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Economy: कर्ज के बोझ तले दब रहा पाक, ₹ 13.64 ट्रिलियन बढ़ा विदेशी ऋण, IMF के 700 मिलियन डॉलर पर टिकी आस
Fri, 06 Oct 2023 08:08 PM IST
ज्योति भास्कर
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 06 Oct 2023 08:08 PM IST
सार
पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट के कारण लगातार चर्चा में बना हुआ है। मौजूदा आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान का विदेशी ऋण अनुपात बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार विदेशी लोन का दबाव एक फीसद से अधिक (लगभग ₹ 13.64 ट्रिलियन) बढ़ा है।
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Pakistan Economy
- फोटो : File Photo
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विस्तार
पाकिस्तान में गंभीर आर्थिक संकट की खबरें लगातार सुर्खियों में हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में विदेशी कर्ज का अनुपात बढ़ा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 में 36.9 प्रतिशत कर्ज का बोझ था। अब वित्त वर्ष 2023 में विदेशी लोन का दबाव बढ़कर 38.3 प्रतिशत हो गया है।
रसातल में जा रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था
शुक्रवार को आई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय की 'वार्षिक ऋण समीक्षा और सार्वजनिक ऋण बुलेटिन' में विदेशी कर्ज का दबाव बढ़ने की बात सामने आई है। वित्त वर्ष 2023 में पाकिस्तान की घरेलू मुद्रास्फीति को अनियंत्रित बताया गया। आर्थिक मामलों के जानकारों की राय में नकदी की कमी से जूझ रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से फ्री-फ़ॉल मोड में है।
कर्ज बढ़कर 62.88 ट्रिलियन रुपये हुआ
पाकिस्तान की जियो न्यूज के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के पड़ोसी मुल्क में "खतरनाक विकास" हो रहा है। वित्त वर्ष 2023 (FY2023) के बुलेटिन का जिक्र करते हुए कहा गया कि कुल सार्वजनिक ऋण जून 2023 के अंत तक 49.2 ट्रिलियन रुपये था। अब लोन बढ़कर 62.88 ट्रिलियन रुपये पर पहुंच गया है।
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पीडीएम की सरकार में सार्वजनिक ऋण 13.64 ट्रिलियन रुपये बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) गठबंधन सरकार के कार्यकाल में पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 में पाकिस्तान का सार्वजनिक ऋण 13.64 ट्रिलियन रुपये बढ़ा है। खबरों के अनुसार, कर्ज के बोझ तले दबते पाकिस्तान को अब अक्टूबर के अंत में आईएमएफ की समीक्षा और उसके बाद मिलने वाले पैकेज से मदद की आस है।
घरेलू लोन का अनुपात घटा, विदेश से मिले लोन चिंता का कारण
कुल सार्वजनिक ऋण में घरेलू लोन का अनुपात कम हुआ है। वित्त वर्ष 2022 में लोन 63.1 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2023 में लोन घटकर 61.7 प्रतिशत हो गया। हालांकि, विदेशी ऋण का अनुपात 36.9 प्रतिशत से बढ़कर 38.3 प्रतिशत हो गया है। जो 1.4 प्रतिशत का उछाल दिखाता है।
कीमतों में लगातार गिरावट के कारण हालात बदतर
जियो टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी ऋण बढ़ने की घटनाएं स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि विदेशी ऋण संचय की गति काफी तेज है। घरेलू ऋण के पीछे छूटने का प्रमुख कारण विनिमय दर के कारण बड़े पैमाने पर होने वाला मूल्यह्रास है। यानी पाकिस्तान में कीमतों में लगातार गिरावट हो रही है।
अमेरिकी लोन घटने पर भी विदेशी लोन में उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 में अमेरिका से लिया गया सार्वजनिक ऋण घटा है, लेकिन इसके बावजूद विदेश से लिया जाने वाला लोन एक फीसद बढ़ा। जून 2022 के अंत में 37 प्रतिशत लोन था, ये अमाउंट बढ़कर जून 2023 के अंत में 38 प्रतिशत हो गया।
3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का बेलआउट
रसातल में जाती पाकिस्तान की इकोनॉमी को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने जुलाई में 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर हस्तांतरित किए थे। आईएमएफ ने पाकिस्तान को ये राशि नौ महीने के लिए 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के हिस्से के रूप में दी गई थी।
पाक की आर्थिक समीक्षा, आईएमएफ प्रतिनिधिमंडल अक्टूबर के अंत में आएगा
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार गिरने के बाद देश की खराब अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के कई प्रयास हो चुके हैं, लेकिन नकदी संकट वाले इस देश में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। 3 अक्टूबर की एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में नकदी संकट से जूझ रहे पाक की आर्थिक समीक्षा होगी। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में आईएमएफ अपना प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान भेजेगा।
आईएमएफ से 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अगली किस्त
रिपोर्ट में कहा गया, आर्थिक समीक्षा सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद पाकिस्तान को आईएमएफ से 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अगली किस्त मिलेगी। पाकिस्तान को आर्थिक मदद के रूप में पैसे आईएमएफ की मंजूरी के बाद ही मिलेगी।
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रसातल में जा रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था
शुक्रवार को आई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय की 'वार्षिक ऋण समीक्षा और सार्वजनिक ऋण बुलेटिन' में विदेशी कर्ज का दबाव बढ़ने की बात सामने आई है। वित्त वर्ष 2023 में पाकिस्तान की घरेलू मुद्रास्फीति को अनियंत्रित बताया गया। आर्थिक मामलों के जानकारों की राय में नकदी की कमी से जूझ रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से फ्री-फ़ॉल मोड में है।
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कर्ज बढ़कर 62.88 ट्रिलियन रुपये हुआ
पाकिस्तान की जियो न्यूज के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के पड़ोसी मुल्क में "खतरनाक विकास" हो रहा है। वित्त वर्ष 2023 (FY2023) के बुलेटिन का जिक्र करते हुए कहा गया कि कुल सार्वजनिक ऋण जून 2023 के अंत तक 49.2 ट्रिलियन रुपये था। अब लोन बढ़कर 62.88 ट्रिलियन रुपये पर पहुंच गया है।
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पीडीएम की सरकार में सार्वजनिक ऋण 13.64 ट्रिलियन रुपये बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) गठबंधन सरकार के कार्यकाल में पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 में पाकिस्तान का सार्वजनिक ऋण 13.64 ट्रिलियन रुपये बढ़ा है। खबरों के अनुसार, कर्ज के बोझ तले दबते पाकिस्तान को अब अक्टूबर के अंत में आईएमएफ की समीक्षा और उसके बाद मिलने वाले पैकेज से मदद की आस है।
घरेलू लोन का अनुपात घटा, विदेश से मिले लोन चिंता का कारण
कुल सार्वजनिक ऋण में घरेलू लोन का अनुपात कम हुआ है। वित्त वर्ष 2022 में लोन 63.1 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2023 में लोन घटकर 61.7 प्रतिशत हो गया। हालांकि, विदेशी ऋण का अनुपात 36.9 प्रतिशत से बढ़कर 38.3 प्रतिशत हो गया है। जो 1.4 प्रतिशत का उछाल दिखाता है।
कीमतों में लगातार गिरावट के कारण हालात बदतर
जियो टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी ऋण बढ़ने की घटनाएं स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि विदेशी ऋण संचय की गति काफी तेज है। घरेलू ऋण के पीछे छूटने का प्रमुख कारण विनिमय दर के कारण बड़े पैमाने पर होने वाला मूल्यह्रास है। यानी पाकिस्तान में कीमतों में लगातार गिरावट हो रही है।
अमेरिकी लोन घटने पर भी विदेशी लोन में उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 में अमेरिका से लिया गया सार्वजनिक ऋण घटा है, लेकिन इसके बावजूद विदेश से लिया जाने वाला लोन एक फीसद बढ़ा। जून 2022 के अंत में 37 प्रतिशत लोन था, ये अमाउंट बढ़कर जून 2023 के अंत में 38 प्रतिशत हो गया।
3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का बेलआउट
रसातल में जाती पाकिस्तान की इकोनॉमी को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने जुलाई में 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर हस्तांतरित किए थे। आईएमएफ ने पाकिस्तान को ये राशि नौ महीने के लिए 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के हिस्से के रूप में दी गई थी।
पाक की आर्थिक समीक्षा, आईएमएफ प्रतिनिधिमंडल अक्टूबर के अंत में आएगा
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार गिरने के बाद देश की खराब अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के कई प्रयास हो चुके हैं, लेकिन नकदी संकट वाले इस देश में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। 3 अक्टूबर की एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में नकदी संकट से जूझ रहे पाक की आर्थिक समीक्षा होगी। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में आईएमएफ अपना प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान भेजेगा।
आईएमएफ से 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अगली किस्त
रिपोर्ट में कहा गया, आर्थिक समीक्षा सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद पाकिस्तान को आईएमएफ से 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अगली किस्त मिलेगी। पाकिस्तान को आर्थिक मदद के रूप में पैसे आईएमएफ की मंजूरी के बाद ही मिलेगी।