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Loan: गोल्ड लोन पर मूलधन-ब्याज के साथ किस्त का विकल्प; RBI की चेतावनी के बाद कारोबारी ला सकते हैं नई योजना

Wed, 20 Nov 2024 09:10 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 20 Nov 2024 09:10 AM IST
सार

आने वाले समय में गोल्ड लोन पर मूलधन-ब्याज के साथ किस्त का भी विकल्प मिल सकता है। कर्ज में मिली कई खामियों पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की चेतावनी के बाद कारोबारी नई योजना ला सकते हैं।

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Option of instalment along with principal and interest on gold loan businessmen may bring new scheme
गोल्ड लोन पर किस्त का विकल्प मिलने की संभावना (प्रतीकात्मक) - फोटो : AdobeStock

विस्तार

बैंक और गोल्ड लोन देने वाली कंपनियां अब ग्राहकों से मूलधन और ब्याज को किस्तों के रूप में भुगतान करने को कह सकती हैं। दरअसल, हाल में भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने बैंकों और ऐसी कंपनियों को सोने के एवज में दिए जाने वाले कर्ज में कई खामियां मिलने पर चेताया था। उसी के बाद अब यह नया विकल्प शुरू हो सकता है।
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मासिक किस्तों में ब्याज और मूलधन का भुगतान
सूत्रों के मुताबिक, नए नियमों के तहत विनियमित संस्थाएं ग्राहकों को सोने के एवज में दिए जाने वाले कर्ज के समय ही मासिक किस्तों में ब्याज और मूलधन का भुगतान शुरू करने के लिए कह सकती हैं। यह एक तरह से टर्म लोन के तर्ज पर हो सकता है।
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आरबीआई की कार्रवाई से बचने के लिए मासिक भुगतान का विकल्प अच्छा...
सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई चाहता है कि ऋणदाता ग्राहकों की भुगतान क्षमता की जांच करें और केवल गारंटी पर ही निर्भर न रहें। आरबीआई लोन का आंशिक भुगतान कर फिर से नए कर्ज देने वाली प्रथा से भी खुश नहीं है। ऐसे में अब आरबीआई की कार्रवाई से बचने के लिए मासिक भुगतान का विकल्प अच्छा हो सकता है। 30 सितंबर को आरबीआई ने सर्कुलर में कहा था कि सोने के गहनों के बदले कर्ज देने में बहुत ज्यादा अनियमितताएं पाई जा रही हैं।
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गलत तरीके से हो रहा मूल्यांकन
आरबीआई को सोने के बदले कर्ज देने वाले संस्थानों के कामकाज में अनियमितताएं मिलीं थीं। उनसे नीतियों एवं पोर्टफोलियो की समीक्षा करने को कहा गया था। कर्जों के स्रोत और मूल्यांकन के लिए तीसरे पक्ष के उपयोग में कमियां मिलीं थीं। ग्राहक की गैर-मौजूदगी में सोने का मूल्यांकन हो रहा था। आभूषणों की नीलामी में पारदर्शिता नहीं थी।


सोने के एवज में कर्ज 10 लाख करोड़
रेटिंग एजेंसी इक्रा का मानना है कि आरबीआई के उठाए गए कदमों के बावजूद स्वर्ण ऋण में अच्छी वृद्धि हुई है। मार्च, 2025 तक संगठित कर्जदाताओं का पोर्टफोलियो 10 लाख करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है। 30 सितंबर तक बैंकों के जूलरी लोन में 51 फीसदी की वृद्धि हुई है जो 1.4 लाख करोड़ रुपये रहा है।
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