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कल से नया वित्त वर्ष: टैक्स-बैंकिंग, जमा-बचत व GST से जुड़े नियमों में कई बड़े बदलाव, आम आदमी पर होगा सीधा असर

Mon, 31 Mar 2025 05:51 AM IST
शिव शुक्ला कालीचरण
कालीचरण Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 31 Mar 2025 05:51 AM IST
सार

नया वित्त वर्ष कल यानी एक अप्रैल से शुरु हो रहा है। वित्त वर्ष के पहले दिन से कई बड़े बदलाव हो रहे हैं। इनका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ेगा। आइये जानते हैं कि टैक्स, बैंकिंग, यूपीआई, क्रेडिट कार्ड, जमा, बचत व जीएसटी से जुड़े कौन-कौन से नियमों में होगा संशोधन...

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New financial year starts from tomorrow, many big changes in rules related to tax-banking, deposit-savings etc
1 अप्रैल से बदल रहे कई नियम - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

एक दिन बाद से यानी एक अप्रैल, 2025 से नए वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत हो रही है। इस तारीख से आपकी जेब और जिंदगी पर सीधा असर डालने वाले कई बड़े बदलाव होने वाले हैं। इन बदलावों का मकसद करदाताओं, वरिष्ठ नागरिकों, उपभोक्ताओं और व्यवसायों को राहत देकर खर्च एवं खपत को बढ़ाना है, ताकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार को मजबूती मिल सके।

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टीडीएस : ब्याज से होने वाली कमाई पर ज्यादा बचत
सरकार ने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) से ब्याज कमाने वाले लोगों को बड़ी राहत दी है। एक अप्रैल, 2025 से ब्याज आय पर टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) छूट की सीमा बढ़ा दी गई है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50,000 रुपये से बढ़ाकर दोगुनी यानी एक लाख रुपये कर दी गई है। यानी अगर कोई वरिष्ठ नागरिक एक वित्त वर्ष में ब्याज के रूप में एक लाख रुपये तक कमाई करता है, तो बैंक उस पर कोई टीडीएस नहीं काटेंगे। इससे उन वरिष्ठ नागरिकों का काफी फायदा होगा, जो ब्याज आय से अपना गुजारा करते हैं। सामान्य नागरिकों के लिए यह सीमा 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है। यानी एक अप्रैल से सामान्य नागरिकों को एफडी या आरडी से एक वित्त वर्ष से 50,000 रुपये तक की ब्याज आय पर कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा।
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मकान किराये पर 6 लाख तक राहत
किराये से कमाई के लिए टीडीएस कटौती की सीमा को 2.40 लाख से बढ़ाकर 6 लाख रुपये सालाना किया गया है। यानी 50,000 रुपये महीने तक के किराये पर टीडीएस नहीं लगेगा। यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत है, जिनके पास दूसरा घर या प्रॉपर्टी है और उन्हें किराये से कमाई होती है। 6 लाख से ज्यादा का किराया होने पर ही टीडीएस देना होगा।
 

पैसा विदेश भेजने पर टैक्स
आरबीआई की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत अगर आप विदेश में पढ़ रहे बच्चों की फीस या अन्य खर्चों के लिए 10 लाख रुपये भेजते हैं, तो आपको कोई टीसीएस (स्रोत पर कर संग्रह) नहीं देना होगा। अब तक शिक्षा और चिकित्सा के लिए 7 लाख रुपये से ज्यादा भेजने पर 5 फीसदी टीसीएस देना पड़ता था। इस बदलाव से उन लोगों खासतौर से माता-पिता को फायदा होगा, जिनके बच्चे विदेशों में पढ़ाई कर रहे हैं।

कमीशन पर भी बढ़ी छूट
टीडीएस नियमों में बदलाव से बीमा एजेंटों और ब्रोकरों को भी राहत मिलेगी। पहले 15,000 रुपये से अधिक के बीमा कमीशन पर टीडीएस कटता था, जिसकी सीमा बढ़ाकर अब 20,000 रुपये कर दी गई है। इसके अलावा, लॉटरी या घुड़दौड़ से होने वाली कमाई से जुड़े टीडीएस नियमों को भी आसान बनाया गया है। नए वित्त वर्ष से तभी टीडीएस कटेगा, जब किसी एक लेनदेन में जीत की रकम 10,000 रुपये से अधिक हो। अब तक सालभर में कुल 10,000 रुपये से अधिक की आय पर टीडीएस कटता था।

लाभांश आय पर भी राहत
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को भी नए नियम से फायदा होगा। एक अप्रैल से लाभांश से होने वाली कमाई पर टीडीएस छूट की सीमा 5,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी गई है। यानी नए वित्त वर्ष से शेयर और म्यूचुअल फंड की यूनिट्स के जरिये होने वाली 10,000 रुपये तक लाभांश आय पर टीडीएस नहीं कटेगा।


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बैंकिंग नियमों में हुए ये बदलाव 
एटीएम से पैसे निकालना महंगा, हर अतिरिक्त निकासी पर 23 रुपये शुल्क

एटीएम से पैसे निकालना एक मई, 2025 से महंगा हो जाएगा। आरबीआई ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी कर एटीएम इंटरचेंज शुल्क बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव से एटीएम का बार-बार इस्तेमाल करने वाले ग्राहक प्रभावित होंगे, क्योंकि शुल्क वृद्धि से निकासी लागत बढ़ जाएगी।अधिसूचना के मुताबिक, एक मई से ग्राहकों को मुफ्त निकासी सीमा के बाद हर लेनदेन के लिए दो रुपये अतिरिक्त देने होंगे। यानी हर नकद निकासी पर 21 रुपये की जगह अब 23 रुपये शुल्क लगेगा। दरअसल, एटीएम से मुफ्त नकदी निकासी की एक सीमा तय है। मेट्रो शहरों में ग्राहक एक महीने में अपने बैंक के एटीएम से पांच बार और दूसरे बैंक के एटीएम से तीन बार बिना किसी शुल्क के पैसे निकाल सकते हैं। इसके बाद ग्राहकों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।

बचत और एफडी पर ब्याज दरों में संशोधन
कई बैंकों ने एक अप्रैल से ही बचत और एफडी खाते के ब्याज दरों में बदलाव करने की घोषणा की है। इसके मुताबिक, खाते में जमा राशि के आधार पर ब्याज दरों का निर्धारण किया जाएगा। यानी खाते में बड़ी राशि रखने वाले ग्राहकों को अधिक ब्याज दिया जा सकता है।

न्यूनतम बैलेंस के सख्त होंगे नियम
बैंकों में न्यूनतम बैलेंस के नियम और सख्त होने जा रहे हैं। एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा समेत कई बैंकों के ग्राहकों को एक अप्रैल से शहरी, अर्ध शहरी और ग्रामीण इलाकों के हिसाब से अपने बैंक खाते में न्यूनतम बैलेंस मेंटेन करना पड़ सकता है। ऐसा नहीं करने पर जुर्माना भरना पड़ेगा। जुर्माना राशि बैंक खाते की श्रेणी के हिसाब से अलग-अलग होगी। बैंक ग्राहकों को शहरी इलाकों में 5,000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 2,000 रुपये न्यूनतम बैलेंस रखना पड़ सकता है।

क्रेडिट कार्ड से जुड़े बेनेफिट में कटौती
एसबीआई कार्ड्स ने एक अप्रैल से कुछ लोकिप्रय क्रेडिट कार्ड पर रिवॉर्ड पॉइंट्स घटाने की घोषणा की है। सिंपली क्लिक एसबीआई कार्ड यूजर्स को स्विगी पर 10 गुना की जगह सिर्फ पांच गुना रिवॉर्ड पॉइंट मिलेंगे। एअर इंडिया एसबीआई प्लैटिनम क्रेडिट कार्ड पर पहले हर 100 रुपये खर्च करने पर 15 रिवॉर्ड पॉइंट मिलते थे, जो घटकर 5 रह जाएंगे। एअर इंडिया एसबीआई सिग्नेचर क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट 30 के बजाय सिर्फ 10 रह जाएंगे। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 31 मार्च, 2025 से क्लब विस्तारा क्रेडिट कार्ड के माइलस्टोन बेनेफिट बंद करने जा रहा है।

जीएसटी: पंजीकरण 30 दिन में
वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने व्यवसायों के लिए ई-इनवॉइसिंग प्रक्रिया में बदलाव किया है। एक अप्रैल, 2025 से, 10 करोड़ रुपये से अधिक और 100 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाले व्यवसायों को इनवॉइस जारी होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर इनवॉइस पंजीकरण पोर्टल पर ई-इनवॉइस अपलोड करना होगा। वर्तमान में यह 30 दिवसीय प्रतिबंध सिर्फ 100 करोड़ या उससे अधिक वाले व्यवसायों पर लागू होता है। अगर कोई ई-चालान 30 दिनों के भीतर अपलोड नहीं किया जाता है, तो इसे आईआरपी की ओर से स्वचालित रूप से खारिज कर दिया जाएगा।

4% तक हो जाएंगी महंगी कारें
मारुति से लेकर ह्यूंडई, टाटा, महिंद्रा समेत लगभग सभी कंपनियों ने एक अप्रैल से कारों की कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। इसकी प्रमुख वजह लागत में बढ़ोतरी है, जिसका कुछ भार कंपनियां अब ग्राहकों के कंधे पर डालना चाहती हैं। मारुति सुजुकी इंडिया सबसे ज्यादा चार फीसदी तक दाम बढ़ा सकती है।

देखें कौन-सी कंपनी कितना बढ़ाएगी दाम
कंपनी               कीमत वृद्धि
मारुति             4 फीसदी
ह्यूंडई               3 फीसदी
टाटा मोटर्स        3 फीसदी
महिंद्रा एंड महिंद्रा   3 फीसदी
किआ इंडिया      3 फीसदी
बीएमडब्ल्यू        3 फीसदी
रेनॉ इंडिया           2 फीसदी

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