फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Petrol and diesel prices on record high, but government is refusing to reduce the prices citing a revenue crisis during the Corona

क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल-डीजल के दाम: राजस्व बढ़ाने और महंगाई घटाने का क्या हो सकता है कारगर तरीका?

Tue, 15 Jun 2021 05:13 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 15 Jun 2021 05:13 PM IST
सार

पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सीनियर इकोनॉमिस्ट डॉ. एसपी शर्मा के अनुसार वर्तमान समय में पेट्रोल-डीजल पर सरकारों का कुल टैक्स 32-33 रुपये/लीटर तक पहुंच गया है। इसमें एक चौथाई तत्काल कमी किए जाने की जरूरत है। दीर्घ अवधि में इसे जीएसटी (GST) के दायरे में लाने की कोशिश करनी चाहिए...

विज्ञापन
Petrol and diesel prices on record high, but government is refusing to reduce the prices citing a revenue crisis during the Corona
पेट्रोल-डीजल की कीमत - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। पेट्रोल कई राज्यों में 100 रुपये प्रति लीटर की सीमा को पार कर गया है तो डीजल भी धीरे-धीरे शतक लगाने की ओर अग्रसर है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों के कारण अन्य वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं, महंगाई में तेज बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन कोरोना काल में राजस्व का संकट बताकर सरकार पेट्रोल की कीमतों में कमी करने से इनकार कर रही है। सरकार के इन तर्कों में कितना दम है? उसके पास राजस्व बढ़ाने के क्या उपाय हैं?

विज्ञापन


पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सीनियर इकोनॉमिस्ट डॉ. एसपी शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि पेट्रोल-डीजल की भारी कीमतों से थोक-खुदरा महंगाई की दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है। इससे आवश्यक चीजों के दामों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो रही है। जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से औद्योगिक उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है, और साथ ही पहले से ही कोरोना काल में आर्थिक संकट झेल रहे लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन


डॉ. एसपी शर्मा के अनुसार वर्तमान समय में पेट्रोल-डीजल पर सरकारों का कुल टैक्स 32-33 रुपये/लीटर तक पहुंच गया है। इसमें एक चौथाई तत्काल कमी किए जाने की जरूरत है। दीर्घ अवधि में इसे जीएसटी (GST) के दायरे में लाने की कोशिश करनी चाहिए। इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी, बढ़ी कीमतों से लोगों को राहत मिलेगी और माल सस्ता होने से औद्योगिक उत्पादन सस्ता होगा। इससे मांग में बढ़ोतरी होगी और उत्पादन बढ़ेगा। इसका अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर पड़ेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

कितनी हो गई कीमतें

15 जून को मुंबई में पेट्रोल 102.58 रुपये/लीटर बिक रहा है। पेट्रोल की कीमत मध्य प्रदेश में 104.63 रुपये, महाराष्ट्र में 102.76 रुपये, राजस्थान में 103.03 रुपये और तेलंगाना में 100.20 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। पेट्रोल की तरह डीजल भी 100 रुपये प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक आकंड़े को छूने की कोशिश करता दिख रहा है। फिलहाल राजस्थान में डीजल 96.24 रुपये और मध्यप्रदेश में 95.95 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। दिल्ली में इसकी कीमत अभी 87.28 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई है।

पेट्रोल-डीजल पर टैक्स

पेट्रोल-डीजल कीमतों में उनकी मूल कीमतों से भी ज्यादा हिस्सा एक्साइज और वैट टैक्स का होता है। नवंबर 2014 को पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.20 रुपये प्रति लीटर हुआ करती थी जो अब बढ़कर 32.90 (रोड टैक्स सहित) रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है। इसी प्रकार डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3.46 रुपये प्रति लीटर हुआ करती थी, अब यह बढ़कर 31.80 रुपये प्रति लीटर (रोड टैक्स सहित) हो चुकी है।    

इसी प्रकार, दिल्ली में पेट्रोल पर VAT टैक्स बेसिक मूल्य के 20 फीसदी से 30 फीसदी तक हो गया है। डीजल पर वैट टैक्स 12.5 फीसदी से बढ़कर 16.75 फीसदी (और सेस) पर पहुंच गया है। इस प्रकार दिल्ली के लोग पेट्रोल की कीमतों में लगभग 58 फीसदी हिस्सा टैक्स का चुकाते हैं। इसी प्रकार डीजल की कीमतों का लगभग 52 फीसदी हिस्सा टैक्स के कारण देना पड़ता है।  

