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Petrol-Diesel: पेट्रोल-डीजल के दामों में 10 मार्च के बाद लग सकती है आग, क्रूड ऑयल में तेजी के बावजूद इसलिए स्थिर हैं कीमतें

Fri, 11 Feb 2022 01:52 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक चतुर्वेदी Updated Fri, 11 Feb 2022 01:52 PM IST
सार

Petrol-diesel Rate stable for Three Months: देश में तीन महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का दौर लगातार जारी है। विशेषज्ञों की मानें तो देश में फ्यूल की कीमतों में इस ठहराव की प्रमुख वजह पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव है। अब हालिया रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि मार्च में इनकी कीमतें एक बार फिर उछाल भर सकती हैं।  

 

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Petrol diesel prices may increase after March 10 know why rate are stable even after rise in crude oil
पेट्रोल-डीजल के दाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में दिवाली के बाद से पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर हैं। तीन महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का दौर लगातार जारी है। विशेषज्ञों की मानें तो देश में फ्यूल की कीमतों में इस ठहराव की प्रमुख वजह पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव है। अब हालिया रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि मार्च में इनकी कीमतें एक बार फिर उछाल भर सकती हैं।  

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केंद्र सरकार पर बढ़ेगा दबाव
इस संबंध में जारी एक रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि देश के सबसे बड़े ईंधन खुदरा विक्रेता अगले महीने स्थानीय चुनाव समाप्त होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी से वृद्धि करेंगे, जिससे सरकार और केंद्रीय बैंक पर मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने का दबाव बढ़ जाएगा। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि राज्य चुनावों के बाद खुदरा कीमतों में वृद्धि संभव है। कंपनियां चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद 10 मार्च तक बिक्री मूल्य में कमी को पूरा करने के लिए कीमतों में लगभग 8 से 9 रुपये (11-12 सेंट) प्रति लीटर की वृद्धि कर सकती हैं।
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कच्चे तेल के भाव आसमान पर
एक ओर जहां देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में दिवाली के बाद से स्थिरता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान पर हैं। बीते सोमवार को इसका भाव 94 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, साल 2014 के बाद यह पहला मौका है जब क्रूड के दाम पहला मौका है जब क्रूड के दाम इस रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हैं। हालांकि, शुक्रवार 11 फरवरी को कच्चे तेल के दामों में मामूली सुस्ती देखने को मिली और यह 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। गौर करने वाली बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल कीमत में भारी उछाल के बावजूद देश में करीब तीन महीने से ज्यादा समय से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब यह स्थिति ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। 
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चुनाव के बाद लगेगा तगड़ा झटका
इस संबंध में जारी हालिया रिपोर्टों पर नजर डालें तो देश में घरेलू तेल कंपनियों द्वारा तेल की कीमतों में बदलाव न करना राजनीति से संबंधित है। पूरी संभावना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें भले ही इस स्तर पर बनी रहें लेकिन चुनाव के बाद इस मोर्चे पर देशवासियों को बड़ा झटका झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए। तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमत में अभी हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए भारी बढ़ोतरी कर सकती हैं। इसका महंगाई के स्तर पर भी प्रभाव पड़ेगा। बता दें कि सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल की घरेलू बाजार में 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। 

दाम न बढ़ने का एक कारण ये भी
जैसा कि देश के पांच राज्यों में (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर) विधानसभा चुनाव हैं। उत्तर प्रदेश में गुरुवार को प्रथम चरण का चुनाव संपन्न हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाकर लोगों को नाराज करने का जोखिम लेना बिल्कुल भी नहीं चाहती है। ऐसे में उम्मीद है कि फिलहाल मार्च तक तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होने वाला है। लेकिन चुनाव के खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी से इजाफा होने की पूरी संभावना बन रही है।  

कई कारकों पर निर्भर तेल की कीमतें 
गौरतलब है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर होती हैं। हर रोज इनके दाम घटते और बढ़ते हैं। इसके साथ ही आपको बता दें कि हर शहर में ये कीमतें अगल-अलग होती है। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंट क्रूड ऑयल का भाव, देश में इन पर लगने वाला उत्पाद शुल्क, राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट बदलाव का कारण बनता है। इसके अलावा तेल कंपनियां हर रोज समीक्षा के बाद सुबह छह बजे नए रेट जारी करती हैं। किस तरह बदलते हैं देश में तेल के दाम, इसके चार प्रमुख कारण इस प्रकार हैं।  

1- बेंट क्रूड की कीमत का असर
पेट्रोल और डीजल की कीमतें तय करने में सबसे बड़ी भूमिका अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंट क्रूड के भाव की होती है। अगर अंतराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में गिरावट आती है तो पेट्रोल-डीजल के दाम पर भी असर देखने को मिलता है। हालांकि, ऐसा हर बार जरूरी नहीं है कि क्रूड ऑयल सस्ता होने के बाद पेट्रोल और डीजल पेट्रोल-डीजल भी सस्ता हो, लेकिन अधिकतर मामलों में ऐसा ही देखने को मिलता है। इसका कारण ये है कि तेल कंपनियां बेंट क्रूड की कीमतों के आधार पर ही रोजाना के रेट तय करती हैं। 

2- सप्लाई और डिमांड की भूमिका
तेल की कीमतों में बदलाव के लिए सप्लाई और डिमांड की भूमिका भी अहम होती है। सप्लाई और डिमांड का सबसे ज्यादा क्रूड ऑयल की कीमतों पर देखने को मिलता है। ऐसे में जब भी डिमांड के मुकाबले ही सप्लाई ज्यादा होती है तो इसकी वजह से बेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट आने लगती है। इससे पेट्रोल और डीजल के दामों में भी कमी देखने को मिलती है।

3- डॉलर और रुपये में बदलाव 
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में रोजाना करीब 37 लाख बैरल क्रूड की खपत होती है। हम अपनी खपत की पूर्ति के लिए लगभग 80 फीसदी तेल आयात करते हैं। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत सीधे तौर पर पेट्रोल और डीजल के दाम पर भी असर डालती हैं। रुपये में कमजोरी आने पर क्रूड का आयात महंगा हो जाता है। वहीं रुपये के मजबूत होने पर आयात सस्ता हो जाता है। इसी आधार पर देश में तेल कंपनियों की समीक्षा के दौरान दाम निर्धारण किया जाता है। 


4- तेल कंपनियां लेती हैं आखिरी निर्णय 
देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में कितना और कब बदलाव करना है, ये फैसला स्थानीय तेल कंपनियां लेती हैं। तेल विपणन कंपनियां बेंट क्रूड की कीमत, फ्रेट चार्ज, रिफाइनरी कॉस्ट के आधार पर तय करती हैं कि पेट्रोल-डीजल कितना सस्ता होगा या कितना महंगा हो अथवा इनमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके अलावा ग्राहक तक पहुंचने तक इसकी कीमतों में एक्साइज ड्यूटी, वैट और डीलर कमीशन आदि भी जुड़ जाता है। 

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