Adani-Hindenburg Row: क्या हिंडनबर्ग ने साजिश के तहत लगाए थे अदाणी समूह पर आरोप; कैसे चला ऑपरेशन जेपेलिन?
Adani-Hindenburg Row: जनवरी 2023 में, हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें अदाणी समूह पर कई आरोप लगाए गए थे। इस हमले से समूह के बाजार पूंजीकरण में 150 बिलियन डॉलर से अधिक की गिरावट आई। हालांकि, अब अदाणी ग्रुप इस मामले में मजबूत वापसी कर चुका है। इस मामले से जुड़े कुछ नए अपडेट्स सामने आए हैं, आइए जानते हैं।
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अदाणी-हिंडनबर्ग प्रकरण से जुड़े कुछ नए अपडेट्स सामने आए हैं। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद अदाणी समूह ने ऑपरेशन जेपलिन नामक अभियान चलाकर हिंडनबर्ग के आरोपों की पड़ताल की और शॉर्ट सेलर के आरोपों के बाद अपनी वापसी सुनिश्चित की। इस बीच जनवरी 2025 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने खुद ही अपनी कंपनी को बंद करने की घोषणा कर दी।
क्या है ऑपरेशन जेपेलिन?
जनवरी 2023 में, हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें अदाणी समूह पर कई आरोप लगाए गए थे। इस हमले से समूह के बाजार पूंजीकरण में 150 अरब डॉलर से अधिक की गिरावट आई। हालांकि, अब अदाणी ग्रुप इस मामले में मजबूत वापसी कर चुका है। इस मामले में कुछ नए अपडेट्स सामने आए हैं।
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार अदाणी समूह ने खुद पर लगे आरोपों के बाद 'ऑपरेशन जेपेलिन' शुरू करके हिंडनबर्ग के खिलाफ जोरदार वापसी की। माना जाता है कि इसमें एक इस्राइली खुफिया एजेंसी की भी मदद ली गई। जिससे निवेशकों का विश्वास फिर से बहाल किया जा सके।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अदाणी समूह ने मुख्य व्यवसायों पर दिया ध्यान
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अदाणी समूह ने मुख्य व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित किया। वहीं, 'ऑपरेशन जेपेलिन' पर गुप्त रूप से काम करना भी जारी रखा। सूत्रों के अनुसार, पूर्व खुफिया अधिकारी इस मामले में कड़ियों को जोड़ने में सफल रहे। उन्हें एक्टिविस्ट वकीलों, पत्रकारों, हेज फंडों और राजनीतिक लोगों से भी मदद मिली।
सूत्रों के अनुसार, अदाणी समूह ने हिंडनबर्ग रिसर्च और इसके संस्थापक नाथन एंडरसन के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने की तैयारी की और एक कानूनी नोटिस भी भेजा। अदाणी समूह की कानूनी टीम और हिंडनबर्ग अधिकारियों के बीच एक बैठक पर बात हुई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि बैठक हुई या नहीं।
हिंडनबर्ग के जवाब में चला ऑपरेशन जेपेलिन?
हिंडनबर्ग रिसर्च, वह फोरेंसिक वित्तीय फर्म जिसने अदाणी समूह को चुनौती दी थी, ने अपना नाम उस बलून से लिया, जो 1937 में न्यू जर्सी पहुंचते ही आग की भेंट चढ़ गया था। वहीं अदाणी समूह के खिलाफ फर्म की निंदनीय रिपोर्ट के जवाब में 'ऑपरेशन जेपेलिन' चलाया गया। यह नाम प्रथम विश्व युद्ध के दौरान टोही और बमबारी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जर्मन निर्देशित हवाई जहाजों के नाम पर रखा गया था।