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MSCS: मानसून सत्र के दौरान एमएससीएस कानून में संशोधन से जुड़ा विधेयक होगा पेश, सहकारिता मंत्री ने कही ये बात
Sat, 01 Jul 2023 06:28 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Sat, 01 Jul 2023 06:28 PM IST
सार
MSCS: सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर यहां 17वीं भारतीय सहकारी कांग्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) के लिए मॉडल उप-कानूनों के मसौदे को अपनाया है, जिसका मतलब है कि सितंबर से देश के एक बड़े हिस्से में एक समान उप-कानून होंगे।
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अमित शाह
- फोटो : ANI
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विस्तार
20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में कारोबारी सुगमता लाने के लिए बहुराज्यीय सहकारी समितियों (एमएससीएस) से संबंधित कानून में संशोधन करने वाला एक विधेयक लाया जाएगा।केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को यह जानकारी दी।
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सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर यहां 17वीं भारतीय सहकारी कांग्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) के लिए मॉडल उप-कानूनों के मसौदे को अपनाया है, जिसका मतलब है कि सितंबर से देश के एक बड़े हिस्से में एक समान उप-कानून होंगे।
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उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक नया सहकारी कानून बनाना चाहती है जो अगले 25 वर्षों में इस क्षेत्र के विस्तार में मदद करेगा। सरकार एक सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित करने की भी योजना बना रही है जिसके लिए अंतर-मंत्रालयी चर्चा शुरू की गई है।
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मंत्री ने कहा, "6 जुलाई 2021 को एक अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारी समितियों के क्षेत्र में कई बदलाव संभव हो गए हैं, और भविष्य में भी बदलाव होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सबसे पहले संवैधानिक ढांचे के भीतर सरकार ने राज्यों और केंद्र के अधिकारों से छेड़छाड़ किए बिना सहकारी कानून में एकरूपता लाने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा, ''(प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी जी की पहल से बहुराज्यीय सहकारी समिति अधिनियम में संशोधन का काम संसदीय समिति ने आम सहमति से किया है। यह कानून इसी सत्र में आने वाला है।" 2022 के संशोधन विधेयक में संविधान के कुछ प्रावधानों के अनुरूप संशोधन करने और सहकारी समितियों के कामकाज और शासन की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की गई है।