फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   National Medical Commission said No institute meets the standards of 50 Percent attendance

NMC: कोई भी संस्थान 50% उपस्थिति के मानकों पर खरा नहीं, आयोग ने कहा- ज्यादातर मेडिकल कॉलेजों में कागजी शिक्षक

Mon, 02 Oct 2023 05:51 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Mon, 02 Oct 2023 05:51 AM IST
सार

एनएमसी ने पाया कि कोई भी नियमित तौर पर आपातकालीन विभाग नहीं जाता, क्योंकि आपातकालीन चिकित्सा विभाग में आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी को छोड़कर कोई भी बातचीत के लिए होता ही नहीं है।

विज्ञापन
National Medical Commission said No institute meets the standards of 50 Percent attendance
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) - फोटो : NMC

विस्तार

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) का कहना है कि वर्ष 2022-23 में मूल्यांकन के दौरान ज्यादातर मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी और सीनियर रेजिडेंट सिर्फ कागजों पर ही पाए गए हैं। यही नहीं, कोई भी संस्थान 50 फीसदी न्यूनतम उपस्थिति के मानक पर खरा नहीं उतरा है।

विज्ञापन

एनएमसी ने पाया कि कोई भी नियमित तौर पर आपातकालीन विभाग नहीं जाता, क्योंकि आपातकालीन चिकित्सा विभाग में आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी को छोड़कर कोई भी बातचीत के लिए होता ही नहीं है। एनएमसी के अंडर-ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड का कहना है कि आपातकालीन चिकित्सा विभाग में पोस्टिंग को छात्रों के लिए एक ब्रेक पीरियड माना जाता है। एनएमसी ने ये सारी बातें एसोसिएशन ऑफ इमरजेंसी फिजिशियन ऑफ इंडिया की शिकायत के जवाब में कहीं, जिसने आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञता को नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की एक अनिवार्य शर्त से बाहर करने पर नाराजगी जताई है। एनएमसी ने हाल में अधिसूचित विनियमन में यह शर्त हटा दी है, जबकि स्नातक कोर्स के लिए नए कॉलेजों के अनुमोदन के लिए आपातकालीन चिकित्सा समेत 14 विभागों का होना जरूरी था।  

विज्ञापन


मान्यता के लिए किया गया था मूल्यांकन
बोर्ड ने बताया कि यह मूल्यांकन कुल मिलाकर 27 राज्यों में 246 स्नातक मेडिकल कॉलेजों को शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए मान्यता देने या मान्यता जारी रखने के लिए किया गया था। आयोग के मुताबिक, इस दौरान यह बात भी सामने आई कि विभिन्न खामियों पर ध्यान आकृष्ट करने और उन्हें दूर करने के लिए आगाह किए जाने के बावजूद कोई भी संस्थान पर्याप्त समय मिलने के बावजूद 50 प्रतिशत उपस्थिति के मानक को पूरा नहीं करता है। यही नहीं शून्य उपस्थिति की समस्या अभी बरकरार है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कागजों पर दिखाई गई सूरत एकदम अलग
यूजीएमईबी ने एईपीआई को 22 सितंबर को भेजे जवाब में कहा है कि आपातकालीन चिकित्सा विभागों की वास्तविक स्थिति कागजों पर दिखाई गई तस्वीर से एकदम भिन्न है। आयोग के मुताबिक, एमएसआर यानी न्यूनतम मानक आवश्यकता, 2020 की बात करें तो कॉलेजों में आधार आधारित बायोमेट्रिक हाजिरी की जांच करते समय यह देखकर बेहद हैरानी हुई कि फैकल्टी और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्ति के मामले में शत-प्रतिशत सभी संस्थान नाकाम रहे हैं। अधिकांश संस्थानों ने इसके नाम पर सिर्फ काजगी खानापूरी ही की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed