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IMF-Pak Deal: आईएमएफ समझौते के बाद पाकिस्तान के आम आदमी पर टैक्स का भार बढ़ने का खतरा, समझें पूरा मामला
Thu, 27 Mar 2025 01:05 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Thu, 27 Mar 2025 01:05 PM IST
सार
IMF-Pak Deal: बुधवार को आईएमएफ के साथ स्टाफ-स्तरीय समझौते (एसएलए) के तहत, ऋणदाता ने पाकिस्तान को पहले से स्वीकृत 7 बिलियन डॉलर के ऋण के तहत लगभग 1 बिलियन डॉलर की दूसरी किश्त जारी करने पर भी सहमति व्यक्त की है। हालांकि, इस समझौते से देश के लोगों पर अधिक टैक्स का भार बढ़ने की आशंका है। पड़ोसी देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी यह अहम खबर पढ़कर जानें वहां का हाल।
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आईएमएफ और शहबाज शरीफ
- फोटो : ANI
विस्तार
आईएमएफ के साथ जलवायु परिवर्तन से जुड़ा एक समझौता होने के बाद पाकिस्तान में आम आदमी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जानकारों का मानना है कि समझौते के शर्तों के तहत देश के लोगों पर करों का दबाव बढ़ सकता है। उनका कहना है कि पाकिस्तान के लोगों को और अधिक करों के लिए तैयार रहना चाहिए। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ पाकिस्तान ने 1.3 अरब डॉलर का नया समझौता किया है। इससे आम आदमी पर सरकार की ओर से कार्बन शुल्क लगाने की आशंक बढ़ गई है।
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बुधवार को आईएमएफ के साथ स्टाफ-स्तरीय समझौते (एसएलए) के तहत, ऋणदाता ने पाकिस्तान को पहले से स्वीकृत 7 बिलियन डॉलर के ऋण के तहत लगभग 1 बिलियन डॉलर की दूसरी किश्त जारी करने पर भी सहमति व्यक्त की है।
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आईएमएफ ने एक बयान में कहा, "आईएमएफ की टीम विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) के तहत 37 महीने की विस्तारित व्यवस्था की पहली समीक्षा और आईएमएफ की लचीलापन और स्थिरता सुविधा (आरएसएफ) के तहत 28 महीने की नई व्यवस्था पर पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ एसएलए पर पहुंच गई है, जिसमें 28 महीनों में कुल 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की पहुंच है।"
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नवीनतम आरएसएफ व्यवस्था के साथ, आईएमएफ ऋण की संयुक्त मात्रा लगभग 8.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ जाती है और आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड द्वारा अनुमोदन के साथ, देश को लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक तत्काल पहुंच प्राप्त होगी। इससे देश के भुगतान संतुलन को मजबूत करने में मदद करेगी।
लेकिन डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, ऋणदाता की यह उदारता पहले से ही कर के बोझ से दबी जनता के लिए एक चुनौती होगी। इसका कारण बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार ने एक नया कार्बन शुल्क लागू करने, पानी की कीमतें बढ़ाने और ऑटोमोबाइल क्षेत्र को वैश्विक व्यापार के लिए खोलने पर सहमति दी है। अगर ऐसा होता है तो आम लोगों को अधिक टैक्स चुकाना पड़ेगा।
आम लोगों के लिए एकमात्र अच्छी बात यह है कि बिजली की दरों में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, यह मुफ्त नहीं होगी क्योंकि इस कोष ने सरकार को पहले से लागू पेट्रोलियम शुल्क को बिजली दरों को कम करने के लिए उपयोग करने की अनुमति दे दी है। आर्थिक व वित्तीय नीति ज्ञापन (एमईएफपी) से संबंधित एसएलए से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने अखबार को बताया कि प्रधानमंत्री कुछ ही दिनों में औसत बिजली दरों में लगभग 7 रुपये प्रति यूनिट की कटौती की घोषणा करेंगे, लेकिन यह कटौती 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगी।
अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों और कोयले सहित सभी हाइड्रोकार्बन पर कार्बन लेवी लगाने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसकी शुरुआत 3-5 रुपये प्रति लीटर या इसके बराबर होगी। इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। राजस्व को जलवायु से जुड़े विशिष्ट खर्चों पर खर्च किया जाएगा।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए औसत व्यापार शुल्क (जैसे सीमा शुल्क) भी अब से वित्त वर्ष 2030 तक लगभग 10.5 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया जाएगा। आईएमएफ और अधिकारी दोनों इस बात पर सहमत थे कि ऑटो क्षेत्र ने बहुत लंबे समय तक बहुत अधिक संरक्षण का फायदा उठाया है, और अब इसे समाप्त किया जाना चाहिए।
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