झटकाः फिच ने एक बार फिर से घटाया भारत की जीडीपी का अनुमान
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अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की इस साल की विकास दर के अनुमान को एक बार फिर से घटा दिया है। फिच रेटिंग्स ने अगले वित्त वर्ष के लिये देश की आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान सात फीसदी से घटाकर 6.80 फीसदी कर दिया है।
एजेंसी ने अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा है कि हालांकि हमने जीडीपी को कम किया है लेकिन 2020-21 के लिए इसको 7.1 फीसदी किया है। फिच ने पिछले साल दिसंबर में चालू वित्त वर्ष के लिये आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 7.8 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया था।
रेपो रेट में और कटौती की उम्मीद
फिच का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक अपनी अगली बैठक में रेपो रेट में और कटौती कर सकता है। थोक और खुदरा महंगाई दर के तीन फीसदी से नीचे रहने के कारण केंद्रीय बैंक की 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करनी चाहिए। इससे लोगों को कर्ज की किश्त कम पड़ेगी और लोग ज्यादा से ज्यादा इसकी तरफ आकर्षित होंगे।
फिच रेटिंग्स के प्रमुख (एशिया प्रशांत) स्टीफन श्वार्ट्ज ने कहा कि रेटिंग प्रोफाइल के लिए दीर्घकालिक राजकोषीय संकेत अहम होते हैं। हम इसका मूल्यांकन चुनाव के बाद पेश होने वाले बजट के आधार पर करेंगे जिसमें मध्यम अवधि के परिदृश्य के बारे में अतिरिक्त संकेत मिलने चाहिए। फिच ने नवंबर में भारत की रेटिंग स्थिर परिदृश्य के साथ बीबीबी (नकारात्मक) बनाए रखा था। यह निवेश योग्य सबसे निचली रेटिंग है।
इससे पहले फिच ने सितंबर में वृद्धि दर के 7.8 प्रतिशत और जून में 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। फिच का नया अनुमान चालू वित्त वर्ष के लिये आरबीआई के 7.4 फीसदी के अपने पहले लगाये गये अनुमान से काफी कम है।
फिच ने कहा, हमने जीडीपी आंकडों में अपेक्षा से कम तेजी, उच्च वित्तपोषण लागत और ऋण उपलब्धता में कमी के चलते अपने अनुमान को घटाया है। खपत कमजोर बनी हुयी है, यह 8.6 फीसदी से गिरकर 7 फीसदी पर आ गई है। घरेलू मांग के अन्य कारक बेहतर स्थिति में है, खासकर निवेश 2017 की दूसरी छमाही के बाद लगातार बढ़ा है।
रेटिंग एजेंसी का कहना है कि आम चुनावों को देखते हुए भारत की राजकोषीय नीतियां वृद्धि को बढ़ावा देने के अनुकूल रहेंगी है।