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अध्ययन: पीएलआई से मोबाइल विनिर्माण को मिली रफ्तार, आयातक से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्यातक बना भारत

Thu, 24 Jul 2025 05:58 AM IST
शुभम कुमार बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 24 Jul 2025 05:58 AM IST
सार

अध्ययन में मोबाइल उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में वेतन वृद्धि का भी विश्लेषण किया गया है। इसके मुताबिक, दोनों क्षेत्रों में वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। खासकर निर्यात से जुड़ी भूमिकाओं में। यह वेतन और आय के स्तर पर मजबूत आर्थिक प्रभाव का संकेत है।

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PLI gave impetus to mobile manufacturing India became the worlds third largest mobile exporter
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : FreePik

विस्तार

भारत मोबाइल फोन उत्पादन (विनिर्माण) के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ते हुए वैश्विक पावरहाउस बन गया है। देश पिछले 10 साल में आयातक से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्यातक बन गया है। कैलेंडर वर्ष 2024 में भारत से कुल 20.5 अरब डॉलर का मोबाइल फोन निर्यात किया गया। सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज (सीडीएस) के अध्ययन के मुताबिक, भारत को मोबाइल फोन आयातक से निर्यातक बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत 2017 में हुई थी। यह परिवर्तन निरंतर सरकारी समर्थन, वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में रणनीतिक एकीकरण और 2020 में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के शुभारंभ का नतीजा है।
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भारत की असाधारण यात्रा के बारे में अध्ययन में बताया गया है कि देश 2014-15 में मोबाइल फोन का शुद्ध आयातक था। सरकार के समर्थन के दम पर अगले 10 साल में यानी 2024-25 में 24.1 अरब डॉलर के साथ मोबाइल फोन निर्यात का पावरहाउस बन गया, जबकि 2017-18 में यह सिर्फ 0.2 अरब डॉलर था। 11,950 फीसदी की यह आश्चर्यजनक वृद्धि भारत के मोबाइल विनिर्माण की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाती है।
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निर्यात अब घरेलू मांग से अधिक
सीडीएस का यह अध्ययन प्रोफेसर सी वीरमणि के नेतृत्व में तैयार किया गया है। वह कहते हैं, मोबाइल फोन निर्यात अब घरेलू मांग से आगे निकल गया है। देश 2018-19 से मोबाइल फोन का शुद्ध निर्यातक बना हुआ है। भारत के मोबाइल फोन उत्पादन के घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) में प्रत्यक्ष और सहायक उद्योगों के जरिये उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो मजबूत घरेलू भागीदारी के साथ एक परिपक्व तंत्र को दर्शाती है। यही वजह है कि कुल डीवीए (प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष) 23 फीसदी बढ़कर 2022-23 में 10 अरब डॉलर के पार पहुंच गया।


17 लाख से अधिक लोगों को रोजगार
अध्ययन में उद्योग के सालाना सर्वे (एएसआई) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि मोबाइल फोन उत्पादन से जुड़े कुल रोजगार की संख्या 2022-23 में उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 17 लाख के पार पहुंच गई। इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार शामिल हैं। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि मोबाइल फोन निर्यात से जुड़े रोजगार में भी 33 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

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प्रतिस्पर्धा के लिए सरकारी समर्थन महत्वपूर्ण
प्रोफेसर वीरमणि ने कहा, मोबाइल फोन उत्पादन और निर्यात के मोर्चे पर भारत की सफलता अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के अपनाए गए मार्ग को दर्शाती है। पहले खास स्तर पर पहुंचना और फिर समय के साथ मूल्यवर्धन को गहरा करना। उन्होंने कहा, वैश्विक स्तर पर निर्यात दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता का आधार है। इस क्षेत्र में निरंतर सरकारी समर्थन अगले दशक तक महत्वपूर्ण बना रहेगा।
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