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OPS: रक्षा क्षेत्र के 3.5 लाख कर्मियों वाले संगठन ने ली ओपीएस लागू कराने की प्रतिज्ञा, कहा- यूपीएस अस्वीकार्य

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 02 Oct 2024 05:09 PM IST
सार

OPS: पहली जनवरी 2004 या उसके बाद भर्ती हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों को एनपीएस में शामिल कर दिया गया। यह एक अंशदायी पेंशन योजना थी। इसके खिलाफ कर्मचारी, लगातार संघर्ष कर रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों को किसी भी अंशदायी पेंशन योजना के अधीन नहीं किया जाना चाहिए।

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Organisation with 3.5 lakh defense sector personnel took pledge to implement OPS, Know Details
पुरानी पेंशन योजना - फोटो : amarujala.com

विस्तार

गांधी जयंती पर 3.5 लाख कर्मियों वाले अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईडीईएफ' ने गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन लागू कराने के लिए प्रतिज्ञा ली है। रक्षा क्षेत्रों के कर्मचारियों का कहना है कि देश में एनपीएस को लागू हुए 20 वर्ष हो चुके हैं। पहली जनवरी 2004 या उसके बाद भर्ती हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों को एनपीएस में शामिल कर दिया गया। यह एक अंशदायी पेंशन योजना थी। इसके खिलाफ कर्मचारी, लगातार संघर्ष कर रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों को किसी भी अंशदायी पेंशन योजना के अधीन नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें गैर-अंशदायी 'पुरानी पेंशन' योजना का फायदा देना होगा। पुरानी पेंशन से परिवार की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है। एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से फैसला सुनाया है कि पेंशन, सरकारी कर्मचारियों का अधिकार है। दुर्भाग्य से केंद्र सरकार, पुरानी पेंशन को एक दायित्व के रूप में मान रही है।यूपीएस तो किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। 

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बता दें कि एआईडीईएफ 41 आयुध कारखानों, 52 डीआरडीओ प्रयोगशालाओं, सैन्य इंजीनियरिंग सेवाओं, सेना, नौसेना और वायु सेना के तहत विभिन्न रक्षा इकाइयों व गुणवत्ता आश्वासन एजेंसी, डीजीक्यूए और डीजीएक्यूए में काम करने वाले 3.5 लाख रक्षा नागरिक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, दिल्ली के रामलीला मैदान में एकत्र हुए कर्मचारियों ने प्रतिज्ञा ली थी कि गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना के अलावा वे किसी भी अन्य अंशदायी पेंशन योजना को स्वीकार नहीं करेंगे। कर्मचारी, एनपीएस के खिलाफ लड़ रहे हैं। अब सरकार यूपीएस ले आई है। इसमें तो कई तरह की खामियां हैं। इस योजना में तो साठ वर्ष की आयु में पेन्शन मिलेगी। पुरानी पेंशन योजना को प्राप्त करने के लिए कर्मचारी, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए भी तैयार हैं।
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बतौर श्रीकुमार, सरकारी कर्मचारियों द्वारा बनाए गए दबाव के कारण भारत सरकार ने एनपीएस में सुधार के लिए तत्कालीन वित्त सचिव टी.वी.सोमनाथन की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की थी। इस कमेटी की रिपोर्ट को एआईडीईएफ ने खारिज कर दिया है। वजह, सरकारी कर्मचारियों की मांग एनपीएस में सुधार नहीं, बल्कि ओपीएस लागू कराना है। कर्मियों को केवल गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना की बहाली चाहिए। केंद्र सरकार ने अब 24 अगस्त को एक और अंशदायी पेंशन योजना, एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) शुरू करने के लिए टीवी सोमनाथन समिति की सिफारिश को एकतरफा मंजूरी दे दी। यूपीएस तो एनपीएस योजना से भी अधिक विनाशकारी है। एआईडीईएफ ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा केंद्र सरकार के कर्मचारियों के नेताओं के साथ बुलाई गई बैठक का बहिष्कार किया था। इस बहिष्कार के पीछे अहम वजह यही थी कि प्रधानमंत्री ने कर्मचारी नेताओं को ओपीएस बहाल करने के लिए नहीं, अपितु यूपीएस शुरू करने के निर्णय की जानकारी देने के लिए आमंत्रित किया था। 
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एआईडीईएफ ने यूपीएस को खारिज कर दिया है। एनपीएस और यूपीएस के खिलाफ लड़ाई जारी रखने और गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना को हासिल करने का फैसला किया है। एनपीएस और यूपीएस के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत को चिह्नित करने के लिए एआईडीईएफ के बैनर तले देश भर के रक्षा नागरिक कर्मचारियों ने महात्मा गांधी की मूर्तियों के सामने एकत्रित होकर प्रतिज्ञा ली है। इस प्रतिज्ञा में कहा गया है कि मैं एक रक्षा नागरिक कर्मचारी, विनाशकारी एनपीएस और यूपीएस अंशदायी पेंशन योजना से मुक्त होने के लिए सभी संघर्षों और आंदोलनों में शामिल होने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मैं सीसीएस पेंशन नियम 1972 (अब 2021) के तहत गैर अंशदायी पेंशन प्राप्त करने के लिए सभी ट्रेड यूनियन कार्रवाई कार्यक्रमों का भी समर्थन करता हूं।

 
मैं ऐसे सभी कार्यक्रमों में भाग लेता रहूंगा। मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि जब तक मैं गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना हासिल नहीं कर लेता तब तक चैन से नहीं बैठूंगा। हम सभी सरकारी कर्मचारी, इस वास्तविक और उचित मांग को हकीकत में बदलने के लिए एक हैं। एआईडीईएफ उन सभी समान विचारधारा वाले संगठनों को एकजुट करेगा, जो एनपीएस और यूपीएस दोनों के खिलाफ मैदान में हैं। सीसीएस पेंशन नियम 1972 (अब 2021) के तहत गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना को प्राप्त करने के लिए आने वाले दिनों में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की योजना बनाएंगे।

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