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कोरोनाकाल में बिगड़ी मेकअप इंडस्ट्री की सेहत , जानिए कैसे नुकसान की भरपाई कर रही हैं कंपनियां
Thu, 11 Feb 2021 04:17 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Thu, 11 Feb 2021 04:17 PM IST
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कोरोनाकाल में बिगड़ी मेकअप इंडस्ट्री की सेहत
- फोटो : pixabay
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कोरोना वायरस महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर डाला है। रियल एस्टेट, ऑटो इंडस्ट्री, एविएशन इंडस्ट्री समेत सभी क्षेत्रों को कोरोना की मार झेलनी पड़ी। मेक-अप इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं रही। कोरोनाकाल में ब्यूटी सैलून और ब्यूटी प्रोडक्ट काफी प्रभावित हुए हैं।
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इसलिए आई गिरावट
मेक-अप इंडस्ट्री की हालत का सबसे बड़ा कारण यह है कि कोरोनाकाल में कॉरपोरेट बैठकों और व्यक्तिगत मेल-मुलाकातों का दौर थमा हुआ था, जिसकी वजह से कॉस्मेटिक, हेयर केयर, फ्रेगरेंस जैसे कई ब्यूटी प्रोडक्ट की बिक्री में भारी गिरावट आई है।
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प्रति वर्ष 500 अरब डॉलर का कारोबार करती है वैश्विक ब्यूटी इंडस्ट्री
इस दौरान कॉस्मेटिक कंपनियों के ब्रांडेड स्टोर, एयरपोर्ट की ड्यूटी-फ्री दुकानें जैसे सेल्स चैनल भी बंद हुए, जिससे कंपनियों को नुकसान हुआ। मैकेंजी ग्लोबल कंज्यूमर सेंटीमेंट सर्वे के अनुसार, वैश्विक ब्यूटी इंडस्ट्री एक साल में लगभग 500 अरब डॉलर का कारोबार करती है। इससे करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है। सर्वे से सामने आया कि पिछले साल वैश्विक ब्यूटी इंडस्ट्री में गिरावट का दौर रहा। गिरावट का यह सिलसिला अब भी बरकरार है।
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कंपनियों के रेवेन्यू में बड़ी गिरावट
सर्वे के अनुसार, गुच्ची लिप्सटिक बनाने वाली कोटी इंक के रेवेन्यू में बड़ी गिरावट देखी गई है। वहीं अमेरिका के ब्यूटी इंडस्ट्री के रेवेन्यू में करीब 35 फीसदी की गिरावट आ सकती है। ईएमईए (यूरोप, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका) मार्केट का कोटी की कुल बिक्री में 40 फीसदी योगदान है। इस क्षेत्र से कंपनी की बिक्री में लगभग 22 फीसदी की गिरावट आई है।
खर्चों में कटौती की रणनीति अपना रहीं कंपनियां
मालूम हो कि तिमाही नतीजों के बाद कोटी के शेयरों में करीब 15 फीसदी की गिरावट देखी गई है। इस संदर्भ में कोटी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सू नाबी ने कहा कि 'लॉकडाउन से दूसरों की तरह हम पर भी असर पड़ा है। ई-कॉमर्स की वृद्धि से हमारे स्टोर बंद होने की भरपाई नहीं हो सकती।' ऐसे में नुकसान की भरपाई के लिए ब्यूटी कंपनियां खर्चों में कटौती की रणनीति अपना रही हैं। इसमें छंटनी, दुकानें बंद करना, संरचना में बदलाव जैसी रणनीतियां शामिल हैं।