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इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी को कानून मंत्रालय की मंजूरी, तैयारी में जुटीं एयरलाइन कंपनियां

Wed, 28 Nov 2018 05:00 AM IST
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली Updated Wed, 28 Nov 2018 05:00 AM IST
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law ministry gives approval to inflight connectivity, will get net surfing during flight

हवाई जहाज में यात्रा करते समय मोबाइल फोन पर बात करना और डेटा प्रयोग करने का इंतजार अब खत्म होगा। कानून मंत्रालय ने इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी पर दूरसंचार विभाग के दिशा-निर्देशों को मंजूरी प्रदान कर दी है। विभाग इन निर्देशों को दो सप्ताह के भीतर अधिसूचित कर देगा। अधिसूचना जारी होने के बाद ही एयरलाइंस उपभोक्ताओं को देश के हवाई दायरे में यह सेवाएं दे सकेंगी।

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दूरसंचार विभाग द्वारा हवाई यात्रा में दूरसंचार सेवाएं देने से जुड़े 

दिशा-निर्देश करीब एक माह तक कानून मंत्रालय में विभिन्न कारणों से अटके थे। इनमें आवश्यक संशोधन के बाद मंत्रालय की ओर से निर्देशों के मसौदे को मंजूरी प्रदान की गई है। विभाग के मुताबिक स्पाइसजेट ने इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी सेवा देने की तैयारी कर ली है।
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स्पाइसजेट के 737 मैक्स विमान में यात्रा करने वाले जल्द उड़ान के दौरान मोबाइल पर बातचीत और डेटा का प्रयोग कर सकेंगे। एयर इंडिया समेत अन्य विमानन कंपनियां भी यह सेवा देने के लिए हवाई जहाज में ढांचागत व्यवस्थाएं कर रही हैं।
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एयरलाइन कंपनियों को यह सेवाएं मुहैया कराने के लिए दूरसंचार विभाग से लाइसेंस लेना होगा। विभाग द्वारा उपभोक्ताओं से यह सेवा देने के लिए एक रुपये का शुल्क तय किया है। विभाग का कहना है कि एयरलाइंस कंपनियों को आय का नया जरिया मिलेगा। जेट ब्लू, कतर एयरबेज, टर्की एयरलाइंस हवा में इंटरनेट की सुविधा देते हैं।

शुरू में मिलेगी नेट सर्फिंग की सुविधा

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इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी सेवा की शुरुआत में ग्राहक सिर्फ  इंटरनेट सर्फिंग कर सकेंगे। बातचीत की सेवाएं मुहैया कराने में अभी कुछ वक्त लगेगा। दूरसंचार आयोग ने भी देश की व्यवस्था का उपयोग सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए करने को कहा था।

समुद्र और जमीन से निर्धारित ऊंचाई 3,000 मीटर से ऊपर विमान पहुंचने पर भी सहमति बन गई है। करीब 30 विदेशी विमानन कंपनियां भारतीय हवाई सीमा से इतर कई देशों में इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी मुहैया कराती हैं।

इनमें एयर एशिया, एयर फ्रांस, ब्रिटिश एयरवेज समेत अन्य विमानन कंपनियां हैं। लेकिन अभी भारतीय हवाई क्षेत्र के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश और क्रियान्वयन नियम नहीं होने की वजह से यह सेवाएं बंद हो जाती हैं।

उल्लेखनीय है कि दूरसंचार नियामक द्वारा सिफारिश किए जाने के बाद सरकार यह सेवाएं ग्राहकों को देने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की ओर बढ़ी। इससे पहले दूरसंचार आयोग द्वारा ट्राई की सिफारिशों को मंजूरी प्रदान की गई थी।

भारतीय सेटेलाइट का होगा उपयोग

सुरक्षा के मद्देनजर भारत की सेटेलाइट के प्रयोग करना तय किया गया है। जबकि यह नियम ट्राई की उस सिफारिश के खिलाफ है जिसमें इस सेवा के मुहैया कराने में विदेशी सेटेलाइट और गेटवे के इस्तेमाल की सिफारिश की गई थी। लेकिन दूरसंचार आयोग ने विदेशी सेटेलाइट के प्रयोग को अस्वीकार कर दिया था।

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