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पेट्रोल-डीजल: खपत बढ़ने से ईंधन की बिक्री तीन साल में सबसे ज्यादा, मांग महामारी पूर्व स्तर पर पहुंचने से बिक्री में उछाल

Tue, 12 Apr 2022 06:31 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 12 Apr 2022 06:31 AM IST
सार

पेट्रोल-डीजल की खपत का यह आंकड़ा मार्च, 2019 के बाद सबसे ज्यादा है। आंकड़ों से पता चलता है कि महामारी से अर्थव्यवस्था के उबरने के बीच परिवहन ईंधन की मांग मार्च में बढ़ गई।

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Petrol-Diesel: Fuel Sales Highest in three years due to increase in Consumption
पेट्रोल-डीजल की खपत महामारी पूर्व स्तर पर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पेट्रोल-डीजल की खपत बढ़कर महामारी पूर्व स्तर पर पहुंचने से देश में मार्च में ईंधन की बिक्री 4.2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। पेट्रोलियम मंत्रालय के सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च, 2022 में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत 1.94 करोड़ टन रही।

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खपत का यह आंकड़ा मार्च, 2019 के बाद सबसे ज्यादा है। आंकड़ों से पता चलता है कि महामारी से अर्थव्यवस्था के उबरने के बीच परिवहन ईंधन की मांग मार्च में बढ़ गई।
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पेट्रोल की रिकॉर्ड खपत
2021-22 के दौरान ईंधन की मांग 4.3 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 20.27 करोड़ टन पर पहुंच गई। यह 2019-20 के बाद का उच्च स्तर है। इस दौरान वाहन ईंधन और रसोई गैस की खपत में इजाफा हुआ। पेट्रोल की खपत 10.3 फीसदी बढ़कर 3.08 करोड़ टन हो गई, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। 
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डीजल में 6.7 फीसदी बढ़ोतरी
देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डीजल की कुल ईंधन खपत में हिस्सेदारी 40 फीसदी रही। मार्च में डीजल की मांग 6.7 फीसदी बढ़कर 77 लाख टन पर पहुंच गई। पेट्रोल की खपत 6.1 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 29.1 लाख टन रही। खास बात यह है कि पेट्रोल एवं डीजल दोनों ही ईंधनों की मांग मार्च में महामारी-पूर्व स्तर को पार कर गई। 

  • कृषि कार्यों से डीजल की मांग बढ़ी है। पेट्रोल में तेजी की वजह दाम बढ़ने की आशंका रही। 
  • खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की मांग मार्च में 9.8 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 24.8 लाख टन हो गई।


विमान ईंधन में भी 35 फीसदी इजाफा  
विमान ईंधन एटीएफ की मांग 35 फीसदी बढ़कर 50 लाख टन हो गई, लेकिन यह अब भी महामारी-पूर्व स्तर से काफी कम है। इसकी वजह यह है कि देश में विमानन सेवाएं पूरी तरह से 2021-22 के आखिर में ही बहाल हुईं। 



आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कारखानों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन नाफ्था और सड़क निर्माण में लगने वाले बिटुमेन की खपत क्रमश: 1.42 करोड़ टन एवं 77 लाख टन रही।

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