PM Modi: पीएम ने राज्यसभा में सुधा मूर्ति का किया धन्यवाद, पूर्व इंफोसिस चेयरपर्सन ने की है यह मांग
इन्फोसिस फाउंडेशन की पूर्व चेयरपर्सन रही सुधा मूर्ति ने राज्यसभा में अपने पहले ही भाषण में दो अहम मुद्दे उठाए। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में हिस्सा लेते हुए मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने मांग की कि जिस तरह कोरोना काल में टीकाकरण अभियान चलाया गया था, उसी तरह महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए भी टीकाकरण अभियान चलाया जाना चाहिए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलते हुए राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति की भी प्रशंसा की। उन्होंने महिलाओं से जुड़े अहम मुद्दे सदन में उठाने के लिए इंफोसिस फाउंडेशन की पूर्व चेयरपर्सन सुधा मूर्ति का धन्यवाद किया। समाजसेवी, लेखिका और इंफोसिस फाउंडेशन की पूर्व चेयरपर्सन रहीं सुधा मूर्ति ने 2 जुलाई को राज्यसभा में अपने पहले संबोधन में सरकार की ओर से प्रायोजित टीकाकरण कार्यक्रम की वकालत की थी। अपने भाषण में मूर्ति ने मनु स्मृति के एक प्रसिद्ध श्लोक का पाठ किया- यत्र नर्यस्तु पूज्यन्ते रमंते तत्र देवता, यत्रितास्तु न पूज्यन्ते सर्वस्तत्रफलाः क्रियाः। मतलब जहाँ स्त्रियों का सम्मान होता है, वहाँ देवत्व खिलता है, और जहाँ भी स्त्रियों का अपमान होता है, वहाँ सभी कर्म चाहे कितने ही महान क्यों न हों, निष्फल रहते हैं। सुधा मूर्ति ने कहा कि किसी भी परिवार में अगर मां अगर चली गई तो उसकी कोई क्षतिपूर्ति नहीं।
महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए भी टीकाकरण अभियान चले
इन्फोसिस फाउंडेशन की पूर्व चेयरपर्सन रही सुधा मूर्ति ने राज्यसभा में अपने पहले ही भाषण में दो अहम मुद्दे उठाए। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में हिस्सा लेते हुए मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने मांग की कि जिस तरह कोरोना काल में टीकाकरण अभियान चलाया गया था, उसी तरह महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए भी टीकाकरण अभियान चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं में इस बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे बचाव के लिए किशोरावस्था में इसके टीके लगाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
सुधा मूर्ति ने कहा कि हमारी सामाजिक व्यवस्था ऐसी है जिसमें महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पातीं। जब वे अस्पताल पहुंचती हैं तो उनमें सर्वाइकल कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज पर होता है। उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि उनके पिता कहते थे कि महिलाएं परिवार का केंद्र होती हैं और महिला के निधन के बाद पति को तो दूसरी पत्नी मिल जाती है लेकिन बच्चों को दूसरी मां नहीं मिलती। सुधा मूर्ति ने सवाल किया कि कोविड काल में जब काेरोना से बचाव के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया गया तो महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए अभियान क्यों नहीं चलाया जा सकता? अगर सरकार हस्तक्षेप करे तो यह महंगा भी नहीं होगा। मूर्ति ने कहा कि इससे देश की एक बड़ी आबादी को लाभ होगा।
देश के अनजान पर्यटन स्थलों को विकसित करने पर ध्यान देने की बात कही
देश के पर्यटन क्षेत्र का जिक्र करते हुए सुधा मूर्ति ने कहा, "लोग अक्सर अजंता, एलोरा और ताजमहल देखने जाते हैं। लेकिन भारत में 42 धरोहर स्थल हैं जिनका न तो अधिक प्रचार प्रसार किया गया है और न ही उनके बारे में लोगों को जानकारी है। यह हमारा देश है और हमें इसकी संस्कृति की जानकारी होनी चाहिए। सुधा मूर्ति ने कहा कि दक्षिणी राज्यों में ही कई ऐसे स्थान हैं जिनका इतिहास बेहद गौरवशाली है। त्रिपुरा में उनाकोटी के बारे में कोई नहीं जानता जबकि यह स्थान 12,500 साल से भी अधिक पुराना है। कश्मीर का मुगल गार्डन धरोहर स्थल में शामिल नहीं है। इस इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।"