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जीएसटी एक सालः डिजिटल कारोबार से व्यापार करना हुआ आसान, दर्जन भर से अधिक कर हुए खत्म

Fri, 29 Jun 2018 04:36 AM IST
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 29 Jun 2018 04:36 AM IST
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one year of gst has made business easy for traders
अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में आजादी के बाद से सबसे बड़ा कर सुधार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली से पिछले साल एक जुलाई को ‘एक देश एक कर प्रणाली’ का आगाज हुआ। इससे दर्जन भर से ज्यादा अप्रत्यक्ष करों का खात्मा तो हुआ ही, देश के सभी छोटे-बड़े कारोबारी डिजिटाइज्ड हो गए। हालांकि, इसमें कोई शक नहीं है कि इसमें अभी भी सुधार की गुंजाइश है।  
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केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीआईटी) के एक अवकाश प्राप्त अधिकारी का कहना है कि एक जुलाई 2017 को जब देश में जीएसटी प्रणाली को लागू किया गया था, तो अधिकारी से लेकर कारोबारी, सभी इसके परिणाम को लेकर सशंकित थे। लेकिन इसने कारोबारियों की दिक्कतें काफी हद तक कम कीं।
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इससे सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि देश के सभी राज्यों में कर की दर एक हो गई। जीएसटी से पहले की हालत देखें, तो किसी वस्तु पर यदि दिल्ली में कम वैट था और उत्तर प्रदेश और हरियाणा में ज्यादा। नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव या फरीदाबाद में रहने वाले लोग उसे दिल्ली से खरीदना पसंद करते थे। इस चक्कर में संबंधित राज्य को अप्रत्यक्ष कर का नुकसान होता था। अब देशभर में किसी भी वस्तु पर कर की दर समान है।  
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बही-खाते का चक्कर हुआ खत्म 
जीएसटी लागू होने से पहले देशभर में छोटे कारोबारी बही-खाते के सहारे ही काम करते थे। जीएसटी लागू होने के बाद रिटर्न डिजिटल तरीके से ही दायर होता था, इसलिए उनकी मजबूरी थी कि कारोबार को बही-खाते से कंप्यूटर में लेकर आएं। इससे सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि पूरे देश के कारोबारी डिजिटल हो गए।  

ई-वे बिल से माल परिवहन हुआ आसान 

one year of gst has made business easy for traders

जीएसटी लागू करने के बाद माल परिवहन में ई-वे बिल प्रणाली की शुरुआत की गई। इससे वस्तुओं के अंतरराज्यीय परिवहन में आसानी हो गई। लेकिन इसमें जो 50 हजार रुपये की सीमा तय की गई है, उस पर कारोबारियों को आपत्ति है।

उनका कहना है कि इस सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। कई राज्यों ने तो अपने स्तर पर ही इसकी सीमा को दो लाख रुपये कर दिया है, जबकि कुछ राज्यों ने कुछ अधिसूचित वस्तुओं पर ही इसे लागू किया है। यह एक देश एक कर प्रणाली में अजीब सा भेद है, इसलिए इस पर जीएसटी परिषद को ही कोई फैसला लेना होगा।  

शुरुआत में आई थी कई दिक्कतें 
जब जीएसटी को लागू किया गया था, तो शुरुआती महीनों में कारोबारियों को जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में काफी दिक्कत हुई थी। उस समय पता चला था कि जीएसटी के आईटी प्लेटफॉर्म को विकसित करने के लिए जिस निजी क्षेत्र की कंपनी जीएसटी नेटवर्क को जिम्मेदारी दी गई थी, उनका सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा था।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इस सिस्टम को ठीक किया गया और यह दिक्कत खत्म हो गई। जीएसटी लागू होने के बाद केंद्रीय राजस्व सचिव हसमुख अढिया से अमर उजाला ने इस बारे में पूछा था, तो उनका कहना था कि इतने बड़े देश में जब कोई नई कर प्रणाली लागू की जाती है, तो कुछ दिक्कतें आती ही हैं।

व्यावहारिक दिक्कत यह है कि भविष्य की तकनीकी कठिनाइयों के आकलन की कोई मशीनरी पहले से विकसित नहीं की जा सकती है। इसलिए जैसे-जैसे कठिनाइयां आती गईं, उन्हें सुधारने का प्रयास किया जाता रहा। 

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