कितनी कमाई कर रही सरकार

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार केंद्र की सत्ता संभाली थी, तब केंद्र सरकार ने 2014-15 में एक्साइज टैक्स के रूप में पेट्रोल से 29,279 हजार करोड़ रुपये का टैक्स कमाया था, जबकि डीजल से केंद्र सरकार को 42,881 करोड़ रुपये का टैक्स प्राप्त हुआ था। गैस के टैक्स को मिलाकार सरकार ने इस वर्ष में 74,158 हजार करोड़ रुपये का टैक्स कमाया था।

जबकि, 2020-21 में शुरुआत के केवल 10 महीनों में ही सरकार लगभग 2.95 लाख करोड़ का एक्साइज टैक्स कमा चुकी थी। अनुमान है कि वित्त वर्ष में पेट्रोल, डीजल और गैसों के सम्मिलित टैक्स के रूप में सरकार ने 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त किया है। स्वयं केंद्र सरकार का अनुमान है कि वह वित्त वर्ष 2020-21 में एक्साइज ड्यूटी के रूप में 3.61 लाख करोड़ रुपये की आय प्राप्त करेगी।

एक्साइज ड्यूटी कम क्यों नहीं कर रही सरकार

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता और अर्थशास्त्र के जानकार गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि भारत में डायरेक्ट टैक्स देने वालों की संख्या बहुत कम है, जबकि यूरोपीय या अमेरिकी देशों में प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) देने वालों की संख्या बहत ज्यादा होती है। यही कारण है कि वहां की सरकारों ने सीधे डायरेक्ट टैक्स बढ़ाकर अतिरिक्त आय का इंतजाम कर लिया।

लेकिन भारत में यह तरीका ज्यादा कारगर साबित नहीं होगा क्योंकि यहां डायरेक्ट टैक्स चुकाने वालों की संख्या बहुत कम है। दूसरे सरकार ने पांच लाख रुपये तक की आय करमुक्त कर दी है। इस कारण एक बहुत बड़ी आबादी डायरेक्ट टैक्स के दायरे से बाहर हो गई है। लिहाजा यह तरीका भारत जैसे देश में बहुत कारगर साबित नहीं होगा।

यही कारण है कि सरकार को अप्रत्यक्ष (इनडायरेक्ट) माध्यम से टैक्स बढ़ाना पड़ता है। लोग वस्तुओं की खरीद के माध्यम से जो टैक्स चुकाते हैं, सरकार की आय का बड़ा साधन बन गया है। इसे इस रूप में भी समझा जा सकता है कि केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2020-21 में 31 दिसंबर 2020 तक डायरेक्ट टैक्स के रूप में 6,20,529.14 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि इसी दौरान इनडायरेक्ट टैक्स के रूप में इससे कहीं ज्यादा 7,12,231.78 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। यानी भारत में इनडायरेक्ट टैक्स की भागीदारी ज्यादा है।

कितने टैक्स पेयर

द सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) के एक ट्वीट के अनुसार भारत में केवल 1.46 करोड़ लोग टैक्स चुकाते हैं। इसमें भी लगभग एक करोड़ लोग 5-10 लाख रुपये की सीमा के अंदर कमाते हैं और इनकम टैक्स की सबसे निचली दर चुकाते हैं। ज्यादातर मामलों में एलआईसी जैसी योजनाओं में निवेश दिखाकर टैक्स छूट प्राप्त कर ली जाती है।

केवल 46 लाख लोगों ने अपनी कमाई 10 लाख रुपये वार्षिक या इससे ज्यादा घोषित किया है। भारत जैसे 135 करोड़ लगभग की विशाल आबादी वाले देश में करदाताओं की यह संख्या बेहद कम है। यही कारण है कि सरकार को डायरेक्ट टैक्स की बजाय इनडायरेक्ट टैक्स से राजस्व इकट्ठा करने का सहारा लेना पड़ता है।

डायरेक्ट टैक्स में आय-व्यय पर सीधे टैक्स, संपत्ति और कारपोरेशन के टैक्स आते हैं। जबकि पेट्रोलियम पदार्थों पर एक्साइज ड्यूटी, वस्तुओं पर सेन्ट्रल GST और कस्टम ड्यूटी जैसे टैक्स आते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed