9 फीसदी) चलन में थे। 21.3% के साथ 10 रुपये के नोट दूसरे स्थान पर रहे।

बैंकों को चेतावनी : एनपीए काबू में रखें, बहीखाता भी मजबूत करें
आरबीआई ने आगाह करते हुए कहा कि बैंक महामारी में कर्ज पुनर्गठन प्रक्रिया से गुजरने वाली कंपनियों के ऋण व्यवहार को लेकर सजगता बरतें ताकि कोरोना से प्रभावित रहे क्षेत्रों में एनपीए या फंसे कर्ज के मामले न बढ़ें। कोरोना काल में केंद्रीय बैंक ने कर्ज लौटाने को लेकर मोहलत देने के साथ कंपनियों को ऋण पुनर्गठन की सुविधा भी दी थी। इसका मकसद कारोबारों को कोरोना महामारी के दुष्प्रभावों से बचाना था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि संकट के दौरान कारोबारों को राहत देने के लिए लाए गए प्रावधानों को धीरे-धीरे वापस लेने से कुछ पुनर्गठित कर्ज दिवालिया प्रक्रिया का हिस्सा बनने लगे हैं। यह बैंकिंग प्रणाली की वित्तीय सेहत के लिहाज से बेहद चिंताजनक है। इसका बैंकों के बहीखाते पर असर आने वाले तिमाही ज्यादा स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में सुधार होने पर कर्ज की मांग बढ़ती है तो बैंकों को नए जोखिमों को लेकर सजग रहने के साथ कर्ज वृद्धि को भी समर्थन देने की जरूरत होगी। कर्ज बांटने के अलावा बैंकों को भविष्य तनाव से बचने के लिए अपना बहीखाता मजबूत करना होगा।
  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और शहरी सहकारी बैंकों को अपने बहीखातों में मौजूद कमजोरियों पर खास ध्यान देना होगा। उन्हें मजबूत परिसंपत्ति-देनदारी प्रबंधन सुनिश्चित करने के अलावा अपने ऋण पोर्टफोलियो की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर देना होगा।
  • नियामकीय प्रारूप को और मजबूत बनाने के लिए चालू वित्त वर्ष के दौरान बैंकों एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए कई अन्य कदम उठाए जा सकते हैं।
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