बजट: विकसित भारत के लिए इन्फ्रा पर जोर, आम आदमी को महंगाई से राहत और बेरोजगारी से निपटने के लिए घोषणाएं संभव
अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली का कहना है कि सरकार 5.1 फीसदी के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगी। कोशिश रहेगी कि इसे पांच फीसदी से नीचे लाया जाए। इसके बावजूद बेरोजगारी के लिहाज से बुनियादी ढांचे पर खर्च जारी रहेगा।
विस्तार
मोदी 3.0 का पहला बजट इंटरवल के बाद की वह पिक्चर साबित हो सकती है, जिसकी पटकथा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के इर्द-गिर्द लिखी जा सकती है। इस लक्ष्य को पाने के लिए राजकोषीय मोर्चे पर मुस्तैदी के बावजूद सरकार बुनियादी ढांचे (इन्फ्रा) पर खर्च जारी रखेगी। यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे बेरोजगारी, मध्य वर्ग की कमाई, ग्रामीण खपत और निजी निवेश जैसी कई समस्याओं का एकसाथ समाधान संभव है।
5.1% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगी सरकार
अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली का कहना है कि सरकार 5.1 फीसदी के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगी। कोशिश रहेगी कि इसे पांच फीसदी से नीचे लाया जाए। इसके बावजूद बेरोजगारी के लिहाज से बुनियादी ढांचे पर खर्च जारी रहेगा। उनका मानना है कि अगर राजकोषीय घाटे को थोड़ा अनदेखा कर सरकार कोई ऐसी योजना लाती हैं, जिससे बेरोजगारी का जल्द निस्तारण हो जाए तो कोई हर्ज नहीं हैं, क्योंकि कर संग्रह के मोर्चे पर स्थिति अच्छी है।
- प्रत्यक्ष कर संग्रह में 20 फीसदी से अधिक की तेजी दिख रही है।
- अप्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर सरकार को जीएसटी से हर महीने औसतन 1.75 लाख करोड़ रुपये की कमाई हो रही है।
जहां तक मध्य वर्ग की बात है, तो इस चुनाव ने मोदी सरकार को आभास कराया है कि यह तबका थोड़ा नाखुश है। राजनीतिक कारकों के अलावा इसकी अन्य वजहें भी हैं, जिनमें महंगाई के कारण किचन का बजट बिगड़ना, बचत कम होना, देनदारियां बढ़ना और नौकरियों का संकट शामिल हैं। ऐसे में मध्य वर्ग को साधने के लिए वित्त मंत्री अप्रत्यक्ष रूप से थोड़ी रियायत दे सकती हैं। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में कुछ बदलाव व सुधार की संभावना है। पेंशन योजनाओं के मामले में भी राहत मिल सकती है क्योंकि इस पर राज्यों के स्तर पर काफी चर्चा हुई है।