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2019 चुनाव से पहले किसानों को लुभाने के लिए सरकार 200 रुपये बढ़ा सकती है धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य

Mon, 02 Jul 2018 11:37 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Mon, 02 Jul 2018 11:37 AM IST
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Minimum support price of paddy can be increased by Rs 200
धान
सरकार 2019 के आम चुनाव से पहले किसानों को लुभाने के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार 2018-19 फसल वर्ष (जुलाई-जून) के लिए प्रमुख खरीफ फसल धान के एमएसपी को 13 फीसदी बढ़ाकर 1,750 रुपये प्रति क्विंटल कर सकती है। देश में गर्मियों में बोए जाने वाले फसलों को खरीफ फसल कहा जाता है। उन्होंने कहा कि अन्य 13 खरीफ फसलों के एमएसपी में भी भारी वृद्धि की जा सकती है।
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इस मामले में इसी सप्ताह फैसला लिया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह कहा था कि मंत्रिमंडल आगामी बैठक में एमएसपी को बढ़ाकर उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना करने की मंजूरी देगा। सूत्रों के मुताबिक 2018-19 फसल वर्ष के लिए कॉमन ग्रेड धान के एमएसपी में प्रति क्विंटल करीब 200 रुपये बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव है। 
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चालू फसल वर्ष के लिए धान का एमएसपी कॉमन ग्रेड के लिए 1,550 रुपये प्रति क्विंटल और ए ग्रेड किस्म के लिए 1,590 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। आम तौर पर बुआई शुरू होने से ठीक पहले एमएसपी की घोषणा की जाती है। खरीफ फसलों की बुआई दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू होती है और कटाई अक्तूबर से शुरू होती है।
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खरीफ फसलों की बुआई शुरू हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने खरीफ फसलों के एमएसपी की घोषणा में इसलिए देरी की है, क्योंकि वह राजकोष पर भारी बोझ को देखते हुए इतने बड़े राजनीति फैसले को लेने या न लेने पर मंथन कर रही है।

सूत्रों ने कहा कि बंपर उत्पादन के कारण अधिकतर फसलों की कीमत गिरने से किसानों के लिए बढ़ रही मुसीबत को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने सरकारी परामर्शदाता निकाय सीएसीपी की सिफारिश के मुकाबले अधिक कीमत दिए जाने का प्रस्ताव रखा है। इस साल के आम बजट में सरकार ने घोषणा की थी कि वह उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना समर्थन मूल्य निर्धारित करेगी। 2014 के आम चुनाव में यह भाजपा का चुनावी वादा था।


एमएसपी बढ़ाए जाने के विरोध में हैं विशेषज्ञ

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान के एमएसपी में बड़ी बढ़ोतरी करने से भारत का चावल उत्पादन और बढ़ सकता है, जो फसल वर्ष 2017-18 में 11.1 करोड़ टन के सर्वकालिक ऊपरी स्तर पर पहुंच चुका है और उत्पादन घरेलू मांग से काफी अधिक है। धान की खेती को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। चावल उत्पादन बढ़ने से सरकार की खरीद बढ़ेगी, जिससे खाद्य सब्सिडी खर्च भी बढ़ेगा।
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