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PMMY: मुद्रा योजना करोड़ों सूक्ष्म उद्यमियों की उम्मीदों को लगा रही पंख, सशक्त बना रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

Sun, 06 Apr 2025 06:54 AM IST
निर्मल कांत वाई वेणुगोपाल राव, एमडी एवं सीईओ मुद्रा लिमिटेड
वाई वेणुगोपाल राव, एमडी एवं सीईओ मुद्रा लिमिटेड Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 06 Apr 2025 06:54 AM IST
सार

PMMY: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने एक दशक में करोड़ों सूक्ष्म उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान कर स्वरोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित किया है। इस योजना ने महिला उद्यमियों, कमजोर वर्गों और नए उद्यमियों को लोन प्रदान कर रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा दिया है।

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Pradhan Mantri Mudra Yojana is giving wings to the hopes of millions of micro-entrepreneurs
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाल में आई फ्रैंकलिन टेंपलटन रिपोर्ट के वा अनुसार, भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के तौर पर उभर रहा है। इसलिए विकसित भारत-2047 की यात्रा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भूमिका अत्यावश्यक है। एमएसएमई में करीब 12 करोड़ नौकरियां हैं, जो रोजगार बाजार में अहम योगदान देते हैं और देश में उद्यमिता संस्कृति को प्रोत्साहन देते हैं।

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एमएसएमई के विनिर्माण क्षेत्र की रीढ़ होने के बावजूद, क्रेडिट तक पहुंच की कमी, विशेष रूप से औपचारिक चैनलों की ओर से लेंडिंग बड़ी चुनौती रही है। एमएसएमई क्षेत्र को संस्थागत वित्तपोषण की आवश्यकता है, जिससे इन अनौपचारिक उद्यमों को मुख्यधारा में लाया जा सके और अर्थव्यवस्था में आय निर्माण और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिले। 8 अप्रैल, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और माइक्रो यूनिट्स डवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लि. (मुद्रा लिमिटेड) का शुभारंभ इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए ऐतिहासिक पहल थी। मुद्रा योजना ने एक दशक में करोड़ों सुक्ष्म उद्यमियों को वित्तीय प्रणाली से क्रेडिट प्राप्त करने में सहायता की है।मुद्रा योजना ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, निजी क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, लघु वित्त बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों, सूक्ष्म वित्त संस्थानों सहित कई कर्ज देने वाली संस्थाओं के माध्यम से अब तक वंचित गैर-कॉरपोरेट, गैर-कृषि लघु व्यवसायों को सफलतापूर्वक वित्त पोषण प्रदान किया है। इसके अंतर्गत स्वीकृत और वितरित की गई संचयी राशि 33.54 लाख करोड़ रुपये और 32.76 लाख करोड़ रही, जो लगभग 53 करोड़ लोन खातों को कवर करती है। बिना गारंटी लोन की पेशकश करके मुद्रा योजना स्वरोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है। इसने नई नौकरियों को सुगम बनाया है और बेरोजगारी को, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, कम किया है।
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बीते दशक में मुद्रा ने वित्तपोषकों को पुनर्वित्तपोषित करके छोटे व्यवसायों के विकास को प्रोत्साहन देने के अपने उद्देश्य को पूरा किया है। एसआईडीबीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के तौर पर, मुद्रा लि. ने वित्तीय सेवाओं को, खासकर जमीनी स्तर पर काम करने वाले सूक्ष्म उद्यमों के लिए, अधिक सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में लगातार काम किया है। इसने इन छोटे व्यवसायों को बिचौलियों के चंगुल से निकालने में मदद की है और उन्हें अपनी विकास क्षमता को उजागर करने के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन प्रदान किए हैं।
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देश के सभी जिलों में वितरित लोन के साथ, मुद्रा लोन ने क्षेत्रीय और संतुलित विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे व्यवसायों की बढ़ती जरूरतों को समझते हुए सरकार ने हाल में लोन की नई श्रेणी तरुण प्लस की शुरुआत की, जो लोन की राशि को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर देती है। इस सुधार ने उन उद्यमियों के प्रयासों को मान्यता दी, जिन्होंने असाधारण क्रेडिट योग्यता और पुनर्भुगतान क्षमता का प्रदर्शन किया है। तरुण प्लस से पहले मुद्रा लोन तीन लोन श्रेणियों के माध्यम से दिए जाते थे- शिशुः 50,000 रुपये। किशोरः 50,000 से अधिक और 5 लाख तक के लोन और तरुण...5 लाख से अधिक और 10 लाख तक के लोन। इस योजना में कार्यशील पूंजी सुविधा के रूप में सावधि लोन भी दिए जाते हैं। विभिन्न ऋण संस्थानों की ओर से उधारकर्ताओं को रुपे प्लेटफॉर्म पर मुद्रा डेबिट कार्ड जारी किया जाता है।


सदस्य लेंडिंग संस्थानों (एमएलआई) को अनुमोदन और संवितरण, जो इसके संचालन के पहले वर्ष में क्रमशः 3,533 करोड़ और 3,526 करोड़ था, 31 मार्च, 2025 तक संचयी रूप से बढ़कर क्रमशः 1.03 लाख करोड़ और 1 लाख करोड़ हो गया। इस स्तर को प्राप्त करने के लिए मुद्रा लि. ने बीते कुछ वर्षों में 120 से अधिक सदस्य लेंडिंग संस्थानों के साथ भागीदारी की और उन्हें पुनर्वित्त सहायता प्रदान की।

महिला उद्यमियों को मिली वित्तीय स्वतंत्रता
मुद्रा योजना के तहत 68 फीसदी महत्वपूर्ण मुद्रा लोन महिला उद्यमियों को दिए गए हैं, जिससे उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने और अपने परिवारों और समुदायों में सार्थक योगदान करने का अधिकार मिला है। इसके अतिरिक्त, समाज के कमजोर वर्ग जैसे एससी, एसटी और ओबीसी प्रमुख लाभार्थी रहे हैं, जिन्होंने मुद्रा लोन का 50 फीसदी प्राप्त किया है। मुद्रा नए उद्यमियों/लोन के साथ उद्यमशीलता की संस्कृति को भी प्रोत्साहन दे रही है। खातों को दिए गए 21 फीसदी मुद्रा लोन के साथ उद्यमशीलता की संस्कृति को भी प्रोत्साहन दे रही हैं।

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