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रिपोर्ट: मोबाइल मनी से अर्थव्यवस्था ने ली करवट, भारत के नेतृत्व में बढ़ा वैश्विक वित्तीय समावेशन

Fri, 18 Jul 2025 07:46 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 18 Jul 2025 07:46 AM IST
सार

विश्व बैंक की ग्लोबल फिनडेक्स-2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत डिजिटल वित्तीय बदलाव में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि विकासशील देशों में अब हर 10 में से 1 वयस्क मोबाइल मनी खाते से बचत कर रहा है, जो 2021 की तुलना में 5% अंक की वृद्धि है।

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Mobile money transformed the economy, global financial inclusion increased under the leadership of India
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : adobe stock

विस्तार

विश्व बैंक की नई ग्लोबल फिनडेक्स-2025 रिपोर्ट ने डिजिटल वित्तीय बदलाव की नई तस्वीर पेश की है, जिसमें भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट बताती है कि विकासशील देशों में पहले से कहीं अधिक लोग अब मोबाइल मनी खातों के जरिये बचत कर रहे हैं और भारत जैसे देश इस वैश्विक ट्रेंड में मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं।
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रिपोर्ट बताती है कि निम्न और मध्य आय वाले देशों में अब हर 10 में से एक वयस्क मोबाइल मनी खाते के जरिये बचत कर रहा है। यह 2021 की तुलना में पांच फीसद अंक की बढ़ोतरी है। विकासशील देशों में 40 फीसदी वयस्क किसी न किसी वित्तीय खाते में बचत कर रहे हैं, जो 2021 से 16 फीसदी अंक का उछाल है। यह बीते दशक में सबसे तेज वृद्धि है। इस परिवर्तन के केंद्र में डिजिटल तकनीक और मोबाइल फोन क्रांति है। मोबाइल मनी और त्वरित भुगतान प्रणाली ने वंचित वर्गों को भी औपचारिक वित्तीय ढांचे से जोड़ा है, जिससे उनकी बचत बढ़ी है और राष्ट्रीय आर्थिक प्रणालियां भी सशक्त हुई हैं।
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परिवर्तन में भारत बना रोल मॉडल
भारत का योगदान इस वैश्विक परिवर्तन में निर्णायक रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया में खाता स्वामित्व 80 फीसदी है, लेकिन यह औसत भारत के दम पर है, जहां 90 फीसदी वयस्कों के पास खाता है और 65 फीसदी के पास मोबाइल फोन। भारत की यूपीआई जैसी नवाचारी भुगतान प्रणालियों ने न सिर्फ लेनदेन को सहज बनाया, बल्कि उपभोक्ता विश्वास और सुरक्षा भी बढ़ाया। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा का कहना है कि डिजिटल फाइनेंस के जरिये भारत जैसे देश दिखा रहे हैं कि वित्तीय समावेशन से न सिर्फ जीवन सुधरता है, बल्कि अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलती है।

महिलाएं बनीं बदलाव की वाहक
रिपोर्ट में महिलाओं का खाता खोलने में भारी उछाल को वास्तविक प्रगति बताया गया है। 2011 में विकासशील देशों में सिर्फ 37 फीसदी महिलाओं के पास खाता था, जो 2024 में 73 फीसदी पहुंच गया। वैश्विक स्तर 77 फीसदी महिलाओं के पास खाता है। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के चेयरमैन बिल गेट्स ने इस प्रगति को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, महिलाएं वित्तीय स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा के लिए सक्षम हो रही हैं। यह सच्ची तरक्की है।


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डिजिटल युग की नई जिम्मेदारियां
रिपोर्ट में पहली बार मोबाइल और इंटरनेट उपयोग के आंकड़े भी शामिल किए गए हैं। 86 फीसदी वयस्कों के पास मोबाइल फोन है, जिनमें से 68 फीसदी स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं। सरकारी भुगतान और मजदूरी अब अधिकांश सीधे खातों में भेजी जा रही हैं, जिससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की आशंका भी घटी है। रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि विकासशील देशों में आधे से कम लोग अपने फोन को पासवर्ड से सुरक्षित करते हैं, जिससे साइबर चुनौतियां बढ़ती हैं।

वैश्विक वित्तीय क्षेत्र में डिजिटल क्रांति का असर
उप-सहारा अफ्रीका में मोबाइल मनी उपयोग ने खाता स्वामित्व को 58 फीसदी तक पहुंचा दिया। पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र स्मार्टफोन उपयोग (86 फीसदी) और खाता स्वामित्व (83 फीसदी) में सबसे आगे हैं। इसी तरह, यूरोप और मध्य एशिया में 94 फीसदी से अधिक वयस्कों के पास मोबाइल एवं सबसे अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। लैटिन अमेरिका व कैरेबियाई देशों में 70 फीसदी वयस्कों के पास खाता है और 50 फीसदी डिजिटल लेनदेन में शामिल हैं। मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में खाता स्वामित्व 45 फीसदी से बढ़कर 53 फीसदी हो गया, जिसे औपचारिक बचत में उल्लेखनीय वृद्धि कहा जा सकता है।
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