मेक इन इंडिया : दो साल में 4.6 गुना बढ़ा उत्पादन क्षेत्र, बढ़ोतरी में नए ऑर्डर और निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका
मेक इन इंडिया से विकास को तेजी मिली। सरकार ने 2020-21 में 13 क्षेत्रों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का प्रस्ताव रखा। इसके लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल चुकी है। इनमें एसीसी बैटरी, टेक्सटाइल और स्टील आदि शामिल हैं।
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महामारी और मंदी से बिगड़े हालात के बीच देश का उत्पादन क्षेत्र मेक इन इंडिया के दम तेजी से उबर रहा है। इसमें नए ऑर्डर और निवेश की अहम भूमिका रही है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, 2021-22 में उत्पादन क्षेत्र 2019-20 के मुकाबले 4.6 गुना और 2020-21 की तुलना में 2.1 गुना बढ़ा है। कोरोना पूर्व स्तर से हुई तुलना में यह तेज वृद्धि दर्शाती है कि मेक इन इंडिया ने हालात को काफी हद तक सुधारा है।
इसकी प्रमुख वजह निजी क्षेत्र में नया निवेश है, जिसमें 2020 व 2021 के मुकाबले क्रमश: 1.45 व 1.5 गुना वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान नई परियोजनाओं की घोषणाएं भी 1.4 गुना बढ़ी है। इनमें इस्पात, पेट्रोकेमिकल्स, सीमेंट, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, डाटा सेंटर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। चालू वित्त वर्ष में नए अनुबंधों में 55% की वृद्धि हुई। सड़क निर्माण के दम पर बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश भी 1.35 गुना बढ़ा है।
पीएलआई से भी लाभ
मेक इन इंडिया से विकास को तेजी मिली। सरकार ने 2020-21 में 13 क्षेत्रों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का प्रस्ताव रखा। इसके लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल चुकी है। इनमें एसीसी बैटरी, टेक्सटाइल और स्टील आदि शामिल हैं।
निजी क्षेत्र का योगदान अहम
- 2021-22 में सरकारी क्षेत्र के टेंडर 2018-19 के मुकाबले लगभग बराबर रहे, लेकिन निजी क्षेत्र से नई परियोजनाओं में 1.45-1.5 गुना की बढ़ोतरी हुई।
- निर्यात को भी फायदा मिला। फरवरी, 2022 में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात पिछले साल से 33 फीसदी बढ़कर 940 करोड़ डॉलर रहा।
आंकड़ों में प्रमुख उपलब्धियां
नया निवेश
कहां से/वर्ष 2020 2022
केंद्र सरकार रु. 2,040 रु.2,756
राज्य सरकार रु.3,534 रु.3,240
निजी क्षेत्र रु.4,876 रु.11,103
कुल रु.10,857 रु.19,272
प्रमुख सेक्टर
क्षेत्र/वर्ष 2020 2022
उत्पादन रु.1,445 रु.8,032
खनन रु. 631 रु. 681
बिजली रु.1,187 रु. 1,494
बुनियादी क्षेत्र रु. 7,355 रु.8,883
सिंचाई रु. 239 रु.132
कुल रु.10,867 रु.19,272
(आंकड़े करोड़ में)
मार्च 2022 में प्रमुख सुधार
रेलवे से माल ढुलाई
- इस साल मार्च में सात फीसदी वृद्धि रही। केवल कोयले की ही ढुलाई 10 फीसदी बढ़ी। यह बिजली की मांग और परिणामस्वरूप उत्पादन में वृद्धि का संकेतक है।
- कंटेनरों में माल ढुलाई दो फीसदी बढ़ी और किराये पर ट्रकों की मांग भी पांच फीसदी तक बढ़ी।
- डीजल-पेट्रोल की मांग पिछले साल से क्रमशः 7 व 6 फीसदी वृद्धि।
हाईवे निर्माण : फरवरी तक 10,457 किमी हुआ, जो केंद्र के 12,000 किमी लक्ष्य से पीछे है। नए बजट में 25,000 किमी निर्माण के नए लक्ष्य ने सीमेंट की मांग बढ़ने की उम्मीद जगाई।