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Tax: अधिक रिफंड के कारण शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 1.34 प्रतिशत घटकर 5.63 लाख करोड़ रुपये हुआ, आंकड़े जारी
Sat, 12 Jul 2025 01:17 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Sat, 12 Jul 2025 01:17 PM IST
सार
Direct Tax Collection: गैर-कॉर्पोरेट कर (जिसमें व्यक्ति, एचयूएफ और फर्म शामिल हैं) संग्रह 1 अप्रैल से 10 जून, 2025 के बीच 3.45 लाख करोड़ रुपये पर स्थिर रहा। प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) संग्रह 10 जुलाई तक 17,874 करोड़ रुपये रहा। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चालू वित्त वर्ष में 10 जुलाई तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 1.34 प्रतिशत घटकर लगभग 5.63 लाख करोड़ रुपये रह गया। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों में इसकी पुष्टि हुई। इस दौरान शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 3.67 प्रतिशत घटकर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में 2.07 लाख करोड़ रुपये था।
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गैर-कॉर्पोरेट कर (जिसमें व्यक्ति, एचयूएफ और फर्म शामिल हैं) संग्रह 1 अप्रैल से 10 जून, 2025 के बीच 3.45 लाख करोड़ रुपये पर स्थिर रहा। प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) संग्रह 10 जुलाई तक 17,874 करोड़ रुपये था।
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कुल शुद्ध संग्रह 5.63 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 5.70 लाख करोड़ रुपये से 1.34 प्रतिशत कम है। इस वित्त वर्ष में अब तक जारी किए गए शुद्ध रिफंड 38 प्रतिशत बढ़कर 1.02 लाख करोड़ रुपये हो गए। 1 अप्रैल से 10 जुलाई तक सकल संग्रह (रिफंड से पहले) 6.65 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 6.44 लाख करोड़ रुपये से 3.17 प्रतिशत अधिक है।
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सकल कॉर्पोरेट कर संग्रह 9.42 प्रतिशत बढ़कर लगभग 2.90 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि सकल गैर-कॉर्पोरेट कर संग्रह 1.28 प्रतिशत घटकर 3.57 लाख करोड़ रुपये रह गया। शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर गौरी पुरी ने कहा कि शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में गिरावट मुख्य रूप से संसाधित कर रिफंड की मात्रा में वृद्धि के कारण है।
पुरी ने कहा, "यह करदाता सेवाओं में सुधार पर सरकार के फोकस को दर्शाता है, क्योंकि समय पर और कुशल रिफंड प्रसंस्करण व्यापार को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।"
ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर समीर कनाबर ने कहा कि हालांकि शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में गिरावट मुख्य रूप से इस वर्ष जारी किए गए रिफंड में वृद्धि के कारण है, लेकिन प्रत्यक्ष करों में समग्र गिरावट को दो प्रमुख कारकों द्वारा समझाया जा सकता है।
व्यक्तिगत कर के मोर्चे पर, संशोधित स्लैब संरचना करदाताओं के एक बड़े आधार को राहत प्रदान करती रहेगी, जिसके परिणामस्वरूप कर देयता कम हो जाएगी। कॉर्पोरेट पक्ष में, उच्च पूंजीगत व्यय के कारण मूल्यह्रास दावों में वृद्धि हुई है, जिससे तत्काल कर बहिर्वाह प्रभावित हुआ है।
कनाबर ने कहा, "शीघ्र रिफंड से लेकर कर राहत और पूंजीगत व्यय प्रोत्साहन तक के ये उपाय आर्थिक गतिविधि को प्रोत्साहित करने और दीर्घकालिक विकास को समर्थन देने के व्यापक उद्देश्य से जुड़े हैं।"
चालू वित्त वर्ष में, सरकार ने प्रत्यक्ष कर संग्रह 25.20 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल की तुलना में 12.7 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने 10 जुलाई तक अपने प्रत्यक्ष कर लक्ष्य का 22.34 प्रतिशत संग्रह कर लिया है। सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 में एसटीटी से 78,000 करोड़ रुपये एकत्र करना है।