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अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केंद्र का आर्थिक पैकेज अपर्याप्त: रघुराम राजन
Fri, 22 May 2020 07:33 AM IST
संजीव कुमार झा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Fri, 22 May 2020 07:33 AM IST
सार
- कहा, सरकार को विपक्ष के साथ करना चाहिये विचार विमर्श
- मजदूरों को तेल-सब्जी व किराया देने के लिए चाहिए पैसे
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रघुराम राजन
- फोटो : ANI
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विस्तार
अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार के 20 लाख करोड़ के पैकेज को रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अपर्याप्त बताया है। उन्होंने कहा कि पैकेज प्रवासी मजदूरों को खाद्यान्न देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें इसके साथ ही सब्जी और तेल की जरूरत भी पड़ेगी और उन्हें किराया भी देना है, लिहाजा, उन्हें पैसे मिलने चाहिए।
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राजन ने कहा कि सरकार को विपक्ष से भी इस संकट के बारे में विचार-विमर्श करना चाहिए। इस तरह की आपदा का मुकाबला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) अकेले नहीं कर सकता। राजन ने कहा कि हमें अपने सभी प्रयास करने होंगे। यदि और अधिक नहीं किया जाता है तो अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। पूर्व गवर्नर ने कहा कि चुनौती सिर्फ कोरोना वायरस से हुए नुकसान को ठीक करने की नहीं है।
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एक वेबपोर्टल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय आर्थिक आपदा से जूझ रही है। इस समय हर संसाधन अपर्याप्त साबित होगा। उन्होंने कहा कि विशेष तौर से भारत के मामले में मुझे ऐसा लगता है। हमारी आर्थिक वृद्धि सुस्त पड़ चुकी है, राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए और बहुत कुछ करने की जरूरत है।
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हमें सभी प्रयास करने होंगे। हालांकि, इसके साथ ही राजन ने कहा कि पैकेज के कुछ अच्छे बिंदु हैं, लेकिन हमें अधिक करने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रकोष (आईएमएफ) के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा कि कोविड-19 से प्रभावित कंपनियों और लोगों को राहत के लिए तरीके ढूंढे जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें अर्थव्यवस्था के उन क्षेत्रों को ठीक करने की जरूरत है, जिन्हें ‘मरम्मत’ की जरूरत है। इनमें बैंकों सहित कुछ बड़ी कंपनियां और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम (एमएसएमई) शामिल हैं। हमें ऐसे सुधारों की जरूरत है जिसमें किसी तरह का प्रोत्साहन हो, और सुधार आगे बढ़ सके। हमें सुधारों की जरूरत है।
राजन ने कहा कि पैकेज न सिर्फ अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए संसाधन उपलब्ध कराने में विफल रहा है, बल्कि यह प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को भी दूर नहीं कर सका है। अर्थव्यवस्था के साथ ही लोगों को भी बचाना बहुत जरूरी है।