Report: मखाना टॉप सुपरफूड के रूप में उभरा, बदलती पसंदों से फूड इंडस्ट्री के लिए नए अवसर
फार्मली की 'हेल्दी स्नैकिंग रिपोर्ट 2025' के अनुसार मखाना को 65% उपभोक्ताओं ने ने पहली पसंद के रूप में चुना है। वहीं 55 प्रतिशत से ज्यादा उपभोक्ता अब सक्रिय रूप से प्रिजर्वेटिव-मुक्त विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। उपभोक्ता अब सेहत पर केंद्रित, टिकाऊ और सुविधाजनक स्नैक विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
विस्तार
स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच भारतीय सुपरफूड मखाना ने उपभोक्ताओं के बीच खास जगह बना ली है। फार्मली की 'हेल्दी स्नैकिंग रिपोर्ट 2025' के अनुसार 65 प्रतिशत उपभोक्ता प्रतिभागियों ने मखाने को अपनी पहली पसंद बताया है।
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55 प्रतिशत उपभोक्ताओं को प्रिजर्वेटिव-मुक्त विकल्पों की तलाश
रिपोर्ट में हेल्थी स्नैक्स की ओर मजबूत बदालाव की भी चर्चा की गई है। 55 प्रतिशत से ज्यादा उपभोक्ता अब सक्रिय रूप से प्रिजर्वेटिव-मुक्त विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा, आधे से ज्यादा लगभग 52 प्रतिशत ऐसे स्नैक्स को प्राथमिकता देते हैं, जो दोबारा सील होने वाली, पर्यावरण- अनुकूल पैकेजिंग में आते हैं। यह पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
स्वादयुक्त सूखे मेवे का चलन
सर्वेक्षण के अनुसार उपभोक्ताओं के बीच सुविधा एक प्रमुख कारक बनी हुई है। लगभग 45 प्रतिशत अपभोक्ता बार और सूखे मेवे आधारित मिठाइयों जैसे चलते-फिरते नाशते को पसंद करते हैं। नमकीन विक्लपों में मखाना और स्वादयुक्त सूखे मेवे स्पष्ट रूप से पसंदीदा हैं। इससे बाजार में स्वस्थ नाश्ते के विकल्पों की एक नई लहर चल पड़ी है।
इन रुझानों से यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ता अब सेहत पर केंद्रित, टिकाऊ और सुविधाजनक स्नैक विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यह बदलाव उन ब्रांडों के लिए बड़े अवसर लेकर आ रहा है, जो बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं के अनुसार अपने उत्पाद पेश कर रहे हैं।
सुपर-स्नैक में परिवर्तन
रिपोर्ट के अनुसार, मखाना और स्वादयुक्त सूखे मेवे पसंदीदा विकल्प के रूप में उभरे हैं। 36 प्रतिशत उपभोक्ता उत्तरदाताओं ने भुने हुए और स्वादयुक्त सूखे मेवों को सबसे पसंदीदा नमकीन नाश्ते के रूप में पसंद किया। वहीं 19 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने विशेष रूप से मखाना को चुना, जो आधुनिक समय के सुपर-स्नैक में इस परिवर्तन को दर्शाता है।
मखाना बोर्ड का गठन
यह बढ़ती लोकप्रियता भारत सरकार द्वारा बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना की हाल की घोषणा के अनुरूप है। निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में मखाना बोर्ड का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य राज्य के प्रमुख मखाना उद्योग को बढ़ावा देना है।
चिप्स और वेफर्स की लोकप्रियता बरकरार
हालांकि नए प्रारूप लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन चिप्स और वेफर्स जैसे पारंपरिक विकल्प अभी भी बरकरार हैं। 14 प्रतिशत लोग इन्हें चुनते हैं, इसके बाद 10 प्रतिशत नमकीन और 9 प्रतिशत लोग खाखरा जैसे मल्टीग्रेन स्नैक्स चुनते हैं। मीठे स्नैक्स भी विकसित हो रहे हैं, जबकि चॉकलेट भारत में हमेशा से पसंदीदा रहा है,। मूंगफली का मक्खन, हेजलनट और पिस्ता जैसे मेवे अब स्वाद और स्वास्थ्य के मिश्रण के कारण पसंद किए जा रहे हैं।
ब्रांड लॉयल्टी में हो रहा बदलाव
ब्रांड लॉयल्टी, जो पहले पारंपरिक बड़ी कंपनियों तक सीमित थी, अब कई प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही है। जहां एक ओर ऑफलाइन स्टोर अब भी योजनाबद्ध खरीदारी और खोज का प्रमुख जरिया बने हुए हैं, वहीं क्विक कॉमर्स और इन्फ्लुएंसर-चालित कंटेंट की बदौलत अचानक स्नैकिंग की आदतों में तेजी आई है। खासतौर पर जेनरेशन जेड और मिलेनियल्स उपभोक्ताओं में यह प्रवृत्ति अधिक देखी जा रही है। यह पैकेज्ड स्नैक्स को साप्ताहिक रूप से पुराने उपभोक्ताओं की तुलना में दोगुनी दर (43 प्रतिशत बनाम 28 प्रतिशत) पर ऑर्डर करते हैं।
सांस्कृतिक बदलाव का संकेत
इस बीच, टियर 2 और टियर 3 शहर क्षेत्रीय खिलाड़ियों को तेजी से अपना रहे हैं। यह राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन की ताकत न होने के बावजूद, निरंतर गुणवत्ता और सामुदायिक उपस्थिति के जरिए गहरा विश्वास हासिल करते हैं। यह एक व्यापक सांस्कृतिक बदलाव का संकेत देता है जहां पारदर्शिता, विश्वसनीयता और स्थानीय जुड़ाव, स्वाद और मार्केटिंग पहुंच जितना ही महत्वपूर्ण हैं।