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Aviation: भारत में यात्रियों की सुरक्षा से अधिक प्रचार पर खर्च कर रहीं एयरलाइन कंपनियां, सर्वे में हुआ खुलासा

Tue, 22 Jul 2025 11:14 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 22 Jul 2025 11:14 AM IST
सार

भारत की कई एयरलाइन कंपनियों यात्रियों की सुरक्षा की तुलना में प्रचार पर अधिक खर्च कर रही हैं। एक ऑनलाइन सर्वे की रिपोर्ट में दावा किया गया है। सर्वे रिपोर्ट में और क्या पता चला है, आइए जानते हैं।

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Many Indian airlines spend more on publicity than on passenger safety, reveals survey
भारतीय एयरलाइन - फोटो : celebiaviation.com

विस्तार

भारत में कई एयरलाइन यात्री सुरक्षा की तुलना में प्रचार पर अधिक खर्च कर रहे हैं। अखिल भारतीय ऑनलाइन सर्वेक्षण में लगभग 76 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने यह बात कही है। लोकलसर्किल्स की ओर से किए गए ऑनलाइन सर्वेक्षण से पता चला कि इनमें से 64 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार कठिन उड़ान का अनुभव किया था, जिसमें टेकऑफ, लैंडिंग या उड़ान के दौरान कठिन परिस्थिति शामिल थी।

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322 जिलों के लोगों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर निकाला गया निष्कर्ष

सर्वेक्षण में 322 जिलों के लोगों से 44,000 प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। यह सर्वेक्षण हाल ही में सामने आई हवाई और जमीनी घटनाओं के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण हो गया है। इनमें टाटा समूह की ओर से संचालित एयर इंडिया का बोइंग 787-8 विमान दुर्घटना भी शामिल है, जो पिछले महीने अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड के भीतर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें विमान में सवार 242 यात्रियों में से 241 की मौत हो गई थी, इसके अलावे 19 अन्य जमीन पर मारे गए थे।

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आए दिन विमानों में तकनीकी खराबी की खबर आ रही

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) दुर्घटना की जांच कर रहा है और उसने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पहले ही प्रस्तुत कर दी है। इसके अलावा, सोमवार को एयर इंडिया की कोच्चि-मुंबई उड़ान में सवार यात्री बाल-बाल बच गए, जब लैंडिंग के दौरान विमान रनवे से उतर गया, जिससे विमान को भारी नुकसान पहुंचा।

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गड़बड़ी के कारण कई विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ रही

उसी दिन, एयर इंडिया की एक अन्य उड़ान ने "तकनीकी खराबी" के कारण अंतिम समय में दिल्ली से कोलकाता के लिए उड़ान रद्द कर दी, जबकि गोवा से इंडिगो की उड़ान को "लैंडिंग गियर" संबंधी समस्या के कारण आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। इस बीच, गोवा-पुणे के बीच उड़ान भरने वाली स्पाइसजेट की एक उड़ान की बाहरी खिड़की का फ्रेम हवा में ही टूट गया, जिससे बॉम्बार्डियर क्यू400 विमान में सवार यात्रियों में दहशत फैल गई।

एयरलाइन कंपनियां प्रचार पर अधिक सुरक्षा पर कम खर्च कर रहीं

सर्वेक्षण में सबसे पहले हवाई यात्रियों से पूछा गया, "क्या आप मानते हैं कि भारत स्थित एयरलाइन्स कंपनियां सुरक्षा की तुलना में प्रचार पर अधिक खर्च कर रही हैं?" इस सवाल का जवाब देने वाले 26,696 लोगों में से 43 प्रतिशत ने कहा, "हां, सभी"; 33 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा, "हां, उनमें से कुछ"; 11 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा, "नहीं, उनमें से कोई नहीं"; विज्ञप्ति के अनुसार, एयरलाइन्स कंपनियां प्रचार पर अधिक और सुरक्षा पर कम ध्यान देती हैं; और 13 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया।

76% लोग बोले- एयरलाइंस का जोर प्रचार पर अधिक, सुरक्षा पर कम

रिपोर्ट के सारांश में कहा गया कि सर्वेक्षण में शामिल 76 प्रतिशत भारतीय एयरलाइन यात्रियों का मानना है कि कई एयरलाइन कंपनियां सुरक्षा की तुलना में प्रचार पर अधिक खर्च कर रही हैं।" सर्वेक्षण में भाग लेने वाले कुल उत्तरदाताओं में से 63 प्रतिशत पुरुष थे जबकि 37 प्रतिशत महिलाएं थीं। इसके अलावा, 46 प्रतिशत उत्तरदाता टियर 1 से थे, 25 प्रतिशत टियर 2 से थे, और शेष 29 प्रतिशत टियर 3, 4, 5 और ग्रामीण जिलों से थे। सर्वेक्षण में यात्रियों से यह भी पूछा गया, "पिछले तीन वर्षों में, भारत स्थित एयरलाइनों पर आपकी कितनी प्रतिशत उड़ानें (उड़ान भरना, उड़ान के दौरान या लैंडिंग) आप कठिन या दर्दनाक के रूप में वर्गीकृत करेंगे?" लोकल सर्किल्स के अनुसार, "इस प्रश्न का उत्तर देने वाले 17,630 लोगों में से 75 प्रतिशत ने 50 प्रतिशत से अधिक उड़ानों की बात कही; 6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने 40-50 प्रतिशत उड़ानों की बात कही, अन्य 6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने 30-40 प्रतिशत उड़ानों की बात कही, जबकि 9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने 10-20 प्रतिशत ऐसे उड़ानों की बात कही।"

64 प्रतिशत यात्रियों को उड़ान के दौरान दिक्कतों का करना पड़ा सामना

रिपोर्ट के अनुसार भारत में सर्वेक्षण किए गए 64 प्रतिशत एयरलाइन यात्रियों ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में उन्हें कम से कम एक या अधिक कठिन उड़ानों का सामना करना पड़ा है, जिसमें टेकऑफ, लैंडिंग या उड़ान के दौरान कठिन अनुभव शामिल है।"

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