फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   People of China and Pakistan are also liking Indias rice, Basmati exported abroad worth 30 thousand crores

भारत का चावल : चीन और पाकिस्तान के लोगों को पसंद आ रहा, 'बासमती' का निर्यात 30 हजार करोड़ रुपये रहा

Fri, 04 Jun 2021 09:05 PM IST
योगेश साहू डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 04 Jun 2021 09:05 PM IST
सार

भारत से चीन, पाकिस्तान, अमेरिका, खाड़ी देशों समेत दुनिया के लगभग 125 देशों में बासमती चावल का निर्यात किया जाता है।

विज्ञापन
People of China and Pakistan are also liking Indias rice, Basmati exported abroad worth 30 thousand crores
चावल (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

भारत के बासमती चावल की खुशबू अब विदेशों तक फैल रही है। भारतीय चावल विदेशियों को भी खूब पसंद आ रहा है। यही कारण है कि इन दिनों भारतीय बासमती चावल की मांग भी तेजी से बढ़ती जा रही है। वर्ष 2020-21 में भारत से विदेशों में 30 हजार करोड़ रुपये मूल्य का 46.30 लाख मीट्रिक टन चावल भेजा गया।

विज्ञापन


इससे जहां किसानों को आर्थिक फायदा हो रहा है, वहीं बासमती धान की बुआई का क्षेत्रफल भी देश में बढ़ता जा रहा है। इस समय देश में किसान बासमती चावल की लगभग 32 प्रजातियों की बुआई कर रहे हैं। भारत से चीन, पाकिस्तान, अमेरिका, खाड़ी देशों समेत दुनिया के लगभग 125 देशों में बासमती चावल का निर्यात किया जाता है। एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक भारत से 30 हजार करोड़ रुपये मूल्य का 46.30 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल विदेशों को निर्यात किया गया।  
विज्ञापन


भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर जैसे कुछ राज्यों को ही बासमती धान बोने की अनुमति दी है। बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के जरिए प्रमाणित होने पर ही बासमती चावल को विदेशों को निर्यात की इजाजत मिलती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

दरअसल, विदेशों में निर्यात होने वाले बासमती चावल की गुणवत्ता को लेकर खासी सतर्कता बरती जाती है। भारत सरकार द्वारा अधिसूचित राज्यों में पैदा हुए बासमती चावल को ही विदेशों में निर्यात किया जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ राज्यों में उत्पादित बीज की गुणवत्ता बहुत खराब थी, जिस कारण किसानों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा था। 

कृषि विज्ञान केंद्र गौतमबुद्ध नगर के वैज्ञानिकों का कहना है कि अधिक पैदावार देने वाली फसलों में रोग व कीड़ों का खतरा ज्यादा रहता है। इसी कारण बासमती धान की फसल पर रोग व कीड़ों का हमला जल्दी होता है। इससे बचाव के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।


बासमती विकास निर्यात प्रतिष्ठान ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन लगातार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के विभिन्न गांवों में जाकर किसानों को स्वीकृत प्रजातियों की ही बुआई करने, अनुशासित तरीके से कीटनाशक की सीमित मात्रा में प्रयोग करने का सुझाव दे रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed