RBI: आरबीआई ने 6 सदस्यीय भुगतान नियामक बोर्ड का किया गठन; सरकार की ओर नामित तीन सदस्य, गवर्नर होंगे मुखिया
भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को देश में भुगतान प्रणालियों के कामकाज की निगरानी के लिए छह सदस्यीय भुगतान नियामक बोर्ड का गठन किया। इसमें केंद्र सरकार के तीन नामित सदस्य शामिल होंगे। इस पैनल की अध्यक्षता गवर्नर खुद करेंगे। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को देश में भुगतान प्रणालियों के कामकाज की निगरानी के लिए छह सदस्यीय भुगतान नियामक बोर्ड का गठन किया। इसमें केंद्र सरकार के तीन नामित सदस्य शामिल होंगे। इस पैनल की अध्यक्षता गवर्नर खुद करेंगे।
भुगतान विनियामक बोर्ड (पीआरबी) भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की एक समिति, भुगतान और निपटान प्रणाली विनियमन और पर्यवेक्षण बोर्ड (बीपीएसएस) की जगह ले रही है। पांच सदस्यीय बीपीएसएस का नेतृत्व भी आरबीआई गवर्नर करते हैं, लेकिन इसमें कोई सरकारी प्रतिनिधि शामिल नहीं है। पीआरबी में आरबीआई के अन्य दो सदस्य डिप्टी गवर्नर और भुगतान व निपटान प्रणाली के प्रभारी कार्यकारी निदेशक हैं।
बोर्ड में सरकार की ओर से नामित व्यक्तियों में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव और पूर्व दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन शामिल हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के प्रधान विधि सलाहकार बोर्ड की बैठकों में स्थायी आमंत्रित सदस्य होते हैं। मई में जारी अधिसूचना के अनुसार, भुगतान नियामक बोर्ड की बैठक सामान्यतः वर्ष में कम से कम दो बार होगी।
आरबीआई ने इंडियन ओवरसीज बैंक पर 32 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कहा कि उसने 'प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल)- लक्ष्य और वर्गीकरण' पर कुछ निर्देशों का पालन न करने पर इंडियन ओवरसीज बैंक पर 31.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
आरबीआई के निर्देशों का अनुपालन न करने और इस बारे में हुई पत्राचार के पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
आरबीआई ने कहा, "नोटिस पर बैंक के जवाब, उसके द्वारा प्रस्तुत अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, आरबीआई ने पाया कि बैंक के खिलाफ निम्नलिखित आरोप कायम हैं, जिसके लिए मौद्रिक जुर्माना लगाना आवश्यक है।"
इंडियन ओवरसीज बैंक ने कुछ पीएसएल खातों में ऋण-संबंधी शुल्क वसूले, जिनमें से प्रत्येक में 25,000 रुपये तक का ऋण स्वीकृत किया गया था।
हालांकि, आरबीआई ने कहा कि जुर्माना विनियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर निर्णय देना नहीं है।