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Business: देश में और बढ़ेगी बिजली की मांग, पावर शेयरों में दिख सकता है दम

Fri, 08 May 2026 07:55 AM IST
नितिन गौतम बोनस डेस्क, मुंबई
बोनस डेस्क, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 08 May 2026 07:55 AM IST
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power demand increase in country power share will beneficial
अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
अगर आप 2026 में शेयर बाजार की उथल-पुथल से परेशान हैं तो थोड़ा धैर्य रखते हुए बिजली क्षेत्र की ओर नजर डालिए। जहां व्यापक बाजार दबाव में रहा, वहीं पावर शेयरों ने पिछले कुछ हफ्तों में निवेशकों को चौंकाया है। बीएसई पावर इंडेक्स ने पिछले एक महीने में करीब 21 फीसदी की मजबूत रैली दिखाई है। पिछले छह महीने में यह बढ़त करीब 24 फीसदी तक पहुंच गई है। यह तेजी सिर्फ बाजार की चाल नहीं, बल्कि देश की बदलती बिजली जरूरतों और ऊर्जा नीति का संकेत भी है।
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गर्मी, कम बारिश की आशंका, एसी-कूलिंग की जरूरत, कृषि का भार और औद्योगिक गतिविधियों के कारण बिजली खपत में तेजी बनी रह सकती है। पावर शेयरों की बढ़त के पीछे सबसे बड़ी वजह देश में बिजली की यही खपत है। अप्रैल 2026 में भारत ने 256.1 गीगावॉट की अब तक की सबसे अधिक पावर मांग दर्ज की। इससे पहले मई 2024 में 250 गीगावॉट का रिकॉर्ड बना था। सरकार के मुताबिक, यह मांग बिना किसी कमी के पूरी की गई। बाजार की नजर अब बिजली और न्यूक्लियर वैल्यू चेन वाली कंपनियों पर है। एलएंडटी न्यूक्लियर ईपीसी में अहम भूमिका निभा सकती है। भेल टरबाइन, बॉयलर और महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति से जुड़ी है। एनटीपीसी और एनएचपीसी स्वच्छ ऊर्जा और न्यूक्लियर विस्तार में भूमिका निभा सकती हैं। टाटा पावर, अदाणी एनर्जी, एबीबी इंडिया और सीमेंस जैसी कंपनियां ग्रिड, ऑटोमेशन, ट्रांसमिशन और क्लीन एनर्जी थीम से जुड़ी हैं।
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मांग बढ़ने के तीन प्रमुख कारण
बिजली की मांग बढ़ने के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला, गर्मी और मौसम का असर। तापमान बढ़ने से घरेलू और कृषि क्षेत्र में बिजली खपत तेज होती है। दूसरा भारत में डाटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन और विनिर्माण जैसे नए सेक्टर तेजी से मांग को बढ़ा रहे हैं। तीसरा, शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों में सुधार से बेस डिमांड लगातार ऊपर जा रही है।
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निवेशकों के लिए संकेत  
बाजार विशेषज्ञ वीएलए अंबाला कहती हैं, अगले पांच वर्षों में क्षमता विस्तार, नीतिगत प्रोत्साहन और बिजली की बढ़ती मांग के कारण कच्चा तेल रहित ऊर्जा में मजबूत वृद्धि देखने को मिल सकती है। हालांकि, रिटर्न सभी कंपनियों में समान नहीं रहेगा। जिन कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत है, क्रियान्वयन क्षमता बेहतर है और जो स्टोरेज, ग्रिड तथा हाइब्रिड समाधानों पर काम कर रही हैं, वे बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। शेयर चुनने में सावधानी जरूरी है।


न्यूक्लियर एनर्जी की अहमियत
बढ़ती मांग के बीच देश में ऊर्जा सुरक्षा का नजरिया भी बदल रहा है। अब सरकार और उद्योग का ध्यान परमाणु ऊर्जा की ओर मुड़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह 24 घंटे स्थिर बिजली दे सकती है। यानी, यह सौर या पवन ऊर्जा की तरह मौसम पर निर्भर नहीं रहती। अगर एक गीगावॉट क्षमता वाले अलग-अलग बिजली स्रोतों की तुलना करें, तो तस्वीर साफ दिखती है।
 
ऊर्जा स्रोत  क्षमता गुणांक सालाना उत्पादन
सौर ऊर्जा  18–22%  1,650 गीगावाट प्रति घंटा
कोयला  50–65%  4,500 गीगावाट प्रति घंटा
न्यूक्लियर  80–92%  7,500 गीगावाट प्रति घंटा

 
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