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DoPT: 'लोकसेवकों के मूल्यांकन के लिए कोई 360 डिग्री व्यवस्था नहीं', डीओपीटी ने कैट को हलफनामे में ये बताया
Mon, 30 Oct 2023 06:31 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 30 Oct 2023 06:31 PM IST
सार
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 15 नवंबर, 2022 के एक आदेश के माध्यम से कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) द्वारा संयुक्त सचिव या समकक्ष के पद के लिए अधिकारी को सूचीबद्ध नहीं किए जाने से अवगत कराया गया था। इस मामले में न्यायाधिकरण ने पिछले साल 20 दिसंबर को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।
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- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की नैनीताल सर्किट पीठ के समक्ष हलफनामा दायर कर कहा है कि लोक सेवकों के मूल्यांकन के लिए 360 डिग्री की कोई व्यवस्था नहीं है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत काम करने वाले डीओपीटी का यह बयान पिछले साल दिसंबर में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की ओर से दायर एक याचिका के जवाब में आया है।
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उत्तराखंड कैडर के 2002 बैच के आईएफएस अधिकारी चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वह केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव या समकक्ष स्तर पर पैनल में शामिल करने के उनके आवेदन को खारिज किए जाने से संबंधित सभी दस्तावेज, मूल्यांकन, विशेषज्ञ समितियों, सिविल सेवा बोर्ड (सीएसबी) की रिपोर्ट और सक्षम अधिकारियों के निष्कर्ष पेश करे।
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 15 नवंबर, 2022 के एक आदेश के माध्यम से कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) द्वारा संयुक्त सचिव या समकक्ष के पद के लिए अधिकारी को सूचीबद्ध नहीं किए जाने से अवगत कराया गया था। न्यायाधिकरण ने पिछले साल 20 दिसंबर को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।
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अधिकरण की नैनीताल सर्किट पीठ के समक्ष दायर जवाबी हलफनामे में डीओपीटी ने कहा, ''आवेदक द्वारा दायर याचिका/आवेदन खारिज किया जा सकता है क्योंकि आवेदक 360 डिग्री मूल्यांकन का रिकॉर्ड मांग रहा है और ऐसा कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
हलफनामे में चतुर्वेदी द्वारा दायर एक पूर्व आवेदन का भी उल्लेख किया गया है जो 'प्रधान पीठ, नई दिल्ली' में लंबित है, जिसमें 'आवेदक ने 360 डिग्री मूल्यांकन की प्रणाली को रद्द करने का अनुरोध किया है।' हलफनामे के अनुसार इसके जवाब में 9 अक्तूबर 2023 को पहले ही कहा जा चुका है कि भारत सरकार में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
डीओपीटी ने आगे कहा कि भारत सरकार में संयुक्त सचिव या समकक्ष के पद पर संबद्धता को पदोन्नति नहीं माना जाना चाहिए। पीठ ने कहा, ''पैनल में शामिल किया जाना अपने आप में अधिकार का मामला नहीं है या इस तरह का दावा नहीं किया जा सकता। भारत सरकार में पैनल में शामिल करने के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार उपयुक्तता तय करना सक्षम प्राधिकारी पर निर्भर करता है।
यहां एक बात महत्वपूर्ण है कि डीओपीटी ने 2017 में एक संसदीय पैनल को एक लिखित प्रस्तुतीकरण में कहा था कि पैनल के लिए संशोधित दिशानिर्देश अप्रैल 2016 में लागू किए गए थे, जो सीनियर, जूनियर, समकक्षों, बाहरी हितधारकों और सेवारत सचिवों जैसे कम से कम पांच हितधारकों से मल्टी-सोर्स फीडबैक (एमएसएफ) एकत्र करने का प्रावधान करते हैं।
अगस्त 2017 में संसद में पेश की गई कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय विभाग की की ओर से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की 'केंद्र सरकार के तहत सिविल सेवकों के मूल्यांकन और सूचीकरण' पर 92 वीं रिपोर्ट में कहा गया है, 'इसे 360 डिग्री समीक्षा के रूप में जाना जाता है और यह एमएसएफ के समान है।'
पैनल की रिपोर्ट के अनुसार, 360 डिग्री मूल्यांकन, जिसे एमएसएफ भी कहा जाता है, का उपयोग अब अखिल भारतीय सेवाओं और अन्य केंद्रीय सरकारी समूह 'ए' सेवाओं के अधिकारियों के मूल्यांकन के लिए किया जा रहा है ताकि उन्हें भारत सरकार में संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के पद पर सूचीबद्ध किया जा सके।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि वह 'मौजूदा 360 डिग्री मूल्यांकन प्रणाली को अपारदर्शी, गैर-पारदर्शी और व्यक्तिपरक पाती है।' मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी।