अब अधिकारियों से बिना मिले पूरी होगी टैक्स जांच, जारी हो रही ई-मूल्यांकन प्रक्रिया
- सरकार ने जारी की ई-मूल्यांकन प्रक्रिया की अधिसूचना, आठ अक्तूबर से लागू होगी नई व्यवस्था
- करदाता को व्यक्तिगत रूप से आयकर अधिकारी के सामने नहीं होना होगा पेश, नहीं चलेगी मनमानी
- वित्त मंत्री ने कहा था- इस योजना को आठ अक्तूबर को विजया दशमी के दिन पेश किया जाएगा
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आयकरदाताओं के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी ‘ई-मूल्यांकन’ योजना आठ अक्तूबर से लागू हो जाएगी।। फेसलेस या नामरहित मूल्यांकन प्रक्रिया के तौर पर जानी जाने वाली योजना के लिए वित्त मंत्रालय ने बृहस्तिवार को अधिसूचना भी जारी कर दी। इस व्यवस्था में जांच के ज्यादातर मामलों में करदाताओं को आयकर अधिकारियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
इस योजना के तहत राष्ट्रीय ई-मूल्यांकन केंद्र बनाया जाएगा। केंद्र के माध्यम से आयकरदाता को नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें चयन से जुड़े मुद्दे का उल्लेख किया जाएगा। आयकरदाता से जवाब मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर केंद्र से स्वचालन प्रक्रिया के माध्यम से आकलन अधिकारी को मामला भेज दिया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में कहा था कि इस योजना को आठ अक्तूबर को पेश किया जाएगा, जिस दिन ‘विजयदशमी’ भी है। अधिसूचना में कहा गया, ‘इसके तहत किसी भी तरह की कार्यवाही के दौरान व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से राष्ट्रीय ई-मूल्यांकन केंद्र या क्षेत्रीय ई-मूल्यांकन केंद्र या किसी अन्य इकाई में आयकर अधिकारी के सामने पेश नहीं होना होगा।’
इसमें कहा गया है कि अगर मूल्यांकन के मामले में कोई अधिकृत प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में शामिल होना चाहता है तो वह आयकर अधिकारी के सामने दस्तावेज दे सकता है या पेश हो सकता है। उन्हें ‘किसी भी इकाई’ में पेश होने की अनुमति दी जाएगी और ऐसी सुनवाई विशेष रूप से वीडियो लिंक या ऐसी ही किसी अन्य सुविधा के माध्यम से होगी।
सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि कर जांच की मौजूदा व्यवस्था में करदाता और विभाग के बीच खासा आमना-सामना होता है, जिसके चलते कुछ अवांछित प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलता है। सीबीडीटी ने कहा कि आईटी कानून के तहत हर प्रकार के नोटिस, सवाल-जवाब और जारी होने वाले पत्रों के लिए ई-कार्यवाही की व्यवस्था उपलब्ध होगी।
आपको मिलेंगी ये सहूलियत
- आयकर विभाग करदाता से किसी भी तरह का संपर्क सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से करेगा। नोटिस या अन्य मामलों की अपडेट जानकारी रियल टाइम अलर्ट के जरिये दी जाएगी।
- आईटीआर पूरा करने या रिफंड के मामलों में करदाता कभी कर अधिकारी के बारे में जानकारी नहीं ले सकेंगे, जिससे गोपनीयता बनी रहेगी।
- जांच के लिए चुने गए मामलों का कर अधिकारी को रैंडम तरीके से आवंटन होगा। करदाता और अधिकारी के बातचीत के लिए एकल संपर्क बिंदु बनाया जाएगा।
- आयकर विभाग जांच की दशकों पुरानी परंपरा छोड़ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डाटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करेगा और इसमें समय कम लगेगा।
तकनीक से न बढ़ें मुश्किलें
नांगिया एडवाइजर्स (एंडरसन ग्लोबल) के प्रबंधकीय भागीदार राकेश नांगिया का कहना है कि ई-एसेसमेंट सैद्धांतिक रूप से एक उत्कृष्ट विचार है। हालांकि, इससे करदाताओं के साथ अनियोजित अन्याय नहीं होने देने को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक प्रणालियों और प्रक्रियाओं को विकसित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था ने पहले ही एआई, मशीन लर्निंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाओं को अपना लिया है। हालांकि, डिजिटल क्षमताओं में विस्तार के साथ इसकी चुनौतियां भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।