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हड़ताल: बेस्ट से अनुबंधित निजी बस कर्मियों ने की स्थायी नौकरी की मांग, बोले- समान काम के लिए समान सैलरी मिले
Mon, 07 Aug 2023 06:47 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 07 Aug 2023 06:47 PM IST
सार
Best Employees Strike: वेट लीज वाले बस कर्मचारियों के नवगठित समूह के समन्वयक विकास खरमाले ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'पिछले छह दिनों से बेस्ट के साथ सभी निजी बस ऑपरेटरों के करीब 7000 से 9000 कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी।
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बेस्ट बस मुंबई।
- फोटो : Wiki Commons
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विस्तार
बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति व परिवहन (बेस्ट) उपक्रम से अनुबंधित निजी बस ऑपरेटरों के प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के एक समूह ने सोमवार को निगम में स्थायी नौकरी की मांग की। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि जिन्हें स्थायी रूप से नहीं रखा जा सकता, उन्हें अनुबंध पर लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे "समान काम" के कारण बेस्ट कर्मचारियों के रूप में 'समान पारिश्रमिक' चाहते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उनकी मांग को पूरा करेंगे।
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वेट लीज वाले बस कर्मचारियों के नवगठित समूह के समन्वयक विकास खरमाले ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'पिछले छह दिनों से बेस्ट के साथ सभी निजी बस ऑपरेटरों के करीब 7000 से 9000 कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी। निजी बस ऑपरेटर डागा ग्रुप के कर्मचारी खरमाले ने दावा किया कि ऐसे कर्मचारी पिछले चार साल से परेशान हैं और हड़ताल उनके मन में इस अशांति का परिणाम है।
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खरमाले ने कहा कि वे बेस्ट प्रशासन के साथ बातचीत नहीं करेंगे, लेकिन राज्य सरकार के साथ सीधी बातचीत की मांग करेंगे, और अगर बातचीत की पेशकश आती है तो इसके लिए 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया गया है। यह पूछे जाने पर कि इन निजी बस ऑपरेटरों ने नए ड्राइवरों की नियुक्ति शुरू कर दी है, खरमाले ने कहा कि उनका "स्वागत" किया जाएगा।
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निजी बस ऑपरेटर मातेश्वरी के एक कर्मचारी नितिन कांबले ने कहा कि कंडक्टरों को वेतन के रूप में प्रति माह सिर्फ 12,500 रुपये मिल रहे हैं, जो बहुत कम और जीवित रहने के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी बस ऑपरेटरों ने बेस्ट के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को काम पर रखा है जो उनके जैसे लोगों के साथ हिंसक व्यवहार करते हैं। डागा समूह के कर्मचारी परेश टेमगिरे ने कहा कि एक ड्राइवर के रूप में उन्हें प्रति माह 22,500 रुपये का वेतन देने का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें सिर्फ 17,000 रुपये मिलते हैं, जो मुंबई जैसे शहर में जीविनयापन के लिहाज से अपर्याप्त है।