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Notice to RIL: रिलायंस को ₹24,500 करोड़ का नोटिस; प्राकृतिक गैस उत्पादन और बिक्री से हुए लाभ से जुड़ा है मामला

Tue, 04 Mar 2025 10:23 PM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 04 Mar 2025 10:23 PM IST
सार

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को 2.81 अरब डॉलर का नोटिस भेजा है। मामला ओएनजीसी के आसपास के ब्लॉक से प्राकृतिक गैस के उत्पादन और बिक्री से हुए लाभ से जुड़ा है।

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Notice to RIL 24500 crore to Reliance matter related to profit from natural gas production and sale
रिलायंस इंडस्ट्रीज - फोटो : एएनआई

विस्तार

सरकार ने ओएनजीसी के आसपास के ब्लॉक से प्राकृतिक गैस के उत्पादन और बिक्री से हुए लाभ पर रिलायंस इंडस्ट्रीज को 2.81 अरब डॉलर (करीब 24,500 करोड़ रुपये) का मांग नोटिस भेजा है। यह नोटिस 14 फरवरी को आए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद भेजा गया है। हाईकोर्ट ने एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें रिलायंस और यूके की उसकी साझेदार फर्म बीपी पीएलसी को नजदीकी ब्लॉक से गैस उत्पादन और बिक्री के लिए किसी भी हर्जाने की देनदारी नहीं बताई गई थी।

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कंपनी ने शेयर बाजार को भेजी सूचना में कहा, खंडपीठ के फैसले के बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय से 3 मार्च, 2025 को मांग पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, बीपी एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लि. और कनाडा की कंपनी निको (एनईसीओ) लि. से 2.81 अरब डॉलर की मांग की गई है।
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सरकार ने दायर की थी अपील
दरअसल, सरकार ने 2016 में ओएनजीसी के आसपास के क्षेत्रों से केजी-डी6 ब्लॉक में स्थानांतरित हुई गैस की मात्रा के लिए रिलायंस और उसके भागीदारों से 1.55 अरब डॉलर की मांग की थी। रिलायंस ने इस दावे का विरोध किया था। जुलाई, 2018 में मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने भी कहा कि कंपनी मुआवजे के भुगतान के लिए बाध्य नहीं है।

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  • इस फैसले के खिलाफ दायर सरकार की अपील को दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मई, 2023 में खारिज करते हुए मध्यस्थता निर्णय को बरकरार रखा था।
  • हाईकोर्ट की ही एक खंडपीठ ने पिछले महीने रिलायंस और उसके भागीदारों के खिलाफ फैसला सुनाते हुए एकल न्यायाधीश के आदेश को खारिज कर दिया था।

2013 में शुरू हुआ था विवाद
यह विवाद जुलाई, 2013 में उस समय शुरू हुआ था, जब ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) को संदेह हुआ कि उसके केजी-डी5 और जी-4 ब्लॉक का क्षेत्र रिलायंस के केजी-डी6 ब्लॉक से जुड़ा हुआ है। सरकारी कंपनी लगा कि केजी-डी5 ब्लॉक के सटे इलाके में रिलायंस की ओर से खोदे गए कम-से-कम चार कुओं ने उसके संसाधनों का भी दोहन किया है।

बैटरी संयंत्र की समयसीमा में चूक पर लगा जुर्माना
सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की अनुषंगी कंपनी रिलायंस न्यू एनर्जी बैटरी स्टोरेज लि. पर बैटरी सेल संयंत्र लगाने की समयसीमा में चूक के लिए जुर्माना लगाया है। इसके लिए कंपनी को उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन दिए गए थे। रिलायंस ने बताया, उसकी अनुषंगी कंपनी को तीन मार्च को भारी उद्योग मंत्रालय से एक पत्र मिला, जिसमें एक जनवरी, 2025 से हर दिन की देरी के लिए प्रदर्शन सुरक्षा (50 करोड़ रुपये) की 0.1 फीसदी की दर से क्षतिपूर्ति वसूलने का निर्देश दिया गया है।

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