किसानों की सालाना आय का 6 फीसदी है 6 छह हजार रुपये, ऊंट के मुंह में जीरा बराबर
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1 फरवरी को पेश हुए अंतरिम बजट में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने छोटे किसानों की माली हालत को सुधारने के लिए 6 हजार रुपये वार्षिक देने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) के तहत मिलने वाली यह राशि उनकी वास्तविक सालाना आय का केवल 6 फीसदी है। इससे लग रहा है कि यह योजना किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा साबित होगी।
इससे ज्यादा है मासिक आय
राष्ट्रीय सैंपल सर्वे कार्यालय (एनएसएसओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2 हेक्टयर तक जमीन वाले किसानों की मासिक आय 2012-13 में ही 7348 रुपये थी। वहीं इसके 2018-19 में 11811 रुपये मासिक रहने का अनुमान है। इस हिसाब से इन किसानों को इस वित्त वर्ष में 1,41,732 रुपये आय होने का अनुमान है।
6 हजार से ज्यादा हो रही है मासिक कमाई
सबसे कम जमीन (0.01 हेक्टेयर) वाला किसान भी 2012-13 में 4561 रुपये महिना कमा रहा था। वहीं इस वित्त विर्ष में उसकी मासिक कमाई 7,331 रुपये रहने की संभावना है। वहीं 1 हेक्टेयर जमीन वाले किसान को इस वित्त वर्ष में 8,434 रुपये की मासिक कमाई होने की संभावना है।
अगर छोटे से लेकर बड़े किसान की औसत मासिक आय को देखा जाए तो यह 10,329 रुपये मासिक बैठती है। इस हिसाब से औसत सालाना आय 1,23,948 रुपये होती है जो सरकार द्वारा दी जा रही 6 हजार रुपये की मदद का केवल 5 फीसदी है।
एक फरवरी से पहले खरीदी गई जमीन पर मिलेगा फायदा
हालांकि इस योजना का फायदा केवल उन किसानों को मिलेगा, जिन्होंने 1 फरवरी से पहले जमीन खरीदी हुई है। 1 फरवरी के बाद जिन लोगों ने भी खेती करने के लिए जमीन को खरीदा है, उनको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
आधार नहीं होगा अनिवार्य
बजट में घोषित योजना का लाभ किसानों को मुहैया कराने के लिए केंद्र ने राज्य सरकारों से विभिन्न आधारों पर उनका डेटा तैयार करने को कहा है। राज्यों द्वारा जिलावार लाभार्थियों की सूची पीएम-किसान पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
इसके आधार पर सीधे किसानों के बैंक खातों में पहली किस्त का भुगतान होगा। साथ ही नजर रखने के लिए परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) का गठन भी कर दिया गया है। योजना का वित्त पोषण केंद्र सरकार करेगी और इससे 12 करोड़ छोटे और सीमांत किसान परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। पहली किस्त 1 दिसंबर, 2018 से 31 मार्च, 2019 के लिए जारी होगी।
आगे से अनिवार्य होगा आधार
सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिसंबर से मार्च की अवधि के लिए मुहैया कराई जाने वाली पहली किस्त में लाभार्थियों को आधार पंजीकरण से छूट रहेगी लेकिन इसके बाद दोहरेपन को रोकने के लिए आधार अनिवार्य किया गया है। केंद्र ने निर्देश में कहा कि राज्य सरकारें यह शुनिश्चित कराएं कि लाभार्थी परिवारों में कोई दोहरापन न हो और कोई भी सूचना गलत या अधूरी नहीं मुहैया कराई जाएगी।