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Report: भारत के ज्यादातर वरिष्ठ नागरिक रिटायरमेंट के बाद करना चाहते हैं काम, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

Wed, 01 Oct 2025 05:10 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Wed, 01 Oct 2025 05:10 PM IST
सार

एजवेल फाउंडेशन की रिपोर्ट में पता चला कि भारत के वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा कई कमजोर वित्तीय व्यवस्थाओं पर टिकी हुई है। 73 प्रतिशत से अधिक वरिष्ठ नागरिकों ने सेवानिवृत्ति के बाद के करियर में रुचि व्यक्त की, न केवल पैसे के लिए बल्कि सम्मान, स्वतंत्रता और सक्रिय रहने के लिए भी।

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Most senior citizens in India want to work after retirement, a major revelation in the report
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock

विस्तार

भारत में केवल 23.1 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिक रिटायरमेंट के बाद किसी तरह के काम में लगे हुए हैं। वहीं, 73 प्रतिशत से अधिक वरिष्ठों ने बाद के जीवन में करियर जारी रखने की इच्छा जताई। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर एजवेल फाउंडेशन द्वारा किए गए अध्ययन में कही गई है। 

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वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा की स्थिति

भारत के वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा कई कमजोर वित्तीय व्यवस्थाओं पर टिकी हुई है। 35.6 प्रतिशत लोग सरकारी पेंशन पर निर्भर हैं, 19 प्रतिशत पुराने उम्र के पेंशन पर, 16.6 प्रतिशत अपनी बचत पर, और 14.2 प्रतिशत परिवार के समर्थन पर निर्भर हैं। वहीं, लगभग एक में से एक वरिष्ठ नागरिक के पास कोई नियमित आय नहीं है, जो उनकी वित्तीय असुरक्षा को उजागर करता है।

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73% से अधिक वरिष्ठों ने रिटायरमेंट के बाद करियर में रुचि व्यक्त की

अध्ययन में पाया गया कि यह बात तर्कसंगत है कि बुजुर्ग लोग अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी अपनी आय में वृद्धि करना चाहते होंगे। 73 प्रतिशत से अधिक वरिष्ठ नागरिकों ने सेवानिवृत्ति के बाद के करियर में रुचि व्यक्त की, न केवल पैसे के लिए बल्कि सम्मान, स्वतंत्रता और सक्रिय रहने के लिए भी। सितंबर में 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के 10,000 उत्तरदाताओं के साथ किए गए अध्ययन में पाया गया कि केवल 23.1 प्रतिशत वृद्ध लोग ही वर्तमान में सेवानिवृत्ति के बाद के काम में लगे हुए हैं।


सर्वेक्षण से पता चला है कि वरिष्ठ नागरिक संरचित रोजगार के अवसरों (69.8 प्रतिशत) को पसंद करते हैं। हालांकि स्वयंसेवा (30.7 प्रतिशत) और कृषि (22.7 प्रतिशत) भी आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। लगभग 41.8 प्रतिशत लोग लंबी उम्र के लिए सेवानिवृत्ति के बाद काम को जरूरी मानते हैं।

वरिष्ठों के सामने कई चुनौतियां

इच्छुक लेकिन बेरोजगार लोगों में से 80.3 प्रतिशत ने अवसरों की कमी का हवाला दिया, 61.9 प्रतिशत डिजिटल निरक्षरता से जूझ रहे थे, और 57.9 प्रतिशत को आवागमन की समस्याओं का सामना करना पड़ा। SACRED पोर्टल जैसी सरकारी पहलों के बारे में जागरूकता नगण्य, यानी मात्र 3.3 प्रतिशत पाई गई।

अध्ययन में पारिवारिक रिश्तों में आई दरार पर भी प्रकाश डाला गया है। केवल 12.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि वे युवा सदस्यों के साथ रोजाना संवाद करते हैं, जबकि लगभग दो-तिहाई ने खुद को उपेक्षित महसूस किया। 59 प्रतिशत ने कहा कि भावनात्मक दूरी ही उन्हें आर्थिक आजादी पाने के लिए प्रेरित कर रही है।

वरिष्ठ नागरिकों ने वित्तीय संघर्ष (54.6 प्रतिशत), परिवारों में संवाद की कमी (44.9 प्रतिशत) और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं (34.7 प्रतिशत) को वृद्धावस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों के रूप में पहचाना।

कई लोगों ने यह भी देखा कि 70 और 80 की उम्र के लोग सक्रिय रूप से काम की तलाश में हैं, जिससे सामाजिक सुरक्षा में लचीलापन और प्रणालीगत अंतराल दोनों पर ही जोर दिया गया। इन बाधाओं के बावजूद, 87.5 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिक इस बात पर पूरी तरह सहमत थे कि सक्रिय रहने से उन्हें उद्देश्य की भावना मिलती है। अधिकांश लोगों के लिए, सार्थक जुड़ाव सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि स्वतंत्रता (78.4 प्रतिशत), गरिमा (76.6 प्रतिशत) और आत्म-सम्मान से भी परिभाषित होता है।

सेवानिवृत्ति को निर्भरता से सशक्तिकरण में बदलने पर जोर

एजवेल फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष हिमांशु रथ ने कहा कि भारत के बुजुर्ग न केवल वित्तीय स्थिरता, बल्कि गरिमा, सम्मान और उद्देश्य की भी आकांक्षा रखते हैं। नीति, कॉर्पोरेट नवाचार और पारिवारिक सहयोग के माध्यम से इस क्षमता को विकसित करने से सेवानिवृत्ति को निर्भरता से सशक्तिकरण में बदला जा सकता है।

फाउंडेशन ने नीति निर्माताओं से वरिष्ठ नागरिकों के लिए संरचित नौकरियां बनाने, कॉर्पोरेट कंपनियों को वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल भूमिकाएं तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करने और डिजिटल साक्षरता पहलों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। इसने नागरिक समाज से स्वयंसेवी नेटवर्क को मजबूत करने और परिवारों से घर पर सम्मान और स्वायत्तता को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया।

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