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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और बिगड़ी, 148 के पार हुआ डॉलर, बढ़े इन उत्पादों के दाम

Sat, 06 Apr 2019 01:55 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Sat, 06 Apr 2019 01:55 PM IST
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pakistan rupee touches a new high of 148 against us dollar

दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान की हालत दिन पर दिन बदतर हो रही है। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया शुक्रवार को 148 रुपये के स्तर को छू गया। डॉन अखबार में छपी खबर के मुताबिक इसके साथ ही खाने-पीने के सामान के साथ ही पेट्रोल-डीजल के दामों में भी इजाफा हो गया है, जिससे वहां की अवाम का जीना मुहाल हो गया है। वहीं सरकार ने कहा है कि वो आने वाले दिनों में बिजली और रसोई गैस की कीमतों में भी इजाफा कर देगी। 

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डीजल 119 के पार

इमरान सरकार ने इस महीने की शुरुआत में ही तेल की कीमतों में व्यापक बढ़ोतरी कर दी है। जहां डीजल की कीमत 119 पाकिस्तानी रुपये है, वहीं पेट्रोल की कीमतें छह रुपये तक बढ़ा दी गई हैं। नई दरों के मुताबिक, अब पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल 98.88 पाकिस्तानी रुपये में बिक रहा है।

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10 लाख होंगे बेरोजगार

पाकिस्तान में 10 लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं। इसके चलते गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में 40 लाख की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। पाकिस्तान के पास आयात करने के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं है। पाकिस्तान का विदेशी पूंजी भंड़ार फिलहाल, 8.5 अरब डॉलर का है। लेकिन, यह दो महीने के आयात के लिए भी काफी नहीं है।  

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pakistan rupee touches a new high of 148 against us dollar
pakistani rupee

इतनी हुई महंगाई दर

पाकिस्तान में मार्च 2019 के दौरान महंगाई की दर पांच वर्ष के उच्चतम स्तर 9.41 फीसदी पर पहुंच गई है। महंगाई का यह स्तर अप्रैल 2014 के बाद का सर्वाधिक है। उस समय महंगाई 9.2 फीसदी आंकी गई थी। मार्च महीने में ही महंगाई एक माह पहले की तुलना में 1.42 फीसदी बढ़ गई है।

विदेशी मुद्रा को हुआ भारी नुकसान

एशियाई विकास परिदृश्य 2019 के अनुसार, कृषि क्षेत्र में सुधार के बावजूद 2018 में पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़ी है।  पाकिस्तान की विस्तारवादी राजकोषीय नीति ने बजट और चालू खाते के घाटे को व्यापक रूप से बढ़ाया और विदेशी मुद्रा का भारी नुकसान किया है।

एडीबी ने कहा कि जब तक वृहद आर्थिक असंतुलन को कम नहीं किया जाता है तब तक वृद्धि के लिए परिदृश्य धीमा बना रहेगा, ऊंची मुद्रास्फीति रहेगी, मुद्रा पर दबाव बना रहेगा। उसे थोड़ा बहुत विदेशी मुद्रा भंडार भी बनाये रखने के लिये भारी मात्रा में बाहरी वित्तपोषण की जरूरत होगी। अपनी भारी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिये पाकिस्तान सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ एक वृहदआर्थिक स्थिरीकरण कार्यक्रम पर बातचीत कर रही है।

आपके लिए जानना क्यों है जरूरी

पाकिस्तान हमारा पड़ोसी देश है। कश्मीर मुद्दे पर जहां दोनों देशों में तनातनी है, वहीं भारत की तुलना में पाकिस्तान आर्थिक मोर्चे पर लगातार गिरता जा रहा है। दक्षेस देशों के समूह में भी पाकिस्तान की स्थिति काफी खराब है।

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाक को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन लिया और आयात-निर्यात होने वाले सामान पर 200 फीसदी ड्यूटी लगा दी। इसके बाद से पाकिस्तान की हालत लगातार खराब हो रही है। केंद्र सरकार की इस कार्रवाई का असर अब परोक्ष तौर पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में हम अपने पाठकों को वहां की अर्थव्यवस्था के हालात पर लगातार खबरें दे रहें है और आगे भी देते रहेंगे। 

कृपया हमारी खबरों पर अपना फीडबैक नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर दें और बताएं कि बिजनेस जगत से जुड़ी कौन सी खबर आप पढ़ना चाहते हैं। हम आपके फीडबैक के अनुसार खबरों को प्रस्तुत करेंगे। 
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