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रिपोर्ट में दावा: क्विक कॉमर्स ने बदला खरीदारी का तरीका, दो साल में पांच गुना बढ़ी बाजार हिस्सेदारी

Fri, 28 Mar 2025 05:25 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 28 Mar 2025 05:25 AM IST
सार

रिपोर्ट में कहा गया है कि 30 मिनट से कम समय में उत्पादों की डिलीवरी की सुविधा शुरू होना पिछले दो वर्षों में देश के ई-रिटेल बाजार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक रहा है। देश की क्विक कॉमर्स कंपनियां वैश्विक रुझानों को पीछे छोड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ी हैं। 

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Quick Commerce changed the way of shopping, market share increased five times in two years
क्विक कॉमर्स कंपनी - फोटो : MetaAI

विस्तार

कुछ ही मिनटों में सामान पहुंचाने वाली क्विक कॉमर्स कंपनियां देश में उपभोक्ताओं की खरीदारी के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही हैं। क्विक कॉमर्स क्षेत्र ने बीते वर्ष इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मिले सभी किराना ऑर्डर में दो-तिहाई की हिस्सेदारी हासिल कर ली है। वहीं, ई-रिटेल खर्च का 10वां हिस्सा भी इनसे जुड़ी इकाइयों के मंच पर हुआ। खास बात है कि यह क्षेत्र चार लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है।
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फ्लिपकॉर्ट एवं बेन एंड कंपनी की रिपोर्ट
वहीं मामले में फ्लिपकॉर्ट एवं बेन एंड कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, क्विक कॉमर्स क्षेत्र की बाजार हिस्सेदारी दो साल में पांच गुना बढ़कर 2024 में 6-7 अरब डॉलर पहुंच गई। 2030 तक इस क्षेत्र में सालाना 40 फीसदी से अधिक वृद्धि की उम्मीद है। इसकी वृद्धि को विभिन्न श्रेणियों, भौगोलिक क्षेत्रों और ग्राहक सेगमेंट में विस्तार से रफ्तार मिलेगी। क्विक कॉमर्स मंचों के जरिये हर साल दो करोड़ लोग खरीदारी करते हैं।
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साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि 30 मिनट से कम समय में उत्पादों की डिलीवरी की सुविधा शुरू होना पिछले दो वर्षों में देश के ई-रिटेल बाजार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक रहा है। देश की क्विक कॉमर्स कंपनियां वैश्विक रुझानों को पीछे छोड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ी हैं। वृद्धि का कारण उच्च जनसंख्या घनत्व और कम किराये वाले डार्क स्टोर (ऑनलाइन ऑर्डर पूरा करने वाले खुदरा दुकान) के नेटवर्क तक करीबी पहुंच है।
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भारत ऑनलाइन खरीदारी का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा केंद्र
भारत पिछले एक दशक में खुदरा क्षेत्र में बड़ा केंद्र बन गया है। देश ने 2024 में वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा खुदरा बाजार बनने की उपलब्धि हासिल की है।
  • भारतीय ई-रिटेल बाजार की जीएमवी 60 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। देश ऑनलाइन खरीदारी के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।
  • ई-रिटेल सेगमेंट अगले छह साल में 18 फीसदी से अधिक की वृद्धि के साथ 170 से 190 अरब डॉलर जीएमवी पर पहुंच सकता है।

उपभोक्ताओं को मिल रहा बेहतर मूल्य का प्रस्ताव
क्विक कॉमर्स क्षेत्र ने कई कंपनियों को आकर्षित किया है और उपभोक्ताओं को बेहतर मूल्य प्रस्ताव देने की मदद की है। यानी ग्राहक अब कीमतों की तुलना कर ऑनलाइन मंचों से उत्पाद खरीद रहे हैं। फटाफट सामान पहुंचाने की सुविधा की शुरुआत किराना सामानों से हुई थी। लेकिन, अब इसके सकल वस्तु मूल्य (जीएमवी) का 15-20 फीसदी हिस्सा सामान्य वस्तुएं, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, परिधान जैसी श्रेणियों से आता है।

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छोटे शहरों ने भी दी विस्तार को रफ्तार
महानगरों के अलावा छोटे शहरों में विस्तार ने भी क्विक कॉमर्स क्षेत्र की वृद्धि को गति दी है। हालांकि, जीएमवी का बड़ा हिस्सा अब भी शीर्ष-6 महानगरों से आता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि मुनाफे के साथ आगे बढ़ने के लिए क्विक कॉमर्स कंपनियों को प्रमुख महानगरों के अलावा अन्य बाजारों के लिए भी व्यापार मॉडल को अपनाना चाहिए। बढ़ती प्रतिस्पर्धा का प्रबंधन करना चाहिए और आपूर्ति शृंखलाओं को बेहतर करना चाहिए।

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