अरबपतियों के सियासी वर्चस्व के बीच भारत बना मिसाल: रिपोर्ट में दावा- 'आरक्षण' से ताकत का लोकतांत्रिक बंटवारा
ऑक्सफैम की असमानता रिपोर्ट में भारत की आरक्षण प्रणाली को लोकतांत्रिक शक्ति के विकेंद्रीकरण का मजबूत उदाहरण बताया गया है। विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के पहले दिन ऑक्सफैम की नई असमानता रिपोर्ट जारी की गई।
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वैश्विक स्तर पर राजनीति में बढ़ते अरबपतियों के प्रभाव पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूह ऑक्सफैम ने भारत की आरक्षण प्रणाली को लोकतांत्रिक सशक्तिकरण का एक प्रभावशाली और ठोस उदाहरण बताया है। यह टिप्पणी विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के पहले दिन जारी की गई ऑक्सफैम की नई असमानता रिपोर्ट में की गई।
ऑक्सफैम इंटरनेशनल की रिपोर्ट ‘रेसिस्टिंग द रूल ऑफ द रिच: प्रोटेक्टिंग फ्रीडम फॉर बिल्यनेर पावर' में कहा गया है कि दुनिया भर में अरबपति आम नागरिकों की तुलना में 4,000 गुना अधिक राजनीतिक पदों पर काबिज होने की संभावना रखते हैं, जिससे लोकतंत्र पर असमान प्रभाव पड़ रहा है।
भारत की आरक्षण व्यवस्था की सराहना
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित वर्गों के लिए राजनीतिक आरक्षण व्यवस्था ने उन समुदायों को प्रतिनिधित्व का अवसर दिया है, जिन्हें लंबे समय तक सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिये पर रखा गया। ऑक्सफैम के अनुसार भारत में राजनीतिक आरक्षण ने आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से बहिष्कृत वर्गों को विधायी प्रतिनिधित्व दिलाने और पुनर्वितरण नीतियों को आगे बढ़ाने का मंच दिया है। भारत में जनसंख्या के अनुपात में एस-एसटी के लिए आरक्षण के साथ-साथ हाल ही में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा भी की गई है। इसके अलावा शिक्षा और सरकारी नौकरियों में भी कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था मौजूद है।
लोकतंत्र में ‘बहुसंख्यक शक्ति’ की जरूरत
ऑक्सफैम ने कहा कि आम नागरिक तभी सशक्त होते हैं जब राजनीतिक, संस्थागत और सामाजिक परिस्थितियां उन्हें निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर देती हैं। इसके लिए संस्थागत समावेशन, जवाबदेह राजनीति, सामूहिक संगठन और सुशासन जरूरी हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नागरिक संगठनों, ट्रेड यूनियनों और जमीनी आंदोलनों की भूमिका लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम है।
ब्राजील का उदाहरण भी शामिल
भारत के अलावा ऑक्सफैम ने ब्राजील के ‘पार्टिसिपेटरी बजटिंग’ मॉडल का भी जिक्र किया। 1990 के दशक में शुरू हुई इस प्रणाली के तहत पोर्टो एलेग्रे शहर में नागरिकों को नगर बजट के एक हिस्से पर सीधे फैसला लेने का अधिकार दिया गया, जिसे सहभागी लोकतंत्र का अंतरराष्ट्रीय उदाहरण माना जाता है। रिपोर्ट में सरकारों से अपील की गई है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन, संगठन बनाने के अधिकार और पारदर्शिता को सुनिश्चित करें। साथ ही, नागरिकों और संगठनों को सूचना और संसाधनों तक पहुंच देना भी जरूरी बताया गया है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- अरबपति आम लोगों की तुलना में 4,000 गुना अधिक किसी राजनीतिक पद पर होने की संभावना रखते हैं।
- 2025 में अरबपतियों की कुल संपत्ति USD 18.3 ट्रिलियन (लगभग ₹1,660 लाख करोड़) तक पहुंच गई, जो पिछले पांच साल के औसत से तीन गुना तेजी से बढ़ी।
- 2025 में अरबपतियों की संपत्ति में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई और 2020 से उनकी कुल संपत्ति 81 प्रतिशत बढ़ चुकी है।
- दुनिया की एक चौथाई आबादी के पास रोजाना पर्याप्त भोजन नहीं है और लगभग आधी आबादी गरीबी में जीवन यापन कर रही है।
- अरबपतियों की संपत्ति में यह बढ़ोतरी वैश्विक असमानता और राजनीतिक असंतुलन को और बढ़ा रही है।
- अरबपतियों के पास दुनिया के बड़े मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रभुत्व है।
- जैसे- जेफ बेजोस (वाशिंगटन पोस्ट), एलन मस्क (एक्स), पैट्रिक सून-शिओंग (लॉस एंजिल्स टाइम्स)।
- केवल 27% शीर्ष मीडिया संपादक महिलाएं हैं और 23% ही अल्पसंख्यक वर्ग से हैं।
- 68 देशों में पिछले साल 142 से अधिक महत्वपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें कई बार हिंसा का सामना करना पड़ा।
- असमानता वाले देशों में लोकतांत्रिक ढांचे का क्षरण और चुनावों पर प्रभाव पड़ने की संभावना सात गुना अधिक है।
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