Go First: एनसीएलटी ने गो फर्स्ट के समाधान पेशेवर को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में मांगा जवाब, ये है मामला
Go First: राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने गुरुवार को नकदी संकट से जूझ रही गो फर्स्ट को लॉजिस्टिक्स कंपनी डेल्हीवरी के साथ विवाद मामले में नोटिस जारी किया। गो फर्स्ट के समाधान पेशेवर को नोटिस का जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
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विमान पट्टेदार डीएई (एसवाई 22) ने एनसीएलटी में एक आवेदन दायर कर कहा है कि गो फर्स्ट की ओर से स्वैच्छिक दिवाला प्रक्रिया शुरू करना दुर्भावनापूर्ण और धोखाधड़ी भरा है। एनसीएलटी ने नोटिस जारी कर गो फर्स्ट आरपी (रेजोल्यूशन प्रोफेशन) को इस मामले में जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। यह मामला लॉजिस्टिक्स कंपनी डेल्हीवरी के साथ विवाद से जुड़ा है।
ये है पूरा मामला
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने गुरुवार को नकदी संकट से जूझ रही गो फर्स्ट को लॉजिस्टिक्स कंपनी डेल्हीवरी के साथ विवाद मामले में नोटिस जारी किया। गो फर्स्ट के समाधान पेशेवर को नोटिस का जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। एयरलाइन ने इससे पहले एनसीएलटी को सूचित किया था कि वह लॉजिस्टिक्स कंपनी डेल्हीवेरी के साथ अपना विवाद सुलझा रही है। पीटीआई के अनुसार नकदी संकट से जूझ रही एयरलाइन के आरपी का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील ने कहा, 'हम लॉजिस्टिक्स कंपनी डेल्हीवेरी के साथ सेटलमेंट की कोशिश कर रहे हैं। हम इससे अवगत हैं। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।"
दिवालियान की प्रक्रिया शुरू करना धाेखाधड़ी से प्रेरित और दुर्भावनापूर्णः डेल्हीवरी
दिवालिया न्यायाधिकरण की ओर से विवाद के समाधान के संबंध में किसी समय सीमा के बारे में पूछे जाने पर विमानन कंपनी के अधिवक्ता ने कहा, "निपटान के लिए कोई भी तारीख दे दीजिए।" इसके बाद एनसीएलटी ने मामले को अगली सुनवाई के लिए अगस्त के तीसरे सप्ताह के लिए टाल दिया। डेल्हीवरी ने एनसीएलटी का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि विमानन कंपनी की ओर से सीआईआरपी की शुरुआत धोखाधड़ी से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण थी।
उसने कहा था कि एयरलाइन को घरेलू कार्गो खेप सेवाएं प्रदान करने के लिए रसद कंपनी की ओर से 1.58 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई। दोनों कंपनियों के बीच 2020 में किए गए समझौते जिसे अगस्त 2022 में नवीनीकृत किया गया था की शर्तों के अनुसार धन का भुगतान किया गया था।
डेल्हीवेरी के अनुसार, गो फर्स्ट ने 2 मई को भी 57 लाख रुपये लिए, जिस दिन उसने दिवालियापन के लिए आवेदन किया था। उन्होंने यह जानते हुए पैसे लिए कि वे भविष्य में भी सेवाएं प्रदान करने में सक्षम नहीं होंगे। अपनी स्वयं की स्वीकारोक्ति में गो फर्स्ट ने बताया था कि उसके पास परिचालन योग्य बेड़ा नहीं है। एनसीएलटी ने आपूर्ति शृंखला कंपनी की याचिका पर आठ जून को गो फर्स्ट के अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) को नोटिस जारी किया था। एनसीएलटी ने 10 मई को स्वैच्छिक दिवाला समाधान कार्यवाही शुरू करने के लिए गो फर्स्ट की याचिका स्वीकार कर ली थी।