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RBI: चेक ट्रंकेशन सिस्टम की प्रक्रिया में होगा बदलाव, आरबीआई ने कहा- कुछ ही घंटों में होगा चेक का निपटान
Fri, 09 Aug 2024 03:27 AM IST
विशांत श्रीवास्तव
अमर उजाला, ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला, ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विशांत श्रीवास्तव
Updated Fri, 09 Aug 2024 03:27 AM IST
सार
आरबीआई ने कहा है कि ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए चेक ट्रंकेशन सिस्टम की प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा। इससे चेक का निपटान कुछ ही घंटों में हो जाएगा।
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आरबीआई (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
अब आपके चेक का निपटान कुछ ही घंटों में हो जाएगा। इस संबंध में आरबीआई जल्द विस्तृत दिशानिर्देश जारी करेगा। अभी चेक जमा करने से लेकर राशि खाते में आने तक दो दिन (टी+1) का समय लग जाता है।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करते हुए कहा, चेक समाशोधन को दुरुस्त करने, निपटान जोखिम कम करने और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के मकसद से चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) की वर्तमान प्रक्रिया में बदलाव का प्रस्ताव है। इस नई व्यवस्था में चेक जमा करने के कुछ ही घंटों में यह ‘क्लियर’ हो जाएगा। इसके लिए मौजूदा सीटीएस व्यवस्था के तहत ‘बैच’ में प्रसंस्करण की जगह कारोबारी समय में निरंतर आधार पर निपटान की व्यवस्था की जाएगी। नई व्यवस्था में चेक को स्कैन कर प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे उसका निपटान कुछ घंटों में ही हो जाएगा।
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यूपीआई के जरिये कर भुगतान सीमा बढ़कर पांच लाख रुपये
केंद्रीय बैंक ने यूपीआई के जरिये कर भुगतान की सीमा को एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये प्रति लेनदेन करने की घोषणा की है। दास ने कहा, यूपीआई अपनी सहज सुविधाओं से भुगतान का सबसे पसंदीदा तरीका बन गया है। विभिन्न उपयोग-मामलों के आधार पर आरबीआई ने समय-समय पर पूंजी बाजार, आईपीओ सब्सक्रिप्शन, कर्ज संग्रह, बीमा, चिकित्सा और शैक्षिक सेवाओं जैसी कुछ श्रेणियों के लिए सीमाओं की समीक्षा कर बढ़ाया है। चूंकि, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर भुगतान सामान्य, नियमित और उच्च मूल्य के हैं। इसलिए यूपीआई के जरिये कर भुगतान की सीमा को बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इस संबंध में आवश्यक निर्देश अलग से जारी होंगे।
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रेपो दर : 6.5 फीसदी, लगातार नौंवी बार बदलाव नहीं
आरबीआई ने लगातार नौवीं बार रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 6.5 फीसदी पर स्थिर रखा है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के छह में से चार सदस्यों ने नीतिगत दर को यथावत रखने के पक्ष में मतदान किया। वहीं, दो सदस्यों डॉ. आशिमा गोयल और प्रो. जयंत आर वर्मा ने रेपो दर में 0.25 फीसदी कटौती का समर्थन किया। गवर्नर ने कहा, ऊंची खाद्य महंगाई को नरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव को रोकने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। इसके साथ ही, आरबीआई ने महंगाई को चार फीसदी पर लाने के लक्ष्य को हासिल करने के मकसद से उदार रुख को वापस लेने का रुख कायम रखा है